घर में भीड़ जुटाकर नमाज़ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, अंडरटेकिंग के बाद याचिका निस्तारित

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घर में भीड़ जुटाकर नमाज़ पर HC सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली मामले में घर के भीतर बड़ी संख्या में नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाते हुए याची से अंडरटेकिंग ली, कहा—उल्लंघन पर प्रशासन सख्त कार्रवाई को स्वतंत्र।


घर में नमाज़ के नाम पर भीड़ पर हाईकोर्ट की सख्ती

Allahabad High Court ने बरेली में एक निजी घर के भीतर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर नमाज़ अदा कराने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित हो।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह अंडरटेकिंग (undertaking) ली कि वह भविष्य में अपने घर पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज़ के लिए एकत्र नहीं करेगा। इसी आधार पर याचिका को निस्तारित कर दिया गया।


बेंच ने प्रशासन को दी कार्रवाई की खुली छूट

यह आदेश जस्टिस Saral Srivastava और जस्टिस Garima Prasad की खंडपीठ ने पारित किया।

अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि:

  • यदि याची अपनी अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है
  • और दोबारा बड़ी भीड़ इकट्ठा करता है
  • जिससे क्षेत्र में शांति या कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा होता है

तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।


प्रशासन का आरोप: रोज 50–60 लोग जुट रहे थे

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता Anup Trivedi ने अदालत को बताया कि याची अपने घर में रोजाना 50 से 60 लोगों को नमाज़ के लिए बुला रहा था।

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सरकार ने फोटो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए और कहा कि:

  • यह गतिविधि क्षेत्र की शांति और सौहार्द के लिए खतरा बन सकती है
  • व्यक्तिगत सुरक्षा के नाम पर इस तरह की भीड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती
  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है

याची ने दी अंडरटेकिंग, कोर्ट ने राहत दी

प्रशासन के आरोपों के बाद याची की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि:

  • भविष्य में बड़ी संख्या में लोगों को नमाज़ के लिए नहीं बुलाया जाएगा
  • विवादित संपत्ति पर भीड़ इकट्ठा नहीं की जाएगी

इस अंडरटेकिंग को स्वीकार करते हुए अदालत ने:

  • याची और अन्य लोगों के खिलाफ जारी चालान वापस लेने का निर्देश दिया
  • याचिका को निस्तारित कर दिया

सुरक्षा भी वापस लेने के निर्देश

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि पहले अदालत के आदेश से दी गई सुरक्षा अब आवश्यक नहीं है। इस पर कोर्ट ने पुलिस को सुरक्षा वापस लेने का निर्देश दिया।


अवमानना नोटिस भी निरस्त

इस मामले में पहले बरेली के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को भी अदालत ने निरस्त कर दिया, क्योंकि उनके द्वारा दाखिल हलफनामे से अदालत संतुष्ट थी।


कोर्ट का संतुलित दृष्टिकोण

अदालत ने अपने आदेश में एक संतुलित रुख अपनाया:

  • एक ओर याची को राहत देते हुए चालान वापस कराए
  • दूसरी ओर स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है
  • और प्रशासन को कार्रवाई के लिए पूर्ण अधिकार दिया
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कानूनी महत्व

यह फैसला कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्पष्ट करता है:

  1. धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण अधिकार नहीं है
  2. निजी संपत्ति पर भी सार्वजनिक शांति प्रभावित करने वाली गतिविधि सीमित की जा सकती है
  3. कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है
  4. अदालत अंडरटेकिंग के आधार पर राहत दे सकती है, लेकिन उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई संभव है

निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर भीड़ जुटाने की अनुमति तभी तक है, जब तक उससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। अदालत ने याची को राहत जरूर दी, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दिया कि किसी भी उल्लंघन पर प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।


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