नोएडा मौलवी मारपीट केस: SC ने UP सरकार को 2 हफ्ते में ‘हेट क्राइम’ धाराएं जोड़ने को कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा मौलवी उत्पीड़न मामले में IPC की धारा 153B और 295A जोड़ने के लिए यूपी सरकार को 2 हफ्ते का समय दिया; जांच में ढिलाई पर नाराज़गी।


धर्म-आधारित अपराधों को लेकर सख्त रुख दिखाते हुए Supreme Court of India ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह नोएडा में मौलवी के साथ हुई मारपीट के मामले में ‘हेट क्राइम’ से संबंधित धाराएं जोड़ने पर दो हफ्तों के भीतर कार्रवाई करे।


🔹 क्या है मामला

यह मामला 2021 का है, जब मौलवी Kazeem Ahmad Sherwani ने आरोप लगाया कि:

  • नोएडा से अलीगढ़ जाते समय
  • कुछ लोगों ने उन्हें वैन में लिफ्ट दी
  • और फिर चलती गाड़ी में:
    👉 उनकी दाढ़ी खींची गई
    👉 टोपी उतारी गई
    👉 और धार्मिक आधार पर अपमानित किया गया

🔹 सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी

जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की पीठ ने कहा:

  • पहले भी राज्य से पूछा गया था कि
    👉 IPC की संबंधित धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं

👉 इसके बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई

कोर्ट ने यहां तक कहा कि:
👉 वह जांच अधिकारी (I/O) को तलब करने पर विचार कर रही थी


🔹 किन धाराओं की बात

अदालत ने जिन धाराओं को जोड़ने की बात कही, वे हैं:

  • Section 153B IPC
  • Section 295A IPC

👉 ये धाराएं धर्म के आधार पर घृणा और अपमान से जुड़े अपराधों को कवर करती हैं

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🔹 राज्य सरकार को राहत

सुनवाई के दौरान K. M. Nataraj ने उत्तर प्रदेश की ओर से समय मांगा।

इसके बाद कोर्ट ने:
👉 2 हफ्ते का समय दिया
👉 अगली सुनवाई 19 मई तय की


🔹 पहले क्या हुआ था

  • नवंबर 2021: पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
  • आरोप: पुलिस ने FIR दर्ज करने में आनाकानी की

👉 जनवरी 2023 में FIR दर्ज हुई, लेकिन:

  • केवल साधारण धाराएं (मारपीट, धमकी) लगाई गईं
  • पुलिस ने इसे लूट के प्रयास का मामला बताया

🔹 कोर्ट के पहले के निर्देश

फरवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था:
👉 “अगर अपराध में धार्मिक रंग है, तो संबंधित धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं?”

साथ ही:

  • दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होने की जानकारी दी गई थी

🔹 कानूनी महत्व

यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • यह स्पष्ट करता है कि
    👉 पुलिस को अपराध के वास्तविक स्वरूप के अनुसार धाराएं लगानी होंगी
  • और
    👉 धार्मिक आधार पर हिंसा को हल्के में नहीं लिया जा सकता

🔹 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि हेट क्राइम मामलों में जांच एजेंसियों की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार तय समय में आवश्यक धाराएं जोड़ती है या नहीं।


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