POCSO के तहत ‘Penetrative Sexual Assault’
केरल हाईकोर्ट ने 14 वर्षीय बच्चे के जननांग को यौन मंशा से चूमने को POCSO Act की धारा 3(d) के तहत penetrative sexual assault माना और 61 वर्षीय दोषी की 20 साल की सजा बरकरार रखी।
केरल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
केरल हाईकोर्ट ने POCSO Act से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यौन मंशा से बच्चे के जननांग को मुंह से छूना या चूमना भी ‘penetrative sexual assault’ की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने 61 वर्षीय व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा।
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने 1 सितंबर को पारित आदेश में कहा कि जब यौन मंशा से आरोपी का मुंह बच्चे के लिंग से संपर्क करता है, तो यह POCSO Act की धारा 3(d) के तहत penetrative sexual assault है, जिसके लिए धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान है।
14 वर्षीय बच्चे के साथ यौन शोषण का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने 14 वर्षीय लड़के को शराब और गांजा मिली बीड़ी दी और इसके बाद उसके साथ कथित तौर पर दो बार यौन शोषण किया।
आरोप था कि आरोपी नाबालिग को एक दुकान के भीतर ले गया, उसके कपड़े उतारे और उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO Act की धारा 5(l) सहपठित धारा 6, धारा 9(l) सहपठित धारा 10 तथा Juvenile Justice Act की धारा 77 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
आरोपी की ओर से अदालत में दावा किया गया कि उसे बिना किसी कारण मामले में फंसाया गया है और उसकी उम्र को देखते हुए सजा में नरमी बरती जानी चाहिए। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि पीड़ित बच्चे की गवाही अन्य साक्ष्यों से पुष्ट होती है और बचाव पक्ष अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका।
POCSO की धारा 3(d) की व्याख्या
हाईकोर्ट ने नाबालिग के बयान और POCSO Act की धारा 3(d) में दिए गए कानूनी प्रावधानों का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी बच्चे के लिंग, योनि, गुदा या मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है, तो यह धारा 3(d) में परिभाषित penetrative sexual assault के लिए पर्याप्त हो सकता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रावधान के तहत अपराध स्थापित करने के लिए मौखिक यौन क्रिया का पूर्ण रूप से होना या किसी तरह की ‘deeper penetration’ साबित होना अनिवार्य नहीं है। महत्वपूर्ण तत्व यौन मंशा के साथ बच्चे के संबंधित अंग से मुंह का संपर्क है।
बार-बार यौन शोषण होने पर भी कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि पीड़ित बच्चे के बयान से आरोपी द्वारा उसके जननांग को बार-बार चूमे जाने की बात सामने आती है। इस आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस निष्कर्ष को सही माना कि आरोपी ने POCSO Act की धारा 9(l) सहपठित धारा 10 के तहत भी अपराध किया।
धारा 9(l) ऐसे मामले में aggravated sexual assault से संबंधित है, जहां बच्चे के साथ यौन हमला एक से अधिक बार किया जाता है।
20 साल की सजा को बताया उचित
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई गई सजा उचित है। अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए दोषसिद्धि और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी।
यह फैसला POCSO Act के तहत ‘penetrative sexual assault’ की कानूनी व्याख्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट किया कि धारा 3(d) के दायरे में आने वाले कृत्य के लिए गहरी पैठ या पूर्ण oral sex का प्रमाण आवश्यक नहीं है।
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