कानून में AI का बढ़ता उपयोग: सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

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ai uses Supreme Court warns: गलत citations और जवाबदेही के मुद्दे पर वकीलों को सतर्क रहने की चेतावनी

AI के बढ़ते इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स की चिंता; गलत citations और जवाबदेही के मुद्दे पर वकीलों को सतर्क रहने की चेतावनी।


भारत की न्यायिक व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता उपयोग अब एक गंभीर बहस का विषय बनता जा रहा है। Supreme Court of India और विभिन्न हाईकोर्ट्स ने हाल के दिनों में AI के अनियंत्रित इस्तेमाल को लेकर नैतिकता, सटीकता और पेशेवर जवाबदेही पर चिंता जताई है।


🔹 कानूनी पेशे में AI का बढ़ता इस्तेमाल

आजकल वकील तेजी से AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं:

  • याचिकाएं (petitions) ड्राफ्ट करने में
  • केस लॉ का सार निकालने में
  • कानूनी रिसर्च में

AI की क्षमता बड़े डेटा को तेजी से प्रोसेस करने में मदद करती है, जिससे कार्यक्षमता बढ़ती है।

हालांकि, इसी तेजी के साथ जोखिम भी सामने आ रहे हैं।


🔹 सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Supreme Court of India ने ऐसे मामलों पर संज्ञान लिया है, जहां:

  • AI द्वारा तैयार याचिकाओं में
  • गलत या “फर्जी citations” पाए गए

अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही और पेशेवर कदाचार (misconduct) माना है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
👉 अंतिम जिम्मेदारी वकील की ही होती है, चाहे AI का उपयोग किया गया हो या नहीं।


🔹 हाईकोर्ट्स ने भी लगाए प्रतिबंध

कई हाईकोर्ट्स ने AI के उपयोग को सीमित करने के लिए कदम उठाए हैं:

  • Punjab and Haryana High Court
    • जजों को AI से निर्णय लिखने या रिसर्च करने से सावधान किया
  • Gujarat High Court
    • न्यायिक निर्णय में AI के उपयोग पर रोक
    • केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित उपयोग की अनुमति
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इन कदमों से स्पष्ट है कि न्यायपालिका तकनीक को लेकर सतर्क रुख अपना रही है।


🔹 रेगुलेटरी बॉडी का उदाहरण

एक दिलचस्प मामले में Haryana Real Estate Regulatory Authority ने:

  • AI आधारित प्रॉपर्टी मूल्य विश्लेषण का उपयोग किया
  • और उसके आधार पर एक बिल्डर को अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया

यह दिखाता है कि AI का उपयोग पूरी तरह नकारा नहीं जा रहा, बल्कि नियंत्रित रूप में अपनाया जा रहा है।


🔹 विशेषज्ञों की राय: “AI सहायक है, विकल्प नहीं”

कानूनी विशेषज्ञों ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है।

  • संजीव के कपूर (खैतान एंड कंपनी) ने कहा:
    👉 AI का उपयोग ड्राफ्टिंग और रिसर्च में किया जा सकता है
    👉 लेकिन हर तथ्य और citation की जांच वकील को खुद करनी होगी
  • सी.वी. रघु (जनरल काउंसिल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने कहा:
    👉 AI में नैतिक समझ और न्यायिक विवेक नहीं होता
    👉 अंतिम जवाबदेही मानव वकील की ही रहेगी

🔹 टेक्नोलॉजी और जवाबदेही का संतुलन

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • AI को “ऑटोमेशन” नहीं, बल्कि “ऑगमेंटेशन” के रूप में देखा जाना चाहिए
  • यानी यह वकीलों की क्षमता बढ़ाए, उन्हें प्रतिस्थापित न करे

🔹 आगे की राह

AI के बढ़ते उपयोग के साथ यह जरूरी हो गया है कि:

  • स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं
  • पेशेवर जवाबदेही तय हो
  • और तकनीक का उपयोग न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप हो

🔹 निष्कर्ष

भारत की न्याय प्रणाली एक ऐसे मोड़ पर है, जहां तकनीकी प्रगति और न्यायिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

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AI निश्चित रूप से एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन न्यायालयों का संदेश साफ है—
👉 AI सहायक हो सकता है, लेकिन न्याय और जिम्मेदारी का अंतिम आधार मानव ही रहेगा।


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