Asaram आश्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मामले में अगली सुनवाई तक “यथास्थिति” बनाए रखी जाए
सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद स्थित असाराम आश्रम की जमीन पर गुजरात सरकार की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, नोटिस की वैधता पर उठाए सवाल।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम हस्तक्षेप
Supreme Court of India ने सोमवार को Asaram Bapu के अहमदाबाद स्थित आश्रम की भूमि और संपत्तियों पर किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई करने से गुजरात सरकार को फिलहाल रोक दिया। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मामले में अगली सुनवाई तक “यथास्थिति” बनाए रखी जाए।
नोटिस पर कोर्ट की प्रारंभिक आपत्ति
न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने कहा कि नगर निगम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस “प्रथम दृष्टया आवश्यक तथ्यों से रहित” प्रतीत होता है। कोर्ट ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए संकेत दिया कि नोटिस की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
ट्रस्ट को नोटिस न मिलने पर सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta से कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि आश्रम का प्रबंधन करने वाले “संत श्री आशाराम ट्रस्ट” को विधिवत नोटिस ही नहीं दिया गया। यह प्रक्रिया में गंभीर कमी मानी जा सकती है।
सरकार का पक्ष: अतिक्रमण और नियम उल्लंघन
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि आश्रम द्वारा लीज शर्तों का उल्लंघन किया गया है और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण भी हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी आवश्यक नोटिस विधि अनुसार जारी किए गए थे।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पहले उदारता दिखाते हुए 6261 वर्ग मीटर भूमि लीज पर दी, फिर अतिरिक्त जमीन भी दी, और अब अचानक लीज समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। जवाब में सरकार ने कहा कि इस जमीन पर 30 से अधिक इमारतें बिना अनुमति के बनाई गई हैं।
तीन दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश
पीठ ने गुजरात सरकार को तीन दिन के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 5 मई के लिए सूचीबद्ध की है। तब तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश प्रभावी रहेगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स परियोजना से जुड़ा मामला
विवादित भूमि 650 एकड़ के बड़े भू-भाग का हिस्सा है, जिसे 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना शहर को “ओलंपिक-रेडी” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती
यह मामला Gujarat High Court के 17 अप्रैल के फैसले के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मोतेरा क्षेत्र में स्थित लगभग 45,000 वर्ग मीटर भूमि पुनः प्राप्त करने की अनुमति दी थी और ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी।
हाई कोर्ट की टिप्पणी: सार्वजनिक भूमि पर सख्ती जरूरी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ट्रस्ट ने भूमि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया और साबरमती नदी के किनारे तक अतिक्रमण किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नियमितीकरण की अनुमति देना सार्वजनिक भूमि से जुड़े स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
पृष्ठभूमि: असाराम का आपराधिक इतिहास
उल्लेखनीय है कि असाराम ने 1972 में इस आश्रम की स्थापना की थी और वर्तमान में वह कई बलात्कार मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश फिलहाल राज्य सरकार की कार्रवाई पर ब्रेक लगाता है, लेकिन अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या सरकार अतिक्रमण और नियम उल्लंघन के अपने आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित कर पाती है।
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