Marital Rape Exception पर सुप्रीम कोर्ट करेगा संवैधानिक जांच, IPC Section 375 और BNS Section 63 पर उठे गंभीर सवाल

Like to Share

सुप्रीम कोर्ट ने Marital Rape Exception की संवैधानिक वैधता की जांच करने पर सहमति जताई है। कोर्ट IPC Section 375 और BNS Section 63 के तहत विवाह के भीतर गैर-सहमति वाले यौन संबंधों को rape से बाहर रखने वाले प्रावधानों की समीक्षा करेगा।

Marital Rape Exception की Constitutional Validity पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को Marital Rape Exception की संवैधानिक वैधता की जांच करने पर सहमति जताई। यह प्रावधान Indian Penal Code (IPC) की Section 375 में था, जिसके तहत किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ sexual intercourse या sexual acts को, निर्धारित अपवाद के अंतर्गत, rape नहीं माना जाता था।

सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या विवाह के भीतर होने वाले non-consensual sexual acts को rape की परिभाषा से बाहर रखने वाला यह statutory exception संविधान की कसौटी पर टिक सकता है।

BNS Section 63 में भी मौजूद है Corresponding Exception

याचिकाओं में केवल IPC Section 375 की Exception 2 को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि नए criminal law framework के तहत Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की Section 63 में मौजूद corresponding exception पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इन provisions को इस सीमा तक read down करने की मांग की है, जहां वे विवाह के भीतर बिना सहमति के sexual acts को rape offence से बाहर रखते हैं।

Karnataka High Court के 2022 फैसले से जुड़ी Appeal भी सुनेगा Court

सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी appeal भी सुनेगा जो Karnataka High Court के मार्च 2022 के judgment से संबंधित है।

Karnataka High Court ने एक पति के खिलाफ rape charges को quash करने से इनकार किया था। पति पर अपनी पत्नी के साथ कथित रूप से brutal sexual assault करने का आरोप था।

इसी मामले से जुड़ी appeal भी अब Supreme Court के समक्ष constitutional challenge के साथ सुनी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया Prosecution का महत्वपूर्ण सवाल

सुनवाई के दौरान Bench ने संकेत दिया कि मामला एक महत्वपूर्ण constitutional law question उठाता है।

सवाल यह है कि यदि किसी penal provision में किसी conduct को स्पष्ट रूप से offence से बाहर रखा गया है, तो क्या अदालत उस provision को interpret या read down करके विवाह के भीतर rape prosecution की अनुमति दे सकती है?

Bench ने यह भी पूछा कि जब तक constitutional validity पर फैसला नहीं होता, क्या किसी व्यक्ति पर ऐसे offence के लिए prosecution चलाया जा सकता है जिसे Section 375 स्वयं स्पष्ट रूप से exclude करता है।

Must Read -  ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर सुनवाई 19 अगस्त तक टली, सुप्रीम कोर्ट ने समिति से मांगा फैसला

अदालत ने कहा कि वह victims की सुरक्षा जरूर सुनिश्चित करना चाहती है, लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या ऐसी स्थिति में prosecution अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है, जहां कानून में संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट exclusion दिया गया है।

Indira Jaising ने Karnataka HC Judgment का किया उल्लेख

Karnataka High Court से संबंधित appeal में respondent wife की ओर से पेश Senior Advocate Indira Jaising ने अदालत के सामने 2022 के हाईकोर्ट फैसले का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि Karnataka High Court पहले ही यह दृष्टिकोण अपना चुका है कि यदि किसी पत्नी के साथ इस तरह व्यवहार किया गया हो कि उसे “sexual slave” की स्थिति में रखा गया हो, तो prosecution आगे बढ़ सकती है।

उन्होंने यह भी अदालत के संज्ञान में लाया कि बाद में age of consent को 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष किया गया।

Indira Jaising ने संबंधित Karnataka High Court order से जुड़ी appeal को सूचीबद्ध करने का अनुरोध भी किया।

Karuna Nundy ने Constitutional Reading Down पर जोर दिया

Senior Advocate Karuna Nundy ने constitutional challenge पर बहस करते हुए कहा कि अदालत को यह विचार करना होगा कि क्या Marital Rape Exception को संविधान में निहित guarantees के अनुरूप read down या otherwise interpret किया जा सकता है।

इसमें fundamental rights और criminal law के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है।

मामला केवल Social Morality का नहीं: Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि इस विवाद को केवल social morality के प्रश्न के रूप में नहीं देखा जा सकता।

Bench ने कहा कि जब लोग अपने representatives के माध्यम से कानून बनाते हैं, तो अदालत का काम यह देखना है कि वह कानून Constitution के अनुरूप है या नहीं

अदालत ने इस संदर्भ में कहा कि Court अपनी constitutional language में ही बात कर सकता है और legislative choice की संवैधानिक समीक्षा उसका दायित्व है।

Individual Prosecution पर अभी फैसला नहीं करेगा Court

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी individual prosecutions के प्रश्न पर कोई पूर्व निष्कर्ष नहीं देना चाहता।

Bench ने कहा कि वह फिलहाल constitutionality के प्रश्न पर विचार करेगा और इसी मुद्दे की जांच की जाएगी।

इससे संकेत मिलता है कि Court constitutional validity और individual criminal prosecution के सवालों को अलग-अलग स्तर पर देखने की कोशिश कर रहा है।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट ने रेप के आरोपी केरल के वकीलों को दी गई अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है

BNS में Gang Rape और Husband Exception पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान वकीलों ने BNS में gang rape से संबंधित provisions पर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

विशेष रूप से उस exception पर चर्चा हुई जो कुछ परिस्थितियों में पति से संबंधित है और नए criminal law framework में marital exception को बनाए रखने के प्रभावों पर भी सवाल उठाए गए।

इससे मामला केवल IPC की पुरानी व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि BNS के तहत sexual offences के नए statutory framework की भी समीक्षा से जुड़ गया है।

Union Government ने Counter-Affidavit दाखिल किया

केंद्र सरकार की ओर से पेश Solicitor General of India Tushar Mehta ने बताया कि Union Government अपना counter-affidavit पहले ही दाखिल कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि उस counter-affidavit को सरकार के reply के रूप में माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र का counter-affidavit सभी संबंधित counsel को दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

अब Constitutional Arguments पर होगी विस्तृत सुनवाई

Supreme Court ने फिलहाल इस मामले में विस्तृत arguments के लिए अगली तारीख तय नहीं की है। मामले को आगे constitutional validity के सवाल पर विस्तार से सुना जाएगा।

Marital Rape Exception की यह सुनवाई भारतीय criminal law में consent, bodily autonomy, equality, dignity, marriage और constitutional protection के बीच संबंध को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न सामने लाती है।

Tags

#सुप्रीमकोर्ट #MaritalRape #MaritalRapeException #वैवाहिकबलात्कार #RapeLaw #Section375IPC #IPC #BNS #Section63BNS #BharatiyaNyayaSanhita #ConstitutionalValidity #ConstitutionalLaw #Consent #BodilyAutonomy #WomenRights #GenderJustice #KarnatakaHighCourt #इंदिराजयसिंह #IndiraJaising #KarunaNundy #TusharMehta #SexualOffences #CriminalLaw #LegalNews #SupremeCourtIndia

Leave a Comment