हाथरस केस: पीड़ित परिवार के ट्रांसफर पर SC ने सुनवाई से किया इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस गैंगरेप केस में पीड़ित परिवार को दिल्ली शिफ्ट करने की मांग पर सुनवाई से इनकार किया; मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास लंबित।


हाथरस गैंगरेप और हत्या मामले में एक अहम घटनाक्रम में Supreme Court of India ने पीड़ित परिवार को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला पहले से ही Allahabad High Court के समक्ष लंबित है और वहीं पर विचार किया जाना उचित होगा।


🔹 क्या थी याचिका

यह याचिका 2020 में Hathras में हुई 10 वर्षीय दलित बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले से संबंधित थी।

पीड़ित परिवार की ओर से:

👉 परिवार को दिल्ली शिफ्ट करने की मांग की गई थी


🔹 सुप्रीम कोर्ट का रुख

जस्टिस P. S. Narasimha और जस्टिस Alok Aradhe की पीठ ने कहा:

  • मामला पहले से हाईकोर्ट की निगरानी में है
  • ऐसे में समानांतर कार्यवाही (parallel proceedings) उचित नहीं है

कोर्ट ने टिप्पणी की:
👉 “जब मामला हाईकोर्ट में लंबित है, तो यहां क्यों?”


🔹 हाईकोर्ट को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने Allahabad High Court से अनुरोध किया कि:

पर लंबित याचिका पर शीघ्र निर्णय ले


🔹 याचिकाकर्ता की दलील

पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा ने तर्क दिया कि:

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👉 पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए ठोस योजना बनाना अनिवार्य है

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • हाईकोर्ट ने परिवार को दिल्ली शिफ्ट करने की मांग पर राहत नहीं दी
  • इसलिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया

🔹 राज्य सरकार का पक्ष

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि:

  • परिवार को राज्य के भीतर ही
    👉 अलीगढ़ या कासगंज

जैसे स्थानों पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया गया है

साथ ही यह भी बताया गया कि:
👉 मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है


🔹 सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि:

  • याचिका पुराने अंतरिम आदेश (2022) से संबंधित है
  • और बाद की कार्यवाही हाईकोर्ट में लंबित है

👉 इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा

अदालत ने SLP का निपटारा करते हुए कहा कि:
👉 हाईकोर्ट ही इस मुद्दे पर उचित आदेश पारित करे


🔹 मामले की वर्तमान स्थिति

Allahabad High Court पहले से:

  • पीड़ित परिवार की सुरक्षा
  • पुनर्वास
  • और प्रशासनिक जवाबदेही

जैसे मुद्दों की निगरानी कर रहा है

हाल की सुनवाई में:

  • राज्य सरकार को पुनर्वास प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए
  • और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए

🔹 कानूनी महत्व

यह फैसला स्पष्ट करता है कि:

  • एक ही मामले में
    👉 अलग-अलग अदालतों में समानांतर याचिकाएं दाखिल करना उचित नहीं
  • न्यायिक अनुशासन (judicial discipline) बनाए रखना आवश्यक है

🔹 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर यह संकेत दिया है कि लंबित मामलों में उचित मंच पर ही राहत मांगी जानी चाहिए। अब इस संवेदनशील मामले में अंतिम निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट के हाथ में है।

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