साईं बाबा पर आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को नई शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए

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साईं बाबा पर कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ ऑनलाइन सामग्री को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नई शिकायतों पर उचित प्राधिकरण से कार्रवाई कराने का निर्देश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को दिए निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी की ओर से दायर नई अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि यदि ट्रस्ट की ओर से ऑनलाइन सामग्री हटाने को लेकर कोई नई शिकायत दर्ज की जाती है, तो उस पर उचित तरीके से विचार किया जाए।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। ट्रस्ट ने दावा किया था कि पहले की कार्यवाही के बावजूद कुछ अतिरिक्त YouTube वीडियो और ऑनलाइन लेख अब भी उपलब्ध हैं, जिनमें साईं बाबा के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री मौजूद है।

GAC पहले ही वीडियो और लेख हटाने का निर्देश दे चुका है

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि Grievance Appellate Committee (GAC) ने 13 अगस्त को आदेश पारित कर संबंधित वीडियो और ऑनलाइन लेख हटाने के निर्देश दिए थे।

हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि GAC के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है।

ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे ने बताया कि सात YouTube वीडियो अभी भी उपलब्ध हैं और कुछ ऑनलाइन लेख भी हटाए नहीं गए हैं।

‘YouTube कोई कदम नहीं उठा रहा’

ट्रस्ट की ओर से दलील दी गई कि YouTube की ओर से सामग्री हटाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है

वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्लेटफॉर्म की शिकायत व्यवस्था में मौजूद उन सीमाओं का भी उल्लेख किया, जिनके कारण एक शिकायत में URLs और अन्य सामग्री की संख्या सीमित रहती है।

ट्रस्ट ने अब कुछ और लिंक हटाने की मांग की है। उसका आरोप है कि इन लिंक में साईं बाबा के बारे में कथित रूप से अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाली सामग्री प्रकाशित या प्रसारित की जा रही है।

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GAC ने माना- सामग्री धार्मिक भावनाएं आहत कर सकती है

ट्रस्ट ने 13 अगस्त के GAC आदेश में दर्ज टिप्पणियों का भी हवाला दिया।

अदालत के समक्ष दी गई दलीलों के अनुसार, GAC ने माना था कि संबंधित सामग्री में धार्मिक भावनाओं को आहत करने की प्रवृत्ति है और यह सांप्रदायिक सद्भाव के लिए नुकसानदायक हो सकती है। GAC के अनुसार, ऐसी सामग्री का लगातार प्रसार व्यापक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

नई शिकायत पर संबंधित प्राधिकरण करेगा विचार

दिल्ली हाईकोर्ट ने नई अर्जी पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि यदि इस बीच ट्रस्ट की ओर से कोई नई शिकायत दाखिल की जाती है, तो संबंधित उचित प्राधिकरण उस पर विचार करेगा।

मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।

पहले भी GAC को सात दिन में फैसला देने का निर्देश

इससे पहले इसी महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने GAC को ट्रस्ट की ओर से ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ दायर वैधानिक अपील पर विचार करने और मामले की गंभीरता एवं तात्कालिकता को देखते हुए सात दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

साईं बाबा के बारे में कथित आपत्तिजनक सामग्री का आरोप

ट्रस्ट का आरोप है कि कई YouTube चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साईं बाबा को लेकर ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिसमें उनके लिए कथित तौर पर “चांद मियां”, “जिहादी”, ब्रिटिश जासूस, हत्यारा, बलात्कारी, डकैत और धर्म परिवर्तन कराने वाला जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

ट्रस्ट का कहना है कि यह सामग्री वास्तविक ऐतिहासिक विमर्श या निष्पक्ष आलोचना नहीं है, बल्कि बिना प्रमाण के आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करती है। उसके अनुसार, ऐसी सामग्री से धार्मिक वैमनस्य और सांप्रदायिक अशांति को बढ़ावा मिलने की आशंका है।

YouTube की शिकायत व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति

याचिका के अनुसार, ट्रस्ट ने 15, 17 और 19 जुलाई को YouTube की शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से संबंधित सामग्री की शिकायत की थी।

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ट्रस्ट का दावा है कि उसकी शिकायतें खारिज कर दी गईं और उसे सामग्री अपलोड करने वालों से संपर्क करने अथवा हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त करने के लिए कहा गया।

इसके बाद ट्रस्ट ने 26 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के समक्ष प्रतिनिधित्व दिया और 29 जुलाई को GAC के समक्ष अपील दायर की।

ट्रस्ट ने शिकायत प्रक्रिया में URLs और शिकायत के साथ संलग्न की जा सकने वाली सामग्री की संख्या पर लगी सीमाओं को लेकर भी चिंता जताई है।

हाईकोर्ट के आदेश का महत्व

फिलहाल हाईकोर्ट ने नई ऑनलाइन सामग्री को हटाने का कोई व्यापक अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है कि नई शिकायतों को संबंधित वैधानिक तंत्र के माध्यम से उचित रूप से देखा जाए।

मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।

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