संसद में बाधा डालना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा: दिल्ली हाईकोर्ट की मणोरंजन डी की जमानत याचिका पर मौखिक टिप्पणी

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Obstruction of Parliament is a serious threat to national security: Delhi HC’s oral observation on bail plea of Manoranjan D

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी मणोरंजन डी की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही में व्यवधान डालना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा माना जा सकता है।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तब की जब आरोपी के वकील ने यह तर्क दिया कि मणोरंजन डी द्वारा किया गया प्रदर्शन “गैर विषैले धुएं” और “बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर नारेबाजी” के माध्यम से एक “शांतिपूर्ण विरोध” था।

पीठ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

भारत में आतंक फैलाने का सबसे प्रभावी तरीका संसद में व्यवधान पैदा करना है। आपने संसद में व्यवधान डाला।

🔹 मामला क्या है?

घटना:
13 दिसंबर 2023 को, संसद भवन में उस समय हड़कंप मच गया जब मणोरंजन डी और सागर शर्मा ने लोकसभा कक्ष के भीतर छलांग लगाई, जबकि नीलम आज़ाद और अमोल शिंदे ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। आरोपियों ने रंगीन धुएं के कैनिस्टर का इस्तेमाल किया।

गिरफ्तारी और जांच:
चारों को तुरंत गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच स्पेशल सेल की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट को सौंपी।

🔹 गंभीर धाराएं और UAPA लागू

प्राथमिकी (FIR) में आरोप:

  • आईपीसी की धाराएं: 186 (लोक सेवक को कार्य में बाधा), 353, 452, 153, 34, 120B (षड्यंत्र)
  • UAPA की धाराएं: धारा 16 (आतंकी कृत्य), धारा 18 (षड्यंत्र)
  • 14 दिसंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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चार्जशीट:
7 जून 2024 को दिल्ली पुलिस ने 1,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की, जिसमें 6 आरोपियों की भूमिका विस्तार से बताई गई। यह कार्यवाही 2001 के संसद हमले की बरसी के दिन हुई घटना पर आधारित थी।

UAPA मंजूरी:
UAPA के तहत अभियोजन की अनुमति लेफ्टिनेंट गवर्नर ने तिस हजारी रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दी थी।

🔹 पहले से मिली बेल और उस पर शर्तें

हाल ही में नीलम आज़ाद और महेश कुमावत को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर जमानत दी गई थी।
शर्तें:

  • मीडिया से बातचीत पर रोक
  • सप्ताह में तीन बार स्थानीय थाने में हाज़िरी
  • दिल्ली छोड़ने पर रोक

दिल्ली पुलिस ने विरोध किया:
उनका तर्क था कि आरोपी:

  • भगोड़ा हो सकता है
  • गवाहों को प्रभावित कर सकता है
  • जांच में बाधा डाल सकता है

रक्षा पक्ष ने पलटवार किया:

  • UAPA के प्रयोग को बताया “अत्यधिक कठोर”
  • कहा कि यह “असहमति की आवाज़ को दबाने” का प्रयास है
  • साथ ही, आरोप लगाया कि संसद में अंदर आरोपियों के साथ मारपीट की गई

🔹 आगे की कार्यवाही:

हाईकोर्ट अब मणोरंजन डी की जमानत पर विस्तृत सुनवाई करेगा, जहां यह सवाल प्रमुख होगा कि क्या “गैर-हिंसक” होने का दावा संसद जैसी संवेदनशील लोकतांत्रिक संस्था में घुसपैठ को उचित ठहरा सकता है।

⚖️ कानूनी प्रश्न जो उभरते हैं:

  1. क्या शांतिपूर्ण विरोध भी आतंक की श्रेणी में आ सकता है यदि वह संसद में किया जाए?
  2. क्या UAPA जैसे सख्त कानून का प्रयोग लोकतांत्रिक असहमति पर अंकुश लगाने के लिए हो रहा है?
  3. क्या संसद परिसर में घुसपैठ को केवल ‘नुकसान रहित प्रतीकात्मक विरोध’ के रूप में देखा जा सकता है?
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