वैवाहिक पुनर्स्थापन केस को तलाक में तब्दील करने की अर्जी मंजूर, हाई कोर्ट ने दिया मंजूरी की तारीख पर निर्णय

उच्च न्यायलय ने कहा फॅमिली कोर्ट आगरा की ओर से संशोधन अर्जी निरस्त करना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है। हाईकोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत आगरा के संशोधन अर्जी खारिज करने के 28 जूलाई 22 के आदेश को रद्द कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि परिवार अदालत में विवाह पुनर्स्थापित करने … Read more

एक शादीसुदा पुरुष जो कमाने में सक्षम है, अपनी पत्नी और बच्चे के गुजारे भत्ते के लिए बाध्य है: HC

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने "पाकिस्तानी नागरिक" कहकर निर्वासन की कार्रवाई पर लगाई रोक, IRP कांस्टेबल समेत चार याचिकाकर्ताओं को राहत

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायलय Jammu & Kashmir & Laddakh High Court ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान हाल ही में दोहराया कि एक बार जब कोई व्यक्ति शादी करने और परिवार बढ़ाने का फैसला करता है, तो वह मुड़कर यह नहीं कह सकता है कि वह अपने कानूनी और नैतिक दायित्व … Read more

हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13बी(2) छह महीने की कूलिंग अवधि निदेशिका, अनिवार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी (2) के तहत अर्जी दाखिल करने और अनुमति देने के बीच छह महीने की कूलिंग अवधि की आवश्यकता निदेशिका (डायरेक्ट्री) है, न कि अनिवार्यता । कोर्ट उस याचिका पर विचार कर रहा … Read more

अदालत के आदेश पर जबरन पत्नी को साथ रहने को मजबूर करना भी गलत, पत्नी के साथ क्रूरता – हाई कोर्ट

कुरान की सूरा 4 आयत 3 के हवाले से यह भी कहा, ”यदि मुस्लिम अपनी पत्नी और बच्चों की सही देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरी शादी करने की इजाजत नहीं“ मुस्लिमों को पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना गलत, ऐसा करने से बचना चाहिए। कोर्ट के आदेश पर जबरन पत्नी … Read more

तलाक पूर्व पति का निवास छोड़ने वाली महिला वहां रहने का अधिकार भी खो देती है : बॉम्बे एचसी

एक महिला जो तलाक के लिए अपने पति का घर छोड़ देती है, बाद में उसी घर में ‘निवास का अधिकार’ मांगने का अधिकार भी खो देती है, भले ही तलाक के खिलाफ उसकी याचिका घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत लंबित हो। बॉम्बे उच्च न्यायलय की औरंगाबाद बेंच ने यह फैसला … Read more

क्या अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल कर पारिवारिक न्यायलय जाने से पहले ही भंग की जा सकती है शादी? SC में सुनवाई-

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा की दो बहुत अच्छे लोग अच्छे साथी नहीं हो सकते हैं। कई बार हमारे सामने ऐसे मामले आते हैं जहां लोग काफी समय तक साथ रहते हैं और फिर शादी टूट जाती है। संविधान के अनुच्छेद 142 Article 142 of Indian Constitution के तहत शक्ति के … Read more

विवाह केवल शारीरिक सुख की संतुष्टि के लिए नहीं है, यह मुख्य रूप से संतानोत्पत्ति के लिए : वैवाहिक विवाद में उच्च न्यायालय

मद्रास उच्च न्यायालय अन्ना विश्वविद्यालय में एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में मद्रास HC ने अधिवक्ता के अनुरोध पर स्वतः संज्ञान याचिका शुरू कर एसआईटी गठित की

पत्नी ने अपनी कानून की डिग्री पूरी करने के बाद एक वकील के रूप में अपना पेशेवर करियर शुरू करने की कोशिश की, तो उनके बीच विवाद पैदा हो गया क्योंकि पति ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई- मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि विवाह केवल शारीरिक सुख को संतुष्ट करने के लिए नहीं है … Read more

लिव-इन-रिलेशनशिप से वैवाहिक संबंधों में ‘यूज़ एंड थ्रो’ की उपभोक्ता संस्कृति बढ़ रही है : उच्च न्यायलय

उच्च न्यायलय ने यह नोट किया है कि युवा पीढ़ी शादी को एक बुराई मानती है जिससे मुक्त जीवन का आनंद लेने से बचा जा सकता है। केरल उच्च न्यायालय ने पाया कि वर्तमान में वैवाहिक संबंध ‘उपयोग और फेंक’ की उपभोक्ता संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं और राज्य में लिव-इन संबंध बढ़ रहे … Read more

अगर पति को घर से निकालना ही घरेलू शांति बनाए रखने का एकमात्र निदान है तो उसे निकाल देना चाहिए – उच्च न्यायलय

एक अपमानजनक पति को उसके घर से बाहर करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पति को अकेले घर से निकालना ही घरेलु शांति सुनिश्चित करता है तो कोर्ट को इस तरह के आदेश पारित करने चाहिए, भले ही उसके पास वैकल्पिक आवास हो या नहीं। मद्रास उच्च न्यायलय Madras High Court ने निर्णय … Read more

हाईकोर्ट ने पति द्वारा Family Court के आदेश को चुनौती देने पर लगाया 20,000 रु का जुर्माना, कहा गुजारा भत्ता न देना मानवीय दृष्टिकोण में सबसे बड़ा अपराध-

दिल्ली उच्च न्यायलय Delhi High Court ने अलग रह रही पत्नी और बच्चे को गुजारा भत्ता Alimony नहीं देने को मानवीय दृष्टिकोण से सबसे बड़ा अपराध बताया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पति द्वारा पारिवारिक न्यायलय Family Court के आदेश को चुनौती देने पर उस पर 20,000 रुपये का भी जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति … Read more