राम मंदिर दान घोटाला
अयोध्या की अदालत ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दान घोटाला मामले में तीन आरोपियों की सात दिन की पुलिस कस्टडी की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान की गिनती के दौरान चोरी और गबन के प्रथमदृष्टया सबूत मिलने की बात कही गई है।
तीन आरोपियों की पुलिस कस्टडी पर फैसला सुरक्षित
अयोध्या की एक अदालत ने मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच के सिलसिले में जेल में बंद तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की सात दिन की पुलिस कस्टडी की मांग पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
अयोध्या पुलिस ने अदालत से कहा कि मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों से पुलिस हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
पुलिस ने क्या कहा?
जांच अधिकारी (IO) ने अदालत को बताया कि आरोपियों से विस्तृत पूछताछ किए बिना जांच को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।
इससे पहले रविवार को पुलिस टीम ने जेल के भीतर पांच आरोपियों से पूछताछ की थी। पुलिस के अनुसार, उस पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर तीन आरोपियों की पुलिस कस्टडी की मांग की गई।
SIT रिपोर्ट में चोरी के प्रथमदृष्टया सबूत
उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर में दान की गिनती के दौरान चोरी और धन की हेराफेरी (Pilferage) के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।
जांच के दौरान SIT ने सीसीटीवी फुटेज, ट्रस्ट अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और कैश गिनती में लगे कर्मचारियों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, जब्ती दस्तावेज, एमओयू (MoU) और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का परीक्षण किया।
CCTV में कैद हुईं कथित चोरी की घटनाएं
SIT रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून तक उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कई बार कैश गिनने वाले कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ अन्य कर्मचारी कथित तौर पर इन गतिविधियों में सहयोग करते या उन्हें छिपाने में मदद करते दिखाई दिए।
करीब 70 घटनाएं रिकॉर्ड होने का दावा
SIT के अनुसार, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में समीक्षा अवधि के दौरान करीब 70 कथित चोरी या गबन की घटनाएं दर्ज हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों के बयान और बैंक में जमा राशि तथा गिनी गई नकदी के बीच अंतर से यह संकेत मिलता है कि 27 अप्रैल से पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हो सकती हैं, लेकिन पुराने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण उनकी वास्तविक संख्या का आकलन नहीं किया जा सका।
सुरक्षा व्यवस्था के पालन में भी लापरवाही
SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रस्ट की SOP में निर्धारित कई सुरक्षा उपाय प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए।
इनमें कर्मचारियों की तलाशी (Frisking), बायोमेट्रिक उपस्थिति, निजी सामान ले जाने पर प्रतिबंध, सीसीटीवी निगरानी तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल थीं।
किन लोगों की भूमिका पर उठे सवाल?
सीसीटीवी फुटेज, बरामदगी, वित्तीय दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर SIT ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा की प्रथमदृष्टया संलिप्तता बताई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अविनाश शुक्ला और मनीष कुमार यादव को कई बार नकदी निकालते या छिपाते हुए देखा गया, जबकि अन्य आरोपियों को कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों में सहयोग करते या स्वयं शामिल पाया गया।
ट्रस्ट में भी बड़ा बदलाव
इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने जानकारी दी कि ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं।
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