वाराणसी से वाडिप्पट्टि तक ‘गायें पवित्र’ हैं, कोई उनका मजाक उड़ाने की हिम्मत नहीं कर सकता – हाईकोर्ट

उच्च न्यायलय ने कहा कि देशभर में राष्ट्रीय सुरक्षा ‘परम पवित्र गाय’ है. अदालत ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज पुलिस की प्राथमिकी(FIR) रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. अदालत ने कहा, ‘प्राथमिकी(FIR) दर्ज करना ही बेतुका और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है. इसे रद्द किया जाता है.’ अदालत ने पश्चिम बंगाल में टैगोर, तमिल … Read more

देश की न्यायप्रणाली पर हावी हो रही ट्रोल आर्मी ? न्यायाधीशों को सता रहा बदनामी व् ट्रोल होने का डर-

एक लाइन में कहें तो ये घटना भारत की न्यायिक व्यवस्था और लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत है. क्योंकि अगर ट्रोल आर्मी हमारे देश की अदालतों और जजों पर हावी हो जाएगी, उन्हें बदनामी और अपमान का डर दिखाएगी, तो न्याय बचेगा ही नहीं. जब कोई विवाद तमाम कोशिशों के बाद … Read more

अभियुक्त के पास अगर नहीं है ज़मानतदार तब कानून में क्या है प्रावधान, जानिए विस्तार से केस विवरण के साथ –

CRPC BAIL

ज़मानत के लिए गिड़गिड़ाना तथा किसी व्यक्ति से अपने प्रकरण में प्रतिभू बनने हेतु निवेदन करना अपनी गरिमा एवं प्रतिष्ठा को ठेंस पहुंचाने जैसा है। यह गरिमा एवं प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति को संविधान के अंतर्गत दिए गए मूल अधिकारों में निहित है। संपूर्ण भारत में कोई अभियुक्त (Accused) किसी अन्य स्थान पर निवास करता है … Read more

NI Act Sec 138 उन मामलों में भी लागू होती है जहां चेक आहरण के बाद और प्रस्तुति से पहले ऋण लिया जाता है – सुप्रीम कोर्ट

धारा 142 के साथ धारा 138 NI Act के तहत आपराधिक मामले में Supreme Court ने कहा कि 'शादी का झूठा वादा करके बलात्कार नहीं किया जा सकता'

केवल चेक को एक प्रतिभूति के रूप में लेबल करने मात्र से कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या देयता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए एक इंस्ट्रूमेंट के रूप में इसके चरित्र को खत्म नहीं किया जाएगा।” सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (Negotiable Instrument Act) एक्ट की धारा 138 … Read more

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, मणिपुर समेत 10 राज्यों में हिंदु अल्पसंख्यक, क्यों नहीं मिल रहा फायदा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब-

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 (“NMCA”) की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं को गुवाहाटी, मेघालय और दिल्ली हाईकोर्ट से अपने पास स्थानांतरित करने की अनुमति दी। माननीय उच्चतम न्यायलय ने शुक्रवार को केंद्र को प्रत्येक राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी आबादी के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए … Read more

जजों और कोर्ट के स्टाफ़ को मिला मंदिर की सफ़ाई करने का आदेश- जानिए पूरा मामला

बिहार के बक्सर में जिला और सत्र न्यायाधीश ने हाल ही में न्यायिक अधिकारियों और अदालत के कर्मचारियों को 9 जनवरी, 2022 को मंदिरों की सफाई करने का आदेश दिया, जब तक कि वे एक विशेष बैठक में शामिल न हों. रिपोर्ट के मुताबिक नौ जनवरी की सुबह न्यायिक अधिकारी और अदालत के अन्य अधिकारी … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने परिसीमा अवधि बढ़ाने के दिए आदेश; 15.03.2020 से 28.02.2022 तक की अवधि को परिसीमा से रखा गया है बाहर, विस्तार से जाने-

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा दायर एक आवेदन के तहत स्वत: संज्ञान मामले में परिसीमा अवधि बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार किया। देश के सर्वोच्च न्यायलय ने COVID-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए न्यायालयों और न्यायाधिकरणों … Read more

इलाहाबाद हाईकोर्ट का निचली अदालतों को यह निर्देश कि – जमानत आदेशों में आवेदकों के आपराधिक इतिहास का पूरा विवरण दिया जाये

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Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे आवेदकों/अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, यदि कोई हो, का पूरा विवरण दें या यदि कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तो इस तथ्य को रिकॉर्ड करें कि आवेदक/अपराधी का कोई नहीं आपराधिक इतिहास नहीं है। जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने … Read more

साइबर अपराध में सही दिशा में जांच आगे बढ़ने में असमर्थता और जांच अधिकारियों के उचित प्रशिक्षण की कमी – इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राज्य में Cyber Crime साइबर अपराध से संबंधित मामलों में जांच की सही पंक्तियों को आगे बढ़ाने में असमर्थता और जांच अधिकारियों के उचित प्रशिक्षण की कमी पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने पूछा है कि, “क्या कोई विशेषज्ञ निकाय यू.पी. पुलिस U.P.Police द्वारा स्थापित … Read more

उच्च न्यायलय के ऊपर आधारहीन आरोप लगाने पर शीर्ष अदालत ने रु. 25 लाख का लगाया अर्थदंड-

याचिकाकर्ताओं के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने “खासगी” शब्द के अर्थ का पता लगाते हुए प्रस्तुत किया कि संपत्ति 18 वीं शताब्दी से परिवार में जारी थी और इसे भारत सरकार के पत्रों द्वारा भी मान्यता दी गई थी। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट और राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों के खिलाफ … Read more