शादी का वादा कर जमानत लेने के बाद मुकरा आरोपी, इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हुआ; मेरठ के SSP तलब

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में शादी का वादा कर जमानत लेने के बाद मुकरने के आरोपी को पेश किया गया। गैर-जमानती वारंट के बावजूद उसे दूसरी अदालत में पेश करने पर हाईकोर्ट ने मेरठ के CJM के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रयागराज/मेरठ: शादी करने का वादा कर जमानत हासिल करने और बाद में कथित तौर पर वादे से मुकरने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी को हाईकोर्ट के समक्ष पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को तलब किया। इसके बाद एसएसपी आरोपी को जेल से लेकर स्वयं हाईकोर्ट पहुंचे और उसे न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ के समक्ष पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने न्यायाधीश के सामने ही शिकायतकर्ता महिला मानसी से शादी करने से इनकार कर दिया। वारंट के अनुपालन में हुई चूक को लेकर हाईकोर्ट ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आचरण पर भी गंभीर आपत्ति जताई और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए आदेश पारित किए।

शादी का वादा करने पर मिली थी जमानत

मामले के अनुसार, 17 नवंबर 2025 को मानसी ने मेरठ जिले के सरधना निवासी नितीश उर्फ सिद्धार्थ उर्फ सेठी के खिलाफ शादी का झांसा देकर प्रताड़ित करने का मुकदमा दर्ज कराया था। यह मामला सरधना थाने में दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

इसके बाद नितीश ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने मानसी से शादी करने का प्रस्ताव रखा। इसी घटनाक्रम के बाद 18 मार्च 2026 को उसे जमानत मिल गई।

हालांकि, मानसी का आरोप है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी शादी करने से मुकर गया। इसके बाद उसने जमानत निरस्त कराने के लिए दोबारा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।

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गैर-जमानती वारंट के बावजूद हाईकोर्ट में पेश नहीं किया गया आरोपी

मानसी की जमानत निरस्तीकरण अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। अदालत ने मेरठ के एसएसपी को वारंट की तामील कराकर आरोपी को हाईकोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया।

वारंट के अनुपालन में सरधना के इंस्पेक्टर प्रताप सिंह ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उसे हाईकोर्ट में पेश करने के बजाय मेरठ के सीजेएम की अदालत में प्रस्तुत कर दिया। बताया गया कि 28 सितंबर 2026 को सीजेएम ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि हाईकोर्ट का निर्देश उसे उसी के समक्ष पेश करने का था।

सुनवाई पर आरोपी के गैरहाजिर रहने से हाईकोर्ट नाराज

8 अक्टूबर 2026 को मानसी की अर्जी पर सुनवाई हुई, लेकिन आरोपी हाईकोर्ट में मौजूद नहीं था। इसके बाद अदालत ने मेरठ के एसएसपी को 24 अक्टूबर तक आरोपी को हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।

निर्धारित तारीख पर मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति और सरधना के क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार आरोपी को जेल से लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। आरोपी को न्यायमूर्ति देशवाल की एकलपीठ के समक्ष पेश किया गया। मामले की सुनवाई दोपहर करीब 3:15 बजे शुरू हुई और शाम 4 बजे तक चली। मानसी और आरोपी, दोनों अदालत में उपस्थित थे।

अदालत में ही शादी से मुकरा आरोपी

सुनवाई के दौरान आरोपी नितीश ने न्यायाधीश के सामने मानसी से शादी करने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद मामले में आरोपी के पहले दिए गए वादे और जमानत निरस्त करने की मांग पर आगे न्यायिक विचार का प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया।

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हाईकोर्ट के समक्ष पेशी सुनिश्चित करने के लिए एसएसपी की व्यक्तिगत उपस्थिति इस मामले में वारंट के अनुपालन को लेकर अदालत की गंभीरता को भी दर्शाती है।

मेरठ के CJM के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि गैर-जमानती वारंट में आरोपी को हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने का स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद उसे सीजेएम के सामने प्रस्तुत किया गया और हाईकोर्ट में पेशी सुनिश्चित नहीं हुई।

अदालत ने मेरठ के सीजेएम के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता से जुड़ा मामला मानते हुए आदेश को संबंधित प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया, ताकि उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

जमानत निरस्तीकरण अर्जी पर आगे की सुनवाई

यह मामला इस सवाल को भी रेखांकित करता है कि जमानत के दौरान अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन का कथित उल्लंघन होने पर अदालत किन परिस्थितियों में जमानत निरस्तीकरण की अर्जी पर विचार कर सकती है। हालांकि, जमानत रद्द करने का अंतिम निर्णय अदालत के समक्ष उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनी सिद्धांतों के आधार पर ही होगा।

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