सुप्रीम कोर्ट बना जमानत अदालत, न्यायिक बोझ पर जस्टिस नागरत्ना की गंभीर चिंता

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📄 सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय “जमानत अदालत” बनकर रह गया है और निचली अदालतों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बना जमानत अदालत, न्यायिक बोझ पर जस्टिस नागरत्ना की गंभीर चिंता नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या … Read more

अंतरिम राहत देने के लिए न्यायालय की शक्ति U/s. 9 मध्यस्थता अधिनियम, CPC में हर प्रक्रियात्मक प्रावधान की कठोरता से कम नहीं: SC

सुप्रीम कोर्ट ने देखा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 9 के तहत अंतरिम राहत देने की न्यायालय की शक्ति सिविल प्रक्रिया संहिता में प्रत्येक प्रक्रियात्मक प्रावधान की कठोरता से कम नहीं है। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की खंडपीठ ने कहा की “मध्यस्थता अधिनियम की धारा 9 के तहत … Read more

SC ने हाई कोर्ट के निष्कर्षों को माना अतार्किक, कहा ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए HC को मजबूत और ठोस कारण बताना चाहिए-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामले में जहां अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही के बीच स्पष्ट विरोधाभासों के कारण बरी कर दिया गया है, ऐसे फैसले को पलटने के लिए कोर्ट को मजबूत और ठोस कारण बताना चाहिए। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने इस प्रकार कहा, “पीडब्ल्यू1 … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने IPC U/S 307 की सजा को खारिज करते हुए कहा: अदालतें अभियुक्त के बचाव को सरसरी तौर पर स्वीकार/अस्वीकार नहीं कर सकतीं –

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतों को किसी आरोपी व्यक्ति के बचाव पर सावधानी से विचार करना चाहिए और आगे कहा कि इस तरह के बचाव की स्वीकृति या अस्वीकृति सरसरी तौर पर नहीं की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा- “…आरोपियों के बचाव पर विचार करना नीचे की अदालतों का गंभीर कर्तव्य … Read more

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा ब्रूटल रेप & मर्डर केस में सजा को बदलने पर कड़ा एतराज जताया-

Dhc

दिल्ली उच्च न्यायालय Delhi High Court ने सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court द्वारा निर्धारित कानून की एक स्थिति को दोहराया और कहा कि ट्रायल कोर्ट Trail Court खुद ‌दिए गए आजीवन कारावास के दंड को शेष प्राकृतिक जीवन के ‌लिए तय करने के लिए अहर्ता नहीं रखते है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की … Read more

Allahabad High Court: जजों, कोर्ट स्टाफ को बेईमान व संविधान का हत्यारा बताने वाला कोर्ट लिपिक गिरफ्तार, नैनी जेल से होगा पेश-

हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने बुलंदशहर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में लिपिक रहे विक्रम शर्मा के खिलाफ आपराधिक अवमानना का आरोप निर्मित कर चार दिन में सफाई मांगी है। नैनी केंद्रीय कारागार से पेश शर्मा पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रदेश के मुख्यमंत्री, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 15 दिसंबर … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अदालतों को किसी मामले के सभी मुद्दों पर न्यायिक निर्णय देना चाहिए न कि सिर्फ एक मुद्दे पर-

सर्वोच्च न्यायलय ने मंगलवार एक मामले कि सुनवाई करते हुए निचली अदालतों को आगाह किया कि मामलों का फैसला करने में शॉर्टकट की मानसिकता से बचें। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि निचली अदालतो द्वारा कुछ सवाल अनुत्तरित छोड़ने के बदले मुकदमे के हर पहलू पर पूरी तरह विचार … Read more

हाई कोर्ट: आरोपी का वकील अदालत के सामने पेश नहीं होता है तो, निचली अदालत आरोपी के लिए एक वकील नियुक्त करने के लिए बाध्य है-

अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 13 (2) राज्य को मौलिक अधिकारों को छीनने वाले किसी भी कानून को बनाने से रोकता है। इस संदर्भ में, अदालत ने कहा कि POCSO Act की धारा 33(5) की निचली अदालत की व्याख्या Constitution संविधान के अनुच्छेद 13 के विपरीत है कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा है … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने जिरह की प्रक्रिया अचानक स्थगित करने का संज्ञान लिया और कहा कि ऐसा करने से न्याय वाधित होता है-

सर्वोच्च अदालत ने जिरह की प्रक्रिया अचानक स्थगित करने का संज्ञान लिया और कहा कि इससे ऐसे हालात पैदा होते हैं जिससे निजी गवाह मुकर जाते हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि तय समय में आरोपपत्र का संज्ञान नहीं लेने पर जमानत का अधिकार नहीं। Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशभर … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट: क्या गैर-संज्ञेय अपराधों में मजिस्ट्रेट चार्जशीट का संज्ञान ले सकता है? जानिए विस्तार से-

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना है कि Cr.P.C. सीआरपीसी की धारा 2 (डी) के मद्देनजर, जहां गैर-संज्ञेय अपराध शामिल हैं, मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र का संज्ञान नहीं ले सकते, इसके बजाय इसे शिकायत के रूप में माना जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सैयद आफताफ हुसैन रिजवी ने विमल दुबे और एक अन्य द्वारा Cr.P.C. धारा … Read more