जस्टिस मुक्ता गुप्ता — सेवानिवृत्त न्यायाधीश, दिल्ली हाईकोर्ट — अध्यक्ष
IIT दिल्ली ने MSc Physics छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत की जांच के लिए अंतिम बाहरी जांच समिति गठित की है। दिल्ली हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस मुक्ता गुप्ता समिति की अध्यक्ष होंगी। रिपोर्ट दो सप्ताह में मांगी गई है।
IIT दिल्ली ने 31 वर्षीय MSc Physics छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए अंतिम बाहरी जांच समिति (External Inquiry Committee) गठित कर दी है। संस्थान से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
समिति को अपनी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य घटना की परिस्थितियों की जांच करने के साथ-साथ संस्थान की छात्र सहायता व्यवस्था और प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए सुझाव देना है।
समिति में कौन-कौन शामिल?
नई गठित समिति में:
- जस्टिस मुक्ता गुप्ता — सेवानिवृत्त न्यायाधीश, दिल्ली हाईकोर्ट — अध्यक्ष
- प्रोफेसर प्रताप शरण — प्रमुख, मनोचिकित्सा विभाग, AIIMS नई दिल्ली
- चार छात्र प्रतिनिधि
- IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार — सचिव एवं संयोजक
समिति संबंधित छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और प्रशासनिक कार्यालयों के साथ बातचीत करेगी। इसके अलावा, संस्थान में लागू मौजूदा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
पूर्व DGP अशोक कुमार ने समिति से खुद को अलग किया
इससे पहले IIT दिल्ली ने उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार को समिति का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला देते हुए समिति से खुद को अलग कर लिया।
इसके बाद संस्थान ने जस्टिस मुक्ता गुप्ता को समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया।
छात्रों के विरोध के बाद जांच समिति का गठन
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद IIT दिल्ली में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। छात्रों की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र जांच, Dean of Student Welfare के इस्तीफे और मृत छात्र के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग शामिल थी।
छात्रों ने शुरुआती जांच समिति की संरचना पर भी आपत्ति जताई थी और मांग की थी कि समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को दी जाए।
इसी पृष्ठभूमि में संस्थान ने बाहरी जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
समिति को क्या जांचना है?
IIT दिल्ली के अनुसार, बाहरी समिति:
- घटना तक पहुंचने वाली परिस्थितियों की जांच करेगी।
- छात्रों से संबंधित मौजूदा सहायता एवं शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा करेगी।
- संस्थान के प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं में संभावित कमियों की पहचान करेगी।
- भविष्य में छात्र सहायता प्रणाली को मजबूत करने के उपाय सुझाएगी।
संस्थान ने इसके अलावा एक External Ombudsperson नियुक्त करने का भी प्रस्ताव रखा है, जो उन छात्र शिकायतों को देख सकेगा जिनका समाधान मौजूदा आंतरिक व्यवस्था के माध्यम से नहीं हो पाया है।
ऋषिकेश कुमार की मौत कैसे हुई?
IIT दिल्ली के अनुसार, ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में संस्थान में प्रवेश लिया था और कैंपस के हॉस्टल में रह रहे थे।
इस वर्ष होली समारोह के बाद कुछ छात्रों ने उनके संबंध में चिंता जताई थी। इसके बाद उन्हें IIT के अस्पताल भेजा गया और बाद में लगभग एक महीने तक एक विशेष अस्पताल में उनका उपचार हुआ।
संस्थान के मुताबिक, उनके दूसरे और तीसरे सेमेस्टर से हटने के अनुरोध को मंजूरी दी गई थी। जुलाई और अगस्त के दौरान उन्हें संस्थान के काउंसलरों और डॉक्टरों से काउंसलिंग तथा उपचार संबंधी सहायता भी मिली थी।
IIT दिल्ली ने यह भी बताया है कि फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों के योगदान के माध्यम से उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
22 अगस्त को हुई थी मौत
ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त को IIT दिल्ली के Lecture Hall Complex (LHC) की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी।
पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। उनकी मौत की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है।
ऐसे में नई बाहरी समिति की जांच केवल घटना के तत्काल कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि छात्र सहायता, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन, शिकायत निवारण और संस्थागत प्रतिक्रिया की मौजूदा व्यवस्था में कहीं कोई कमी तो नहीं थी।
Tags:
#IITDelhi #ऋषिकेशकुमार #IITदिल्ली #JusticeMuktaGupta #जस्टिसमुक्तागुप्ता #ExternalInquiry #बाहरीजांच #StudentSupport #छात्रसहायता #AIIMS #StudentDeath #CampusSafety #JudicialInquiry #DelhiHighCourt #EducationNews #LegalNews
