दिल्ली हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस और सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा—जोखिम स्पष्ट है, 24×7 सुरक्षा पर तुरंत ठोस फैसला लें।
सुरक्षा पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
मंगलवार को Delhi High Court ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर Delhi Police और अन्य सरकारी प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन का रवैया चिंताजनक है और यह स्वीकार्य नहीं कि अधिकारी किसी अप्रिय घटना का इंतज़ार करें।
‘हादसे के बाद नहीं, पहले कार्रवाई’
मामले की सुनवाई करते हुए Justice Manoj Jain ने सुरक्षा उपलब्ध कराने में हुई देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने पूछा कि जब जोखिम स्पष्ट है तो अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। अदालत ने यह भी माना कि जिला न्यायाधीशों के लिए 24 घंटे सुरक्षा की मांग प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होती है और इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर असंतोष
बेंच ने अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाब को “असंवेदनशील” और “गंभीरता की कमी वाला” करार दिया। अदालत ने यह भी नोट किया कि इस मुद्दे पर पहले हुई बैठक में कई अहम बिंदुओं को संबोधित ही नहीं किया गया और कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों की अनुपस्थिति भी रही।
अन्य राज्यों का हवाला
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता Kirti Uppal, जो Judicial Service Association of Delhi की ओर से पेश हुईं, ने अदालत को बताया कि कई राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को पहले से सुरक्षा उपलब्ध है। इसके विपरीत, दिल्ली में अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे न्यायाधीशों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
नई बैठक के निर्देश
अदालत ने पहले की बैठक की कार्यवाही (minutes) को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया और सात दिनों के भीतर एक नई बैठक बुलाने का निर्देश दिया। इस बैठक में Union Home Ministry, दिल्ली सरकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर ठोस और व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत करने को कहा गया है।
सीमित सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा को केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों या श्रेणियों तक सीमित रखना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि जिला न्यायाधीश भारी संख्या में मामलों की सुनवाई करते हैं और अक्सर गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े होते हैं, जिससे उनके लिए जोखिम स्वाभाविक रूप से अधिक है।
पहले भी जताई गई थी चिंता
इससे पहले की सुनवाई में भी यही बेंच संबंधित अधिकारियों को बैठक कर सुरक्षा मुद्दे पर विचार करने का निर्देश दे चुकी थी। अदालत ने तब भी कहा था कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
याचिका में उठाए गए गंभीर मुद्दे
याचिका में कहा गया है कि कई न्यायाधीश बिना किसी सुरक्षा के यात्रा करते हैं और उन्हें पीछा करने (stalking), धमकी और सड़क पर आक्रामक व्यवहार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, न्यायाधीश नियमित रूप से गैंग-सम्बंधित और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं। यहां तक कि अदालत परिसरों के भीतर फायरिंग जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
अगली सुनवाई की तारीख
मामले को अब 12 मई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जहां अदालत प्रशासन से ठोस सुरक्षा ढांचा पेश करने की अपेक्षा कर रही है।
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