सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा: याचिकाकर्ता ने फाइलें उछालीं, CJI के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी; कोर्ट ने अवमानना कार्रवाई से किया इनकार

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने अदालत में फाइलें उछाल दीं और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की। अदालत ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज करते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एक असामान्य घटनाक्रम देखने को मिला, जब एक याचिकाकर्ता ने अदालत कक्ष में दस्तावेज हवा में उछाल दिए और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, जिस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

हालांकि, अदालत की कार्यवाही में व्यवधान और न्यायालय की मर्यादा भंग होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया और मामले का निस्तारण केवल याचिका के गुण-दोष के आधार पर किया।

जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई घटना

यह घटना शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे कोर्ट नंबर 13 में हुई, जहां न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ मामलों की सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप, उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायर उसके आवेदन को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश के बजाय निजी शिकायत (Private Complaint) के रूप में स्वीकार किया था।

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सुनवाई के दौरान पीठ को निर्देश देने का किया दावा

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने सामान्य कानूनी दलीलें देने के बजाय पीठ को संबोधित करते हुए कहा कि वह लखनऊ के विकास नगर के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता है और स्वयं को “संप्रभु” (Sovereign) बताया।

इस पर न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने हस्तक्षेप करते हुए पूछा, “क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?”

अदालत कक्ष में फाइलें उछालीं, सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकाला

सुनवाई के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब याचिकाकर्ता ने अपने साथ लाई गई फाइल से दस्तावेजों का एक बंडल निकालकर अदालत कक्ष में हवा में उछाल दिया। इससे कागजात अदालत के फर्श पर बिखर गए।

इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर उसे अदालत कक्ष से बाहर ले जाना शुरू किया। इस दौरान उसने कथित रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया।

न्यायाधीशों ने बनाए रखा संयम

पूरे घटनाक्रम के दौरान पीठ ने संयम बनाए रखा और व्यवधान समाप्त होने के बाद सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई सामान्य रूप से जारी रखी।

बाद में अदालत ने एक संक्षिप्त आदेश पारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने मामले के गुण-दोष पर दलीलें रखने के बजाय असंगत और असंसदीय टिप्पणियां कीं। हालांकि, उसकी परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने उसके विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं करने का निर्णय लिया।

न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने जताई सहानुभूति

याचिकाकर्ता को अदालत कक्ष से बाहर ले जाने के बाद न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने वहां उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कहा कि संबंधित व्यक्ति अत्यधिक मानसिक तनाव और हताशा में प्रतीत होता है तथा न्यायालय को उसके प्रति सहानुभूति है।

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SLP खारिज, हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

विशेष अनुमति याचिका (SLP) के गुण-दोष पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

वकीलों के संगठन ने की कार्रवाई की मांग

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं के एक संगठन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर घटना में शामिल व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

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