दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल की कोर्ट सुनवाई की कथित अवैध रिकॉर्डिंग पर PIL दायर। वीडियो हटाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग, न्यायपालिका की गरिमा पर उठे सवाल।
अदालत की कार्यवाही के कथित लीक पर PIL
Delhi High Court में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर अदालत की कार्यवाही की कथित अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उसके सोशल मीडिया पर प्रसार को चुनौती दी गई है। याचिका में मांग की गई है कि इस तरह की सामग्री को तुरंत हटाया जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
केजरीवाल की सुनवाई से जुड़ा मामला
यह याचिका 13 अप्रैल 2026 को हुई उस सुनवाई से संबंधित है, जिसमें पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। यह सुनवाई Justice Swarana Kanta Sharma के समक्ष हुई थी, जहां केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति जांच से जुड़े मामले में न्यायाधीश के रीक्यूजल (स्वयं को अलग करने) की मांग रखी थी।
बिना अनुमति रिकॉर्डिंग का आरोप
याचिका अधिवक्ता Vaibhav Singh द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि लगभग 45-50 मिनट लंबी अदालत की कार्यवाही को बिना अनुमति रिकॉर्ड किया गया और बाद में YouTube, Facebook, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया।
‘भ्रामक नैरेटिव’ का आरोप
याचिका में कहा गया है कि वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को इस तरह साझा किया गया जिससे एक भ्रामक नैरेटिव तैयार हुआ और न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा। इसमें आरोप लगाया गया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इन क्लिप्स को पोस्ट और री-शेयर कर इसके प्रसार को बढ़ावा दिया।
कई नेताओं और पत्रकारों के नाम शामिल
याचिका में Digvijaya Singh और Saurabh Bharadwaj समेत कई नेताओं का नाम लिया गया है, जिन पर सामग्री को अपलोड या प्रसारित करने का आरोप है।
इसके अलावा, Arvind Kejriwal पर भी कुछ क्लिप्स को रीपोस्ट करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में अन्य व्यक्तियों जैसे Ravish Kumar, Manish Sisodia, Sanjay Singh, Sanjeev Jha, Pardeep Sahni, Jarnail Singh, Mukesh Ahlawat और Vinay Mishra का भी उल्लेख है, जिन पर कथित रूप से वीडियो के प्रसार में भूमिका निभाने का आरोप है।
नियमों का उल्लंघन बताने का दावा
याचिका में कहा गया है कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसका प्रसारण High Court of Delhi Rules for Video Conferencing for Courts, 2021 और Electronic Evidence and Video Conferencing Rules, 2025 का उल्लंघन है। इन नियमों के तहत बिना अनुमति अदालत की सुनवाई को रिकॉर्ड या साझा करना प्रतिबंधित है।
न्यायपालिका की गरिमा पर खतरे की दलील
याचिका में इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा गया है कि इस तरह की सामग्री का प्रसार अदालत की गरिमा को कम करता है और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
कोर्ट से मांगी गई राहत
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि इन कथित वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को तुरंत हटाने के निर्देश दिए जाएं और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
सुनवाई का इंतजार
मामले के जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है, जहां अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकती है।
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