SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘न्यायपालिका को कोई डरा-धमका नहीं सकता’, राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने SIR विवाद में राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डराया-धमकाया नहीं जा सकता। महिला पत्रकारों पर कथित हमले की जांच के लिए समिति गठित करने पर भी विचार हुआ।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर जारी विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राहुल गांधी, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट तक विपक्षी दलों के मार्च और न्यायपालिका पर कथित दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर सख्त मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधीश समाज और सार्वजनिक घटनाक्रम से कटकर नहीं बैठे हैं।
CJI ने कहा, “हम आइवरी टावर में नहीं बैठे हैं। हमें हर चीज की जानकारी है।” उन्होंने संकेत दिया कि अदालत को न्यायिक कार्यवाही के साथ-साथ बाहर चल रही चर्चाओं और घटनाओं की भी जानकारी रहती है।
अदालत की ये टिप्पणियां विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, मौखिक टिप्पणियों को मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग और निर्वाचन आयुक्तों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की वैधता और उसके संचालन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्तों से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के निर्णयों और पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग भी की है।
अदालत ने संकेत दिया कि संबंधित याचिकाओं पर मुख्य मामले के साथ सुनवाई की जाएगी। इस स्तर पर नोटिस जारी होने का अर्थ केवल इतना है कि अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है; इससे SIR प्रक्रिया की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
याचिकाओं में SIR पर रोक और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
विपक्षी नेताओं की याचिकाओं में SIR प्रक्रिया के संचालन और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से हस्तक्षेप करते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की है।
याचिकाओं में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- कुछ राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार किया जाए।
- निर्वाचन आयोग के निर्णयों से संबंधित फाइलें, बैठक के विवरण, टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियां सार्वजनिक की जाएं।
- ECINET और ERONET प्रणालियों के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराए जाएं।
- SIR से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रिया की न्यायिक जांच या ऑडिट कराया जाए।
- मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में मनमानी रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
इन मांगों का उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में जवाबदेही और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। इन पर अदालत का अंतिम रुख संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।
महिला पत्रकारों पर कथित हमले की जांच के लिए समिति पर विचार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर पुलिस द्वारा कथित हमले के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित करने की संभावना पर भी विचार किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से मुख्य न्यायाधीश ने दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में जानकारी देने को कहा। पहले लिफाफे में उन महिला पत्रकारों के नाम मांगे गए, जिन पर कथित तौर पर हमला हुआ था। दूसरे लिफाफे में संभावित जांच समिति के लिए सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के नाम देने को कहा गया।
सुनवाई में एक महिला पत्रकार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। इंदिरा जयसिंह ने अदालत से संबंधित पत्रकार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की ओर से उस पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की बात भी सामने आई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर यह पहचान करना कठिन हो सकता है कि कौन पत्रकार है और कौन सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी महिला के साथ अभद्रता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए, चाहे वह महिला पत्रकार हो या पुलिसकर्मी।
कानूनी महत्व: यदि अदालत जांच समिति गठित करने का औपचारिक आदेश देती है, तो उसके अधिकार-क्षेत्र, जांच की समयसीमा और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का महत्व होगा। फिलहाल उपलब्ध विवरण में समिति गठन पर विचार किए जाने की बात है; इसे अंतिम आदेश के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी समेत किन नेताओं ने दाखिल की याचिकाएं?
SIR विवाद को लेकर याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हैं।
इनमें तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एमए बेबी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, विदुथलाई चिरुथाइगल काची के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू भी याचिकाकर्ताओं में शामिल बताए गए हैं।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस मामले से संबंधित कुल 14 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। हालांकि, सभी याचिकाओं में पक्षकारों की संख्या, याचिकाओं का दायरा और मांगी गई राहतों की सटीक स्थिति की पुष्टि अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया था विपक्षी मार्च
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन का उद्देश्य SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध करना और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाना बताया गया।
मार्च से पहले विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा था। हालांकि, CJI ने अनुरोध स्वीकार नहीं किया और नेताओं को अपनी शिकायतें न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने की सलाह दी थी।
इसके बाद विपक्षी दलों ने अदालत तक मार्च निकाला। इसी घटनाक्रम के संदर्भ में सुनवाई के दौरान न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कोशिशों पर मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी सामने आई।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत SIR की वैधता, पारदर्शिता, रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग और अंतरिम राहत के सवालों पर विचार कर सकती है।
महिला पत्रकारों पर कथित हमले के मामले में भी संभावित जांच समिति को लेकर आगे की न्यायिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
SIR विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिकों एवं पत्रकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी न्यायिक विचार के दायरे में आ रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की प्रक्रिया की वैधता और कथित पुलिस कार्रवाई पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के आदेशों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
#SupremeCourt #सुप्रीमकोर्ट #CJI #सूर्यकांत #RahulGandhi #राहुलगांधी #SIR #SpecialIntensiveRevision #ElectionCommission #चुनावआयोग #INDIABloc #INDIAगठबंधन #WomenJournalists #महिलापत्रकार #DigvijayaSingh #AsaduddinOwaisi #ElectoralRolls #मतदातासूची #LegalNews #कानूनीसमाचार
