इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 220 केवी लाइन से प्रभावित किसानों को 2024 की नई केंद्र गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा देने का आदेश दिया; राज्य सरकार के रवैये पर सवाल।
किसानों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में Allahabad High Court ने हाईटेंशन बिजली लाइन से प्रभावित जमीनों पर उचित मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की 14 जून 2024 की नई गाइडलाइन को लागू करना राज्य सरकार के लिए अनिवार्य है।
🔹 क्या है मामला
यह याचिका शामली जिले के किसान Bhullan Singh और तीन अन्य द्वारा दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ताओं की जमीन पर:
- 220 केवी हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन
- और बिजली के टावर
स्थापित किए गए थे, जिससे:
- फसल को नुकसान हुआ
- पेड़ों की क्षति हुई
- और जमीन की बाजार कीमत घट गई
इसके बावजूद किसानों को केवल आंशिक मुआवजा दिया गया, जबकि तार के नीचे की जमीन के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया।
🔹 कोर्ट में क्या हुआ
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Arindam Sinha और न्यायमूर्ति Prashant Kumar की खंडपीठ ने की।
कोर्ट ने पाया कि:
- किसानों की शिकायतों पर प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की
- फरवरी 2026 में पुलिस की मदद से बिजली सप्लाई भी शुरू कर दी गई
- और 10 मार्च 2026 को किसानों का दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया कि नई गाइडलाइन लागू नहीं है
🔹 2024 गाइडलाइन पर कोर्ट का जोर
अदालत ने केंद्र सरकार की 14 जून 2024 की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि:
- टावर बेस एरिया के लिए
👉 जमीन के मूल्य का 200% मुआवजा - तार के नीचे की जमीन के लिए
👉 30% मुआवजा
देना अनिवार्य है
🔹 राज्य सरकार के रवैये पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि:
- राज्य सरकार 2015 की पुरानी गाइडलाइन लागू कर चुकी है
- लेकिन 2024 की नई गाइडलाइन लागू नहीं करना
👉 “चयनात्मक रवैया” (selective approach) है, जो न्यायसंगत नहीं है
🔹 जमीन अधिग्रहण नहीं, फिर भी मुआवजा क्यों?
अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- भले ही जमीन का औपचारिक अधिग्रहण नहीं हुआ
- लेकिन हाईटेंशन लाइन गुजरने के बाद:
- निर्माण पर रोक
- उपयोग की सीमाएं
- और बाजार मूल्य में गिरावट
जैसे स्थायी प्रभाव पड़ते हैं
👉 इसलिए उचित मुआवजा देना जरूरी है
🔹 कोर्ट का आदेश
अदालत ने:
- 10 मार्च 2026 का आदेश रद्द कर दिया
- अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
👉 4 सप्ताह के भीतर
👉 2024 गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा तय कर भुगतान करें
🔹 कानूनी महत्व
यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- यह स्पष्ट करता है कि
👉 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी किसानों के अधिकार सुरक्षित हैं - और
👉 सरकारें गाइडलाइन लागू करने में मनमानी नहीं कर सकतीं
🔹 निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश किसानों के लिए राहत भरा है और यह संदेश देता है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
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