फ्लाइट कैंसिल होने पर एयरलाइन यात्री को दे ₹40,000 मुआवजा: बेंगलुरु कंज्यूमर कमीशन का आदेश, बिजनेस लॉस के दावे के लिए मांगे दस्तावेज

Like to Share

बेंगलुरु कंज्यूमर कमीशन ने दिल्ली-बेंगलुरु फ्लाइट रद्द होने के मामले में एयरलाइन को यात्री को ₹30,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया। बिजनेस लॉस और होटल खर्च के दावे पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में स्वीकार नहीं किए गए।

बेंगलुरु की जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फ्लाइट रद्द होने के कारण यात्रा बाधित होने के मामले में एक निजी एयरलाइन को यात्री को कुल ₹40,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने ₹30,000 मानसिक परेशानी और असुविधा के मुआवजे के रूप में तथा ₹10,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया।

आयोग ने कहा कि निर्धारित उड़ान रद्द होने से यात्री को असुविधा और परेशानी का सामना करना पड़ा, जो सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के दायरे में आता है। टिकट का पैसा वापस कर देना अपने आप में यात्री को हुई असुविधा की पूरी भरपाई नहीं है।

तृतीय अतिरिक्त बेंगलुरु शहरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष के. शिवराम और सदस्य रेखा सायन्नावर ने बेंगलुरु निवासी वी. दिवाकर की शिकायत पर 25 सितंबर को यह आदेश पारित किया।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता वी. दिवाकर कपड़ों का कारोबार करते हैं। उन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को 5 दिसंबर 2025 की दिल्ली से बेंगलुरु यात्रा के लिए टिकट बुक किया था, जिसके लिए उन्होंने ₹8,095 भुगतान करने की बात कही।

दिवाकर के अनुसार, जब वह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने उन्हें पहले से पर्याप्त सूचना नहीं दी और न ही उनकी आगे की यात्रा के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की।

यात्री ने आयोग को बताया कि यात्रा का उद्देश्य रेशम और साड़ियों की थोक खरीद से संबंधित व्यावसायिक बैठक में शामिल होना था। उड़ान रद्द होने के कारण वह बैठक में नहीं पहुंच सके और उन्हें एक महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर गंवाना पड़ा।

₹8 लाख के कारोबारी सौदे और ₹3 लाख के नुकसान का दावा

दिवाकर ने दावा किया कि प्रस्तावित थोक खरीद का कारोबार लगभग ₹8 लाख का था और इस सौदे से उन्हें करीब ₹3 लाख का व्यावसायिक लाभ हो सकता था। उनके अनुसार, फ्लाइट रद्द होने के कारण वह यह अवसर गंवा बैठे।

Must Read -  तिस हजारी कोर्ट: मध्यस्थ के आदेश में दखल से इंकार, सत्याॅम पॉलीनिट्स की अपील खारिज

उन्होंने वैकल्पिक यात्रा के लिए 5 दिसंबर को दूसरी फ्लाइट बुक की, जिससे उन्हें ₹24,470 खर्च करने पड़े। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गुरुग्राम में दो दिन रुकने के लिए ₹17,936 होटल खर्च होने का दावा किया।

शिकायतकर्ता ने एयरलाइन से टिकट राशि की वापसी पर ब्याज, अतिरिक्त यात्रा एवं होटल खर्च, कारोबारी नुकसान, मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और व्यावसायिक प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा।

एयरलाइन ने क्या दलील दी?

एयरलाइन ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि फ्लाइट परिचालन संबंधी कारणों से रद्द की गई थी और यात्री को तत्काल इसकी जानकारी दे दी गई थी। उसने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के आरोपों से इनकार किया।

एयरलाइन ने यह भी कहा कि बुकिंग के लिए ₹29,400 किराया और सीट शुल्क के रूप में ₹694 का भुगतान किया गया था। उसके अनुसार, पूरी राशि 8 दिसंबर 2025 को भुगतान के मूल स्रोत यानी ट्रैवल एजेंट के खाते में वापस कर दी गई थी।

बिजनेस लॉस और होटल खर्च का दावा क्यों खारिज हुआ?

आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता अपने अतिरिक्त आर्थिक नुकसान के दावों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

आयोग के समक्ष होटल के बिल, रेस्तरां की रसीदें या अन्य संबंधित खर्चों के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी तरह, कथित कारोबारी नुकसान को साबित करने के लिए व्यावसायिक खाते, इनवॉइस, पत्राचार या सौदे से जुड़े अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल दावा कर देने से आर्थिक नुकसान की राशि का भुगतान नहीं कराया जा सकता। ऐसे दावों के लिए विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।

हालांकि, दस्तावेजों की कमी के कारण कारोबारी नुकसान और अतिरिक्त खर्चों के दावे स्वीकार नहीं किए गए, लेकिन आयोग ने माना कि उड़ान रद्द होने से यात्री की निर्धारित यात्रा बाधित हुई और उसे असुविधा का सामना करना पड़ा। इस आधार पर एयरलाइन को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

Must Read -  CCI ने 'WhatsApp' को सहयोगी कंपनियों 'META' के साथ डेटा साझा करना बंद करने का आदेश दिया, लगाया ₹213 करोड़ का जुर्माना

45 दिनों में भुगतान का आदेश, देरी पर 9% ब्याज

आयोग ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर कुल ₹40,000 का भुगतान करे।

निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर पूरी देय राशि पर वास्तविक भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है कानूनी सबक?

यह मामला बताता है कि फ्लाइट रद्द होने पर यात्री केवल टिकट रिफंड तक सीमित राहत का दावा नहीं कर सकता। परिस्थितियों के आधार पर सेवा में कमी के लिए अतिरिक्त मुआवजा भी मांगा जा सकता है। हालांकि, मुआवजे की राशि और अन्य आर्थिक दावों का निर्धारण उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगा।

ऐसी स्थिति में यात्रियों को निम्नलिखित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए:

  • मूल टिकट, बुकिंग कन्फर्मेशन और भुगतान की रसीद।
  • फ्लाइट कैंसिलेशन से संबंधित ईमेल, SMS और एयरलाइन के संदेश।
  • वैकल्पिक फ्लाइट के टिकट और भुगतान के प्रमाण।
  • होटल, भोजन, टैक्सी तथा अन्य अतिरिक्त खर्चों के बिल।
  • कारोबारी नुकसान के दावे के समर्थन में अनुबंध, इनवॉइस, ईमेल, बैठक का रिकॉर्ड और संबंधित वित्तीय दस्तावेज।

निष्कर्ष: बेंगलुरु कंज्यूमर कमीशन के आदेश से स्पष्ट होता है कि फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण हुई असुविधा के लिए उपभोक्ता मुआवजे का हकदार हो सकता है। लेकिन बड़े कारोबारी नुकसान या अतिरिक्त खर्चों की भरपाई पाने के लिए ठोस दस्तावेजी साक्ष्य महत्वपूर्ण हैं।

Tags: #BengaluruConsumerCommission #FlightCancellation #AirlineCompensation #ConsumerRights #DeficiencyInService #UnfairTradePractice #ConsumerCourt #बेंगलुरुकंज्यूमरकमीशन #फ्लाइटकैंसिलेशन #एयरलाइनमुआवजा #उपभोक्ताअधिकार #सेवामेंकमी #उपभोक्ताआयोग

Leave a Comment