इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत परिसर में नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही बाधित करने को अवमाननापूर्ण आचरण बताते हुए CCTV फुटेज की जांच का निर्देश दिया। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने संबंधित वकीलों की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा। मामले को यूपी बार काउंसिल भेजने और अवमानना कार्यवाही की संभावना भी जताई गई।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत परिसर में वकीलों द्वारा नारेबाजी करने, न्यायिक कार्यवाही बाधित करने और न्यायिक प्रक्रिया में अवरोध पैदा करने की घटना पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस आचरण को अवमाननापूर्ण बताते हुए रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया कि अदालत कक्ष के बाहर लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल जांची जाए और हंगामे में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर रिपोर्ट पेश की जाए।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित वकीलों की पहचान होने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जाएगा। इसके अलावा, उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।
कोर्ट नंबर 49 में विवाद के बाद बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम मंगलवार को कोर्ट नंबर 49 में हुए विवाद के बाद सामने आया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता को कथित तौर पर चेतावनी दी गई थी कि उसे जेल भेजा जा सकता है और उससे पुलिस अधीक्षक (SP) से माफी मांगने को कहा गया था।
इस घटना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कोर्ट नंबर 49 के बहिष्कार का आह्वान किया। एसोसिएशन ने संबंधित न्यायिक व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी।
बुधवार को इसी विवाद के सिलसिले में कुछ अधिवक्ताओं ने अदालत परिसर में हंगामा किया और नारेबाजी की। इस घटनाक्रम के बाद हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान डालने वाले लोगों की पहचान और उनके आचरण की जांच के निर्देश दिए।
CCTV फुटेज से होगी अधिवक्ताओं की पहचान
अदालत ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया कि अदालत कक्ष के बाहर लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल देखी जाए। इसका उद्देश्य हंगामे में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करना और घटनाक्रम के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करना है।
अदालत के निर्देश के अनुसार, पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जाएगा। अदालत की अवमानना के पहलू पर भी आगे कार्रवाई हो सकती है।
यह निर्देश फिलहाल पहचान और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया से संबंधित है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ किसी अंतिम दंडात्मक निष्कर्ष को इस स्तर पर पूर्वनिर्धारित नहीं माना जा सकता।
बार काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई और अवमानना में अंतर
मामले में दो अलग-अलग प्रकार की कार्रवाई की संभावना सामने आई है।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण की जांच कर लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
- अदालत की अवमानना: न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने या अदालत की गरिमा को प्रभावित करने वाले आचरण पर सक्षम न्यायालय कानून के अनुसार अवमानना की कार्यवाही पर विचार कर सकता है।
दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य और कानूनी आधार अलग हैं। CCTV फुटेज तथा रजिस्ट्रार की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह घटनाक्रम बार और बेंच के बीच बढ़ते तनाव तथा अदालतों में विरोध के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। अधिवक्ताओं को न्यायिक आचरण के संबंध में शिकायत दर्ज कराने और संस्थागत माध्यमों से समाधान मांगने का अधिकार है। हालांकि, न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने या अदालत परिसर में हंगामा करने के आरोपों की जांच कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
अब रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) की रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के बाद संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान तथा आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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