सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाई कोर्ट में 13 नए न्यायाधीशों की सिफारिश

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 13 जजों की सिफारिश की, पंजाब-हरियाणा और आंध्र हाई कोर्ट को मजबूती

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 13 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की।


🔴 कॉलेजियम का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में कुल 13 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों दोनों को शामिल किया गया है।


⚖️ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के लिए 10 नाम

कॉलेजियम ने 4 मई को हुई बैठक में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के लिए कुल 10 अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी।

पहले चरण में तीन नाम स्वीकृत किए गए:

  • प्रविंद्र सिंह चौहान
  • राजेश गौर
  • मंदरजीत यादव

इसके बाद सात अन्य अधिवक्ताओं को भी मंजूरी दी गई:

  • मोनिका छिब्बर शर्मा
  • हरमीत सिंह देओल
  • पूजा चोपड़ा
  • सुनीश बिंदलिश
  • नवदीप सिंह
  • दिव्या शर्मा
  • रविंदर मलिक

🏛️ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के लिए 3 न्यायिक अधिकारी

कॉलेजियम ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

इस तरह कुल मिलाकर 13 नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी गई है।


📊 नियुक्ति प्रक्रिया कैसे होती है?

हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत होती है:

  • संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रस्ताव की शुरुआत
  • मुख्यमंत्री की सिफारिश (यदि कोई हो)
  • राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना (6 सप्ताह के भीतर)
  • केंद्र द्वारा जांच और पृष्ठभूमि सत्यापन
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम जजों से परामर्श
  • अंतिम सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी जाती है
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🧾 राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति

जब राष्ट्रपति नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करते हैं, तब यह प्रक्रिया पूरी होती है। इसके बाद न्याय विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की जाती है और नियुक्ति आधिकारिक रूप से प्रभावी हो जाती है।


⚠️ न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने की पहल

यह सिफारिश ऐसे समय में आई है, जब विभिन्न हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के कई पद खाली हैं।

नई नियुक्तियों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने और न्यायिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने की उम्मीद है।


🌐 न्यायिक प्रणाली को मिलेगी मजबूती

इन नियुक्तियों के जरिए न केवल न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि न्याय तक आम लोगों की पहुंच भी बेहतर होगी।

यह कदम न्यायपालिका में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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