राहुल गांधी के खिलाफ तेलंगाना हाईकोर्ट के वकीलों का प्रदर्शन, न्यायपालिका पर टिप्पणी का आरोप; SIR याचिका में 14 खामियां

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तेलंगाना हाईकोर्ट के वकीलों ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन कर न्यायपालिका के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर नाराजगी जताई। इस बीच, मतदाता सूची के SIR को चुनौती देने वाली विपक्ष की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताईं।

तेलंगाना हाईकोर्ट के वकीलों ने मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वकीलों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां कीं। यह विरोध ऐसे समय हुआ है, जब विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

इस घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में 14 खामियां भी चिह्नित की हैं।

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के बाद बढ़ा विवाद

यह विवाद INDIA गठबंधन के नेताओं और समर्थकों के उस मार्च के बाद सामने आया, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी ने किया था। यह मार्च दिल्ली में बाराखंभा रोड से होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा था।

इसके बाद विपक्ष के 11 नेताओं ने मतदाता सूची के SIR अभियान से संबंधित चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की। याचिका में उठाए गए मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच तेलंगाना हाईकोर्ट के वकीलों ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

तेलंगाना BJP अध्यक्ष ने राहुल गांधी से माफी की मांग की

प्रदर्शन में शामिल तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने राहुल गांधी पर न्यायपालिका के प्रति सम्मान की कमी दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालना और कथित रूप से त्रुटिपूर्ण याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति जनता के भरोसे को कमजोर करने का प्रयास है।

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रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता का विश्वास कम करना चाहते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और राष्ट्रपति के कार्यालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख की भी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पूरे न्यायिक समुदाय और सभी न्यायाधीशों से माफी मांगनी चाहिए। उनके मुताबिक, राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए न्यायपालिका को विवाद में खींचना संस्थागत गरिमा को प्रभावित करता है।

ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक बयान हैं। राहुल गांधी की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

करुणा सागर ने कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता करुणा सागर ने भी कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता संविधान का हवाला तो देते हैं, लेकिन उन्हें संवैधानिक प्रावधानों को पढ़कर समझना चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के पद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस पद पर नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है और पदाधिकारी को हटाने की मांग निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जा सकती है।

करुणा सागर ने विपक्ष से मांग की कि यदि उसके पास चुनाव आयोग या SIR प्रक्रिया के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य है, तो उसे जनता, अदालत या संसद के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के अभियान को राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए आरोप लगाया कि इससे लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

SIR के खिलाफ विपक्ष की याचिका में 14 खामियां

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं की ओर से दाखिल रिट याचिका में 14 खामियां चिह्नित की हैं।

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यह याचिका चुनाव आयोग की चल रही SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं और उससे जुड़े फैसलों को चुनौती देती है। रजिस्ट्री द्वारा खामियां बताना याचिका की प्रक्रियागत जांच का हिस्सा है। केवल इन खामियों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के गुण-दोष पर कोई फैसला सुना दिया है।

उपलब्ध जानकारी में 14 खामियों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए याचिका की आगे की स्थिति और इन आपत्तियों के अनुपालन से जुड़े विवरण सामने आने के बाद ही मामले की प्रक्रियागत प्रगति स्पष्ट होगी।

न्यायपालिका और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक टकराव

इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है। जहां भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के कदमों को न्यायपालिका की प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदेह बताया, वहीं विपक्ष की याचिका SIR प्रक्रिया से जुड़े कानूनी सवालों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाने का प्रयास है।

इस मामले में महत्वपूर्ण होगा कि अदालत के समक्ष दाखिल याचिका पर आगे क्या प्रक्रियागत कदम उठाए जाते हैं और SIR से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक स्तर पर क्या विचार किया जाता है।

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