कलकत्ता उच्च न्यायालय: क्या किशोर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते है? विचार करने के लिए बड़ी पीठ को भेजा, जानिए विस्तार से

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को क्रिमिनल प्रोसीजर कोड अंतरगर्त धारा 438 एक किशोर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका के मुद्दे पर विचार करने के लिए एक बड़ी पीठ को संदर्भित किया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति बिवास पटनायक की खंडपीठ ने निर्णय सुनाया था कि इस तरह का आवेदन विचारणीय है। … Read more

सुप्रीम कोर्ट: संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय, अग्रिम जमानत में तय समयसीमा जरूरी नहीं-

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एस रविंद्र भट की संविधान पीठ ने कहा कि अग्रिम जमानत सामान्य तौर पर तब तक समाप्त नहीं किए जाने की जरूरत है जब तक अदालत द्वारा उसे समन किया जाए या आरोप तय किए जाएं. हालांकि यह अदालत पर निर्भर है … Read more

आपराधिक मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक प्रचलित शब्द ज़मानत Bail है, जानिए क्या है “जमानत” का कानून!

आपराधिक मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक प्रचलित शब्द ज़मानत होता है। जब भी कोई व्यक्ति किसी प्रकरण में अभियुक्त बनाया जाता है और अन्वेषण (Investigation), जांच (Inquiry) और विचारण (Trial) के लंबित रहते हुए उस व्यक्ति को कारावास में रखा जाता है तब ज़मानत शब्द, उस अभियुक्त के लिए सबसे अधिक उपयोग में लाया जाता … Read more

अभियुक्त के पास अगर नहीं है ज़मानतदार तब कानून में क्या है प्रावधान, जानिए विस्तार से केस विवरण के साथ –

CRPC BAIL

ज़मानत के लिए गिड़गिड़ाना तथा किसी व्यक्ति से अपने प्रकरण में प्रतिभू बनने हेतु निवेदन करना अपनी गरिमा एवं प्रतिष्ठा को ठेंस पहुंचाने जैसा है। यह गरिमा एवं प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति को संविधान के अंतर्गत दिए गए मूल अधिकारों में निहित है। संपूर्ण भारत में कोई अभियुक्त (Accused) किसी अन्य स्थान पर निवास करता है … Read more

इलाहाबाद हाईकोर्ट का निचली अदालतों को यह निर्देश कि – जमानत आदेशों में आवेदकों के आपराधिक इतिहास का पूरा विवरण दिया जाये

allahabad high court

Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे आवेदकों/अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, यदि कोई हो, का पूरा विवरण दें या यदि कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तो इस तथ्य को रिकॉर्ड करें कि आवेदक/अपराधी का कोई नहीं आपराधिक इतिहास नहीं है। जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने … Read more

सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला: चार्जशीट दायर करने के बाद भी रद्द हो सकती है FIR-

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट एफआईआर रद्द करने की याचिका को सुन सकता था। यहां तक कि इस याचिका के लंबित रहते यदि चार्जशीट दायर भी हो गई है तो भी इसे सुना जा सकता है।  सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि चार्जशीट दायर होने के बाद भी आरोपी एफआईआर … Read more

90 दिन में चार्जशीट दाखिल न होना जमानत का स्वतः आधार : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने यूनियन ऑफ इंडिया थ्रू सीबीआई वर्सेज राजाराम यादव केस में इस तथ्य पर विस्तार से विचार कर निर्णय दिया है कि 90 दिन में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं होने पर अभियुक्त को 167(2) सीआरपीसी के तहत जमानत प्राप्त करने का अधिकार है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी अपराध … Read more

मद्रास हाईकोर्ट: डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार “ठीक उसी समय” चार्जशीट दाखिल करने से कभी भी समाप्त नहीं होता-

अदालत ने अभियुक्तों को डिफ़ॉल्ट जमानत के अधिकार का लाभ उठाने के लिए और अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल करने के लिए जांच एजेंसी के लिए लागू समय की कमी के बारे में लंबे समय से चल रहे भ्रम को स्पष्ट किया है। एक फैसले में, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने वैधानिक प्रावधानों और … Read more

जमानत देते समय अदालत के लिए विस्तृत कारण बताना जरूरी नहीं-

पीठ ने कहा हमें अधिवक्ताओं की भी रक्षा करनी है- Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जमानत देते समय कोर्ट के लिए विस्तृत कारण बताना जरूरी नहीं है, खासकर तब जब मामला प्रारंभिक चरण में हो और आरोपित द्वारा किए गए अपराध को स्पष्ट नहीं किया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी … Read more

सुप्रीम कोर्ट: चार्जशीट दाखिल करने के बाद भी Anticipatory Bail लेने से नहीं रोका जा सकता-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की चार्जशीट दाखिल करने के बाद आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने का विकल्प होने से पक्षकारों को अग्रिम जमानत लेने से नहीं रोका जा सकता सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल करने के बाद आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए आवेदन करने का विकल्प होने … Read more