वकील “न्यायिक व्यवस्था को प्रदूषित” करने के लिए अपने मुवक्किलों को गलत बयान देने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते – हाईकोर्ट

Like to Share

₹50 लाख की संदिग्ध लेन-देन के बाद बैंक खाता फ्रीज: केरल हाईकोर्ट ने कहा- ‘मनी म्यूल’ की तरह इस्तेमाल हुआ खाता, वकीलों को भी लगाई फटकार

मुवक्किल का हित रखने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य पेश किए जाएं जिन्हें अधिवक्ता उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर गलत जानते हैं।

केरल हाईकोर्ट ने 22 वर्षीय युवक का बैंक खाता अनफ्रीज करने से इनकार करते हुए कहा कि करीब 15 दिनों में ₹50 लाख से अधिक की रकम गुजरना खाते के ‘मनी म्यूल’ की तरह इस्तेमाल होने का संकेत है। कोर्ट ने BNS की धारा 111 के तहत FIR का निर्देश दिया।

केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में 22 वर्षीय युवक के बैंक खाते को अनफ्रीज करने से इनकार कर दिया। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद लेन-देन और परिस्थितियों के आधार पर प्रथमदृष्टया माना कि खाते का इस्तेमाल “money mule” के रूप में किया गया था।

जस्टिस एम.ए. अब्दुल हकीम ने पुलिस को खाताधारक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने मामले में युवक की ओर से दाखिल pleadings में कथित रूप से गलत तथ्यों का उल्लेख किए जाने पर उसके अधिवक्ताओं को भी कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि वकील “न्यायिक व्यवस्था को प्रदूषित” करने के लिए अपने मुवक्किलों को गलत बयान देने की अनुमति नहीं दे सकते।

15 दिनों में खाते से गुजरे ₹50 लाख से अधिक

युवक ने अपने Federal Bank खाते को अनफ्रीज कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।

बैंक के अनुसार, विभिन्न Law Enforcement Agencies (LEAs) की ओर से खाते को freeze/debit-freeze करने के लिए पांच अनुरोध प्राप्त हुए थे। इन अनुरोधों के तहत कुल ₹21 लाख की राशि पर रोक लगाई गई थी।

बैंक ने बताया कि खाता जनवरी 2023 में खोला गया था और शुरुआत में इसमें गतिविधि काफी सीमित थी। लेकिन 15 मई 2023 से लेन-देन के पैटर्न में अचानक बड़ा बदलाव आया।

महज लगभग 15 दिनों में ₹50 लाख से अधिक की रकम खाते से होकर गुजरी।

बैंक ने इस अचानक बदलाव और विभिन्न जांच एजेंसियों से प्राप्त freeze requests को खाते की गतिविधियों को संदिग्ध मानने का आधार बताया।

युवक ने कारोबार से होने वाली आय का दिया हवाला

युवक ने अदालत के सामने दावा किया कि वह दो व्यवसायों में working partner है।

Must Read -  नाबालिग बेटी का बाल देखभाल संस्थान में किया गया जबरन धर्म परिवर्तन, मां ने जेजे एक्ट के प्रावधानों को दी चुनौती और माँगा रुपया 5 करोड़ का मुआवजा-

उसके अनुसार:

  • Ripi Foods में उसे लगभग ₹35,000 मासिक वेतन और मुनाफे में हिस्सा मिलता है।
  • Nipolta Media से उसे लगभग ₹40,000 मासिक वेतन और व्यावसायिक लाभ मिलता है।
  • उसके पिता विदेश में कार्यरत हैं और कभी-कभी परिवार के खर्च के लिए उसके खाते में रकम भेजते हैं।

उसकी ओर से यह भी कहा गया कि खाते में ग्राहकों द्वारा नियमित रूप से रकम जमा की जाती थी और इसलिए लेन-देन सामान्य कारोबारी गतिविधि का हिस्सा था।

युवक की ओर से अदालत से आग्रह किया गया कि खाते को संचालित करने की अनुमति दी जाए, जबकि ₹21 लाख की lien राशि पर रोक बरकरार रखी जाए।

खाते में अंततः केवल ₹1 बचा था

बैंक ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि खाते में जमा हुई पूरी रकम युवक द्वारा निकाल ली गई थी।

बैंक के मुताबिक, 5 जून 2023 को खाते में केवल ₹1 का credit balance बचा था।

अदालत ने इस तथ्य के साथ-साथ कम समय में बड़ी रकम के प्रवाह और उसके बाद रकम निकाले जाने की परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट ने कहा—‘मनी म्यूल’ की तरह इस्तेमाल हुआ खाता

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए कहा कि युवक के खाते का इस्तेमाल money mule account के तौर पर किए जाने की स्थिति सामने आती है।

Money mule से सामान्यतः ऐसे बैंक खाते का आशय होता है जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति के खाते में संदिग्ध या अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर/निकासी करने के लिए किया जाता है।

कोर्ट ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड में कम समय में बड़ी रकम के क्रेडिट का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था।

वकीलों की भूमिका पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू अदालत द्वारा अधिवक्ताओं की भूमिका पर की गई टिप्पणी है।

कोर्ट ने कहा कि Advocates are officers of the court और उन्हें ऐसी pleadings या affidavits दाखिल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए जिनमें वे जानते हों कि उनके मुवक्किल के बयान दस्तावेजों के विपरीत और गलत हैं।

अदालत ने कथित false statements को लेकर वकीलों के आचरण की कड़ी निंदा की और कहा कि:

“They should not allow the litigants to pollute the judicial system.”

कोर्ट के अनुसार, यदि उपलब्ध दस्तावेजों से वकील को पता है कि मुवक्किल का बयान गलत है, तो ऐसे बयान को pleadings में शामिल करना गंभीर चिंता का विषय है।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मृत व्यक्तियों के पक्ष में पारित डिक्री ‘शून्य’, ट्रायल कोर्ट की डिक्री लागू होगी

युवक के दावे दस्तावेजों से मेल नहीं खाए

हाईकोर्ट ने कहा कि युवक के पास कम अवधि में खाते में आई बड़ी रकम के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था।

अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों से उसके द्वारा किए गए कुछ दावों की सत्यता पर गंभीर सवाल उठते थे।

इसी आधार पर कोर्ट ने उसके खाते को अनफ्रीज करने की मांग स्वीकार नहीं की।

पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश

अदालत ने केवल खाते को फ्रीज रखने तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि पुलिस को युवक के खिलाफ BNS की धारा 111 के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।

इससे मामला अब केवल बैंकिंग प्रतिबंध या civil dispute तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित आपराधिक गतिविधि की औपचारिक जांच का रास्ता खुलेगा।

फैसले का कानूनी महत्व

यह आदेश बैंक खातों के money mule के रूप में इस्तेमाल किए जाने के संदिग्ध मामलों में महत्वपूर्ण है। अदालत ने यह संकेत दिया है कि अचानक और असामान्य तरीके से बड़ी रकम का प्रवाह, उसके बाद रकम की निकासी और जांच एजेंसियों की शिकायतें—इन सभी परिस्थितियों को एक साथ देखकर खाते के उपयोग की प्रकृति का आकलन किया जा सकता है।

साथ ही, आदेश अधिवक्ताओं की पेशेवर जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है। मुवक्किल का हित रखने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत के समक्ष ऐसे तथ्य पेश किए जाएं जिन्हें अधिवक्ता उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर गलत जानते हैं।

#KeralaHighCourt #MoneyMule #BankAccountFreeze #BNS #CyberCrime #CriminalLaw #Advocates #LegalEthics #HighCourt #केरलहाईकोर्ट #मनीम्यूल #बैंकखाता #बैंकखाताफ्रीज #BNS #साइबरक्राइम #आपराधिककानून #वकील #कानूनीसमाचार

Leave a Comment