सुप्रीम कोर्ट ने ‘हत्या के प्रयास’ मामले में अभियुक्त को बरी करते हुए कहा की, जब अभियोजन पक्ष के गवाहों में घटनाओं के क्रम के बारे में भिन्नता हो तो साक्ष्य पर भरोसा करने से इनकार किया जा सकता है
सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि धारा 307 आईपीसी के तहत दोषसिद्धि तभी उचित हो सकती है, जब विचाराधीन अभियुक्त के पास इसे क्रियान्वित करने में सहायता के लिए कोई प्रत्यक्ष कार्य करने का इरादा हो। यह अपील उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल (इसके बाद, ‘उच्च न्यायालय’) द्वारा अपील संख्या 1458/2001 में पारित दिनांक 10.12.2009 के निर्णय … Read more