9 जजों की संविधान पीठ का 6:3 से फैसला
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने Bangalore Water Supply फैसले को अधिकांशतः बरकरार रखा। 1947 Act के लंबित मामलों में यह लागू रहेगा, नए विवाद IR Code 2020 के तहत तय होंगे।
9 जजों की संविधान पीठ का 6:3 से फैसला
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(j) में “Industry” की परिभाषा को लेकर 1978 के ऐतिहासिक Bangalore Water Supply फैसले को बड़े स्तर पर बरकरार रखा है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6:3 के बहुमत से माना कि 1978 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए किया गया रेफरेंस वैध और सुनवाई योग्य था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य के विवादों में 1978 का फैसला आधार या “एंकर” नहीं बनेगा।
‘Triple Test’ का मूल ढांचा बरकरार
बहुमत ने Bangalore Water Supply मामले में निर्धारित Triple Test के मूल ढांचे को बरकरार रखा। कोर्ट ने माना कि यह ढांचा करीब पांच दशक तक न्यायिक कसौटी पर खरा उतरा है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि Triple Test के कुछ हिस्सों और उसके साथ दिए गए दिशानिर्देशों को मौजूदा परिस्थितियों और धारा 2(j) के दायरे को बेहतर ढंग से स्पष्ट करने के लिए परिष्कृत किया जा सकता है।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने मूल कानूनी स्थिति को पूरी तरह खारिज करने के बजाय उसके कुछ पहलुओं को पुनर्गठित करने का रास्ता अपनाया।
1947 के कानून के लंबित मामलों पर पुराना फैसला लागू रहेगा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Industrial Disputes Act, 1947 के तहत उत्पन्न विवादों, जिनमें लंबित मामले भी शामिल हैं, का फैसला Bangalore Water Supply में निर्धारित कानून के अनुसार ही किया जाएगा।
हालांकि, पहले से तय हो चुके मामलों पर इस फैसले का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भविष्य के विवाद Industrial Relations Code, 2020 के तहत होंगे
कोर्ट ने महत्वपूर्ण रूप से स्पष्ट किया कि भविष्य में उत्पन्न होने वाले औद्योगिक विवादों पर Industrial Relations Code, 2020 लागू होगा।
नए कानून की व्याख्या उसके अपने शब्दों, संरचना और संदर्भ के आधार पर की जाएगी। 1978 के Bangalore Water Supply फैसले को नए कानून की व्याख्या के लिए “एंकर” नहीं बनाया जा सकता।
इसका अर्थ है कि 1978 का फैसला पुराने कानून के तहत लंबित विवादों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा, लेकिन नए औद्योगिक विवादों में 2020 की संहिता स्वतंत्र कानूनी आधार होगी।
जस्टिस नागरत्ना की असहमति
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस दीपांकर दत्ता के साथ रेफरेंस की maintainability के मुद्दे पर बहुमत से असहमति जताई।
जस्टिस नागरत्ना का मत था कि धारा 2(j) की व्याख्या को दोबारा खोलने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह व्यवस्था लगभग पांच दशकों से लागू है।
उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से जुड़े सवाल पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आए थे और उन्हें छोटी पीठ द्वारा निपटाया जा सकता था। साथ ही, 2020 में नए कानून के लागू होने के बाद पुराने और स्थापित कानूनी दृष्टिकोण को फिर से खोलना लंबित औद्योगिक विवादों में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
सरकारी विभाग भी ‘Industry’ हो सकते हैं?
जस्टिस नागरत्ना ने सरकारी विभागों की गतिविधियों को “Industry” की परिभाषा में शामिल किए जाने के सवाल पर भी अलग से विचार किया।
उन्होंने कहा कि केवल यह तथ्य कि कोई सरकारी विभाग वैधानिक या कल्याणकारी कार्य करता है, उसे स्वतः “Industry” की परिभाषा से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता।
उनके अनुसार यह देखना महत्वपूर्ण है कि गतिविधि की प्रकृति क्या है, न कि उसे कौन संचालित कर रहा है।
उन्होंने Bangalore Water Supply में निर्धारित Dominant Nature Test को भी सही माना।
जस्टिस भुइयां और जस्टिस दत्ता ने भी रेफरेंस का विरोध किया
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने रेफरेंस की maintainability के प्रश्न पर जस्टिस नागरत्ना से सहमति जताई।
दोनों जजों का मत था कि Bangalore Water Supply फैसले को एक स्थापित कानूनी अध्याय के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए था और उसे नौ जजों की पीठ के सामने दोबारा खोलने की आवश्यकता नहीं थी।
छह जजों ने रेफरेंस को वैध माना
CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस वी.एम. पंचोली, जस्टिस एस.सी. शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे ने रेफरेंस को वैध और maintainable माना।
जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस बागची ने भी माना कि रेफरेंस का गुण-दोष के आधार पर जवाब दिया जा सकता है।
जस्टिस बागची ने stare decisis यानी स्थापित न्यायिक मिसाल का सम्मान करने के सिद्धांत पर भी जोर दिया और कहा कि दशकों से लागू फैसले को पूरी तरह पलटने से कानूनी अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
1978 में क्या कहा था Bangalore Water Supply फैसले ने?
पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 21 फरवरी 1978 के ऐतिहासिक Bangalore Water Supply & Sewerage Board v. R. Rajappa फैसले से जुड़ा है।
उस समय सात जजों की पीठ ने Industrial Disputes Act, 1947 की धारा 2(j) में “Industry” शब्द की व्याख्या करते हुए Triple Test निर्धारित किया था।
जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर ने मुख्य फैसला लिखा था।
क्या है Triple Test?
1978 के फैसले के अनुसार किसी गतिविधि को सामान्यतः “Industry” माना जा सकता है, यदि उसमें मुख्य रूप से—
- व्यवस्थित गतिविधि (Systematic Activity) हो;
- नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संगठित सहयोग (Organised Cooperation) हो; और
- मानवीय जरूरतों एवं इच्छाओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन या वितरण किया जाता हो।
इसी फैसले में मिश्रित प्रकार की गतिविधियां करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए Dominant Nature Test भी विकसित किया गया था।
फैसले को बाद में क्यों चुनौती दी गई?
समय के साथ उत्तर प्रदेश सरकार, National Remote Sensing Agency और Coir Board सहित विभिन्न पक्षों ने Bangalore Water Supply की व्यापक व्याख्या पर सवाल उठाए।
मई 2005 में पांच जजों की संविधान पीठ ने इस रेफरेंस पर विचार करते हुए माना था कि “Industry” की व्यापक व्याख्या के कारण लेबर कोर्ट में मामलों की संख्या काफी बढ़ी और “docket explosion” जैसी स्थिति पैदा हुई।
पीठ ने मामले को बड़ी संविधान पीठ के पास भेज दिया था और जस्टिस कृष्णा अय्यर की बाद की उस चेतावनी का भी उल्लेख किया था जिसमें उन्होंने परिभाषा के अत्यधिक विस्तार को “definitional expansionism” और “industrial hazard” बताया था।
2017 में मामला 9 जजों की पीठ को भेजा गया
जनवरी 2017 में तत्कालीन CJI टी.एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात जजों की पीठ ने निर्देश दिया कि इस रेफरेंस को नौ जजों की संविधान पीठ के सामने रखा जाए।
इसके बाद लंबे समय से लंबित यह संवैधानिक प्रश्न नौ जजों की पीठ के समक्ष पहुंचा।
फैसले का व्यावहारिक असर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं की स्थिति स्पष्ट हो गई है।
पुराने विवाद: Industrial Disputes Act, 1947 के तहत लंबित विवादों पर Bangalore Water Supply का मूल ढांचा लागू रहेगा।
नए विवाद: Industrial Relations Code, 2020 के तहत आने वाले भविष्य के विवादों में नए कानून की स्वतंत्र व्याख्या होगी और 1978 का फैसला उसका बाध्यकारी “एंकर” नहीं होगा।
इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने लगभग पांच दशक पुराने Bangalore Water Supply फैसले को पूरी तरह पलटने के बजाय उसके मूल Triple Test को संरक्षित रखा है, जबकि नए औद्योगिक कानून के दौर के लिए अलग व्याख्यात्मक आधार स्पष्ट किया है।
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