📝 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: टाइगर रिज़र्व संरक्षण के लिए देशभर में लागू होंगे कड़े मानक
सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को टाइगर रिज़र्व संरक्षण पर देशव्यापी दिशानिर्देश जारी किए। कोर्बेट टाइगर रिज़र्व में अवैध निर्माण हटाने का आदेश, टाइगर सफारी पर कड़े प्रतिबंध, ESZ अनिवार्य, साइलेंस ज़ोन घोषणा और नाइट टूरिज्म पर रोक। पर्यावरण संरक्षण के लिए अब तक का सबसे व्यापक न्यायिक हस्तक्षेप।
टाइगर रिज़र्व संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कोर्बेट में अवैध निर्माण ध्वस्त करने और देशभर में कड़े पर्यावरणीय नियम लागू करने के निर्देश
भारत के शीर्ष न्यायालय ने 17 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक और व्यापक पर्यावरणीय आदेश पारित करते हुए देशभर के टाइगर रिज़र्व के संरक्षण व प्रबंधन के लिए कड़े और स्पष्ट दिशानिर्देश लागू कर दिए। यह फैसला 6 मार्च 2024 के आदेश का विस्तार है और कोर्बेट टाइगर रिज़र्व (CTR) में बड़े पैमाने पर हुए अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई और भ्रष्टाचार की जांच के बाद आया है।
CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्ति बाद वर्तमान पीठ —
CJI बी.आर. गवई, जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह, और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर — ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।
🟠 कोर्बेट टाइगर रिज़र्व: अवैध निर्माण तीन महीनों में ध्वस्त करने का आदेश
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने CTR के लिए एक रेस्टोरटिव (पुनर्स्थापनात्मक) दृष्टिकोण अपनाया।
मुख्य निर्देश:
- उत्तराखंड सरकार को 2 महीने के भीतर संपूर्ण पुनर्स्थापन योजना CEC के साथ मिलकर बनानी होगी।
- 3 महीने के भीतर सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाए।
- टाइगर हैबिटैट को जो नुकसान (लगभग ₹29.8 करोड़) हुआ है, उसकी भरपाई राज्य करेगा।
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद उनसे अनुपातिक वसूली संभव।
कोर्ट ने कहा:
“पर्यावरणीय क्षति की भरपाई ही न्यायसंगत मार्ग है। ध्वस्त परियोजनाओं से अधिक प्रदूषण उत्पन्न होगा।”
🟢 टाइगर सफारी पर कड़े देशव्यापी नियम — कोर क्षेत्र में सफारी पूरी तरह प्रतिबंधित
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत के लिए एक समान नीति तय करते हुए कहा:
⛔ कोर/क्रिटिकल टाइगर हैबिटैट में सफारी पूर्णतः प्रतिबंधित।
✔ सफारी केवल यहां बन सकती है:
- नॉन-फॉरेस्ट लैंड
- डिग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड
- बफर जोन (बशर्ते वह टाइगर कॉरिडोर न हो)
सफारी के अनिवार्य नियम:
- प्रत्येक सफारी के साथ रेस्क्यू व रिहैबिलिटेशन सेंटर अनिवार्य
- जानवरों को सिर्फ उसी टाइगर रिज़र्व से लाया जा सकता है
- सफारी का प्रबंधन — फ़ील्ड डायरेक्टर
- सभी कमाई — टाइगर कंज़र्वेशन फाउंडेशन में ही जाएगी
यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट ने सफारी संचालन पर इतने कड़े, बारीक और बाध्यकारी निर्देश दिए हैं।
🟣 देशभर में सभी टाइगर रिज़र्व के लिए अनिवार्य Eco-Sensitive Zones (ESZ)
कोर्ट ने आदेश दिया:
✔ सभी राज्यों को 1 साल में ESZ नोटिफाई करने होंगे।
✔ ESZ में पूरे बफर और फ्रिंज एरिया को शामिल करना अनिवार्य।
इसके साथ ही:
⛔ माइनिंग पर पूर्ण प्रतिबंध
- टाइगर हैबिटैट
- बफर ज़ोन
- ESZ
इनमें से जिस भी क्षेत्र की सीमा बड़ी होगी, उसके 1 km के अंदर खनन पूरी तरह वर्जित होगा।
🟤 पूरे टाइगर रिज़र्व को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित करने का आदेश
Noise Pollution (Regulation & Control) Rules, 2000 के अंतर्गत:
- सभी टाइगर रिज़र्व और ESZ को 3 महीने में साइलेंस ज़ोन घोषित करें
- नाइट टूरिज्म पर पूर्ण रोक
- डस्क टू डॉन (शाम से सूरज उगने तक) — कोई सड़क यातायात नहीं
- मोबाइल फोन का उपयोग कोर क्षेत्र के टूरिज्म ज़ोन में प्रतिबंधित
🔵 प्रबंधन सुधार और केंद्र–राज्य समन्वय
राज्यों को निर्देश:
- 6 महीने में कोर व बफर क्षेत्र नोटिफाई करें
- 3 महीने में नया Tiger Conservation Plan (TCP) तैयार करें
NTCA के लिए:
- 6 महीने में मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन मॉडल दिशानिर्देश तैयार करें
डिजिटल इंटीग्रेशन:
- सभी टाइगर रिज़र्व, कॉरिडोर, ESZ को Gati Shakti पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
⚖ निष्कर्ष
यह निर्णय भारतीय पर्यावरणीय न्यायशास्त्र में मील का पत्थर माना जा रहा है। कोर्ट ने पहली बार टाइगर संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मानक, राष्ट्रीय निगरानी, और जनहित केंद्रित प्रबंधन संरचना बनाई है।
मामले का नाम:
T.N. Godavarman Thirumulpad v. Union of India & Others
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