दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: AIIMS तीन वर्षीय बच्ची संस्कृति को देगा ट्रांसप्लांट उपचार

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AIIMS ट्रांसप्लांट उपचार

दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS, नई दिल्ली को तीन वर्षीय बच्ची संस्कृति भगत उर्फ सांची को आवश्यक ट्रांसप्लांट उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। विशेषज्ञ समिति ने पुष्टि की कि AIIMS में इस उपचार के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा मौजूद है।


दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS को उपचार देने का दिया निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली को तीन वर्षीय संस्कृति भगत उर्फ सांची को आवश्यक ट्रांसप्लांट उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह आदेश विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पारित किया, जिसमें कहा गया कि AIIMS में इस प्रकार के ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध हैं।


किस याचिका पर हुई सुनवाई?

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह आदेश नाबालिग बच्ची की ओर से उसके पिता एवं प्राकृतिक अभिभावक सौरव कुमार द्वारा दायर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने, अधिवक्ता अनुज अग्रवाल और अन्य वकीलों की टीम के साथ, पक्ष रखा।


विशेषज्ञ समिति ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाईकोर्ट के 17 जून के पूर्व आदेश के अनुपालन में गठित विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के वकील को भी उपलब्ध कराई गई।

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अदालत ने पाया कि समिति ने विशेष रूप से उस दावे की जांच की थी, जिसमें कहा गया था कि AIIMS के बाल रोग विभाग के एक वरिष्ठ रेजिडेंट ने कथित तौर पर बताया था कि संस्थान के पास आवश्यक उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।


‘AIIMS में सभी सुविधाएं उपलब्ध’

विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है

रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि AIIMS के दुर्लभ रोग (Rare Diseases) के नोडल अधिकारी, जो समिति के सदस्य भी थे, ने पुष्टि की कि संस्थान में ट्रांसप्लांट सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक सभी बुनियादी ढांचा और सुविधाएं मौजूद हैं।


हाईकोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने कहा कि जब स्वयं AIIMS ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो बच्ची के उपचार में कोई बाधा नहीं रह जाती।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने AIIMS को बच्ची को आवश्यक ट्रांसप्लांट उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।


AIIMS ने भी नहीं जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संस्थान को इस प्रकार का आदेश पारित किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।


याचिका का निस्तारण

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।

हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य में यदि कोई नई आवश्यकता या नया कारण उत्पन्न होता है, तो नई रिट याचिका दायर कर पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।

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साथ ही, अदालत ने आदेश की प्रति तत्काल (दस्ती) जारी करने और उसे हाईकोर्ट की वेबसाइट पर तुरंत अपलोड करने का निर्देश दिया।


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