सुप्रीम कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड को दी राहत, हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में संशोधन कर नीतिगत फैसलों और पूंजीगत व्यय पर लगी रोक हटाई

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केरल वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए केरल राज्य वक्फ बोर्ड को नीतिगत फैसले लेने और पूंजीगत व्यय करने की अनुमति दी। साथ ही हाईकोर्ट से मामले का शीघ्र निस्तारण करने का अनुरोध किया।


मामले की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल राज्य वक्फ बोर्ड (Kerala State Waqf Board) को बड़ी राहत देते हुए केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कुछ हिस्सों में संशोधन किया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने बोर्ड को दोबारा नीतिगत निर्णय (Policy Decisions) लेने और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) करने की अनुमति दे दी।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट से लंबित याचिकाओं का शीघ्र निस्तारण करने का अनुरोध भी किया।


क्या था केरल हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश?

केरल हाईकोर्ट ने 15 जुलाई को अंतरिम आदेश पारित करते हुए वक्फ बोर्ड के कामकाज पर कई प्रतिबंध लगाए थे।

अदालत ने—

  • बोर्ड को नीतिगत फैसले लेने से रोका था।
  • पूंजीगत व्यय करने पर भी रोक लगाई थी।
  • साथ ही निर्देश दिया था कि बोर्ड राज्य सरकार के संयुक्त सचिव (Joint Secretary) की निगरानी में कार्य करेगा।

यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिनमें दावा किया गया था कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम के तहत बोर्ड की संरचना कानून के अनुरूप नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या संशोधन किया?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस हिस्से को हटा दिया जिसमें—

  • बोर्ड को नीतिगत निर्णय लेने से रोका गया था।
  • पूंजीगत व्यय पर रोक लगाई गई थी।
  • संयुक्त सचिव की निगरानी में बोर्ड के कार्य करने का निर्देश दिया गया था।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि—

  • संयुक्त सचिव, जो पहले से बोर्ड के सदस्य हैं, सिर्फ सदस्य के रूप में ही कार्य करते रहेंगे।
  • बोर्ड के कार्यों की निगरानी करने संबंधी निर्देश अब लागू नहीं रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा—

“हाईकोर्ट के उस आदेश की आवश्यकता नहीं है, जिसमें बोर्ड को नीतिगत निर्णय लेने या पूंजीगत व्यय करने से रोका गया है। इसलिए बोर्ड को संयुक्त सचिव की निगरानी में कार्य करने संबंधी निर्देश हटाया जाता है। संयुक्त सचिव केवल बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करते रहेंगे।”

पीठ ने यह भी अनुरोध किया कि हाईकोर्ट सभी पक्षों को हलफनामे और जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर देकर मामले की जल्द सुनवाई करे।


जस्टिस जॉयमाल्य बागची की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा—

“सिर्फ बोर्ड की संरचना को चुनौती दिए जाने के कारण उसके पूरे कामकाज को क्यों रोका जाए?”


वक्फ बोर्ड की दलील

केरल राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि—

  • हाईकोर्ट ने असाधारण अंतरिम आदेश पारित किया।
  • यह आदेश विपक्षी दल के एक नेता द्वारा दायर याचिका पर दिया गया।
  • बोर्ड के सदस्यों को याचिकाओं की प्रतियां तक उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।

वक्फ बोर्ड का कहना था कि इन प्रतिबंधों के कारण बोर्ड का कामकाज लगभग ठप हो गया था।


केरल सरकार का पक्ष

केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामला पहले से ही केरल हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपील का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट से मामले का जल्द फैसला करने का अनुरोध किया।


क्या है पूरा विवाद?

केरल हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं, जिनमें भाजपा नेता शोन जॉर्ज की याचिका भी शामिल है, में आरोप लगाया गया है कि—

  • केरल राज्य वक्फ बोर्ड की वर्तमान संरचना वक्फ (संशोधन) अधिनियम के अनुरूप नहीं है।
  • विशेष रूप से बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति संबंधी कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

इन याचिकाओं पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।


अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है

सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर वक्फ बोर्ड की संरचना की वैधता पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है।

अदालत ने केवल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए बोर्ड के सामान्य प्रशासनिक और नीतिगत कार्यों पर लगी रोक हटाई है। बोर्ड की संरचना से जुड़ा मूल विवाद अभी भी केरल हाईकोर्ट में विचाराधीन है।


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