दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

Like to Share

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक मामले में तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह मामला जामा मस्जिद इलाके में एक मकान के निर्माण के दौरान हुई फायरिंग और एक व्यक्ति के घायल होने से जुड़ा है।

मुख्य गवाहों के बयान बदलने पर अदालत ने जताई चिंता

अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए प्रमुख अभियोजन गवाहों, जिनमें फायरिंग का शिकार हुआ मुख्य प्रत्यक्षदर्शी भी शामिल था, के अपने शुरुआती बयानों से मुकरने को अहम आधार माना। इस घटना को लेकर वर्ष 2019 में जामा मस्जिद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

अदालत का फैसला – अभियोजन की कहानी संदेहास्पद

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) एकता गौबा मान ने रिज़वान, नौशाद उर्फ पहलवान और मोहम्मद इकबाल सैफी को सभी आरोपों से बरी करते हुए कहा:

“सबसे महत्वपूर्ण गवाह, अर्थात् आताउर रहमान, जो प्रत्यक्षदर्शी होने के साथ-साथ पीड़ित और घायल भी था, पूरी तरह से अपने बयान से मुकर गया है और अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन नहीं किया है।”

न्यायालय ने आगे कहा कि अभियोजन की पूरी कहानी संदेहास्पद हो गई है क्योंकि कथित रूप से बरामद हथियार की पुष्टि किसी स्वतंत्र गवाह से नहीं कराई गई।

Must Read -  Cheque पर हस्ताक्षर करने मात्र से Negotiable Instrument Act Sec 138 के तहत अपराध नहीं हो जाता, अदालत ने आरोपी को किया बरी

इसके अलावा, अन्य प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद जाकिर और मोहम्मद रफीक भी अपने बयान से पलट गए, जिससे अभियोजन की कहानी और अधिक कमजोर हो गई।

गवाहों के बयान बदलने से अभियोजन की कहानी कमजोर

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि सार्वजनिक गवाहों, नादिम खान और दानिश, ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया और पूरी तरह से hostile हो गए।

“इस प्रकार, अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है,” – न्यायाधीश मान ने 21 मार्च को दिए अपने फैसले में कहा।

अक्टूबर 2023 में तय हुए थे आरोप

10 अक्टूबर 2023 को अदालत ने तीनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307/506/34 के तहत आरोप तय किए थे। इसके अलावा, मोहम्मद इकबाल सैफी पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। सभी आरोपियों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार करते हुए मुकदमे का सामना करने का निर्णय लिया था।

अभियोजन का मामला – मकान निर्माण रोकने के लिए चलाई गई गोली

अभियोजन के अनुसार, पीड़ित आताउर रहमान ने बयान दिया कि 21 फरवरी 2018 को वह मोहम्मद रफीक और मोहम्मद जाकिर के साथ गली जगत वाली, उर्दू बाजार में मख्खी नामक व्यक्ति के घर के निर्माण के लिए ईंटें ला रहा था।

सुबह करीब 8:15 बजे, तीन लड़के काला महल की ओर से आए, जिनकी जेब में पिस्तौल थी। उन्होंने पिस्तौल निकालकर दिखाईं और धमकी दी कि मख्खी के घर का निर्माण नहीं होगा और न ही निर्माण सामग्री यहां उतारी जाएगी।

Must Read -  ‘बेंच हंटिंग’ पर दिल्ली कोर्ट सख्त: केस ट्रांसफर मांगने वाले वादी पर ₹10,000 का जुर्माना

आताउर रहमान के अनुसार, तीनों में से एक लड़के ने उसे जान से मारने की नीयत से गोली चलाई, जिससे गोली उसकी बाईं जांघ में लगी और दूसरी टांग में फंस गई।

अभियोजन की विफलता से हुआ आरोपियों का बरी होना

हालांकि, मुख्य गवाहों के अदालत में बयान बदलने और अभियोजन पक्ष द्वारा सबूतों को मजबूत तरीके से पेश न कर पाने के कारण अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

यह मामला न्यायिक प्रणाली में गवाहों के बयान बदलने और अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्यों की अपर्याप्तता के कारण कमजोर होती कानूनी कार्यवाही का एक प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है।

Leave a Comment