बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र के लिए विकास योजना बने: सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को निर्देश

Like to Share

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र के लिए समग्र विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया। अदालत ने भीड़ प्रबंधन, सड़क चौड़ीकरण और नागरिक सुविधाओं पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वृंदावन स्थित प्रसिद्ध Banke Bihari Temple मंदिर के आसपास के क्षेत्र के लिए एक व्यापक और समग्र विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि तैयार की जाने वाली योजना को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

विकास योजना में क्या-क्या शामिल होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकास योजना केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे आसपास के क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि योजना में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाए:

  • सड़क चौड़ीकरण
  • वाणिज्यिक गतिविधियों का विनियमन
  • होटल और धर्मशालाओं की व्यवस्था
  • पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं
  • आपातकालीन निकास मार्ग
  • सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन सुविधा

पीठ ने कहा कि मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए आधुनिक और सुव्यवस्थित प्रबंधन की आवश्यकता है।

“लीक से हटकर सोचें”: CJI

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने राज्य सरकार को “लीक से हटकर सोचने” की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की भौगोलिक और संरचनात्मक स्थिति अन्य बड़े मंदिरों से अलग है, इसलिए इसके लिए विशेष विकास मॉडल तैयार किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि Tirupati Temple की तुलना में बांके बिहारी मंदिर बेहद संकरी गलियों और छोटे परिसर में स्थित है, जिससे भीड़ प्रबंधन अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

Must Read -  सुप्रीम कोर्ट का आदेश: उच्च न्यायालय का पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र ट्रायल कोर्ट के आदेश से संबंधित होगा

मंदिर प्रशासन को लेकर विवाद

मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वैधानिक ट्रस्ट ढांचे के माध्यम से मंदिर प्रशासन अपने हाथ में लेने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार के हस्तक्षेप से सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और गोस्वामी समुदाय की भूमिका प्रभावित हो रही है।

CJI ने सुनाया मंदिर इतिहास का रोचक प्रसंग

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंदिर के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने जिला गजेटियर का हवाला देते हुए बताया कि मंदिर का निर्माण संत Swami Haridas ने कराया था।

सीजेआई ने अदालत में एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि मुगल सम्राट Akbar भेष बदलकर संत हरिदास से मिलने पहुंचे थे और भगवान कृष्ण के लिए गाए जा रहे भक्ति गीतों से अत्यंत प्रभावित हुए थे।

उन्होंने बताया कि अकबर ने संत हरिदास को पुरस्कार देने की पेशकश की, लेकिन नेत्रहीन संत ने अपने लिए कुछ भी लेने से इनकार कर दिया और केवल मंदिर के लिए भूमि मांगी।

सीजेआई ने टिप्पणी की, “हालांकि वे नेत्रहीन थे, फिर भी उन्हें पता था कि सामने अकबर ही हैं।”

गोस्वामी पक्ष ने उठाए धार्मिक परंपराओं के मुद्दे

गोस्वामी प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Shyam Divan ने अदालत में कहा कि दर्शन समय और पूजा पद्धति में बदलाव किए गए हैं, जिससे “प्राचीन काल से चली आ रही” धार्मिक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने 25 मार्च के उस आदेश पर भी सवाल उठाया, जिसमें “फूल बंगला सेवा” आयोजित करने के लिए ₹1,51,000 शुल्क निर्धारित किया गया था। उनका कहना था कि पहले केवल बिजली और संबंधित खर्च ही वसूले जाते थे।

समिति में नए सदस्यों की नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति में बदलाव करते हुए चार नए सदस्यों को नामित किया। इनमें:

  • रजत गोस्वामी
  • शैलेंद्र गोस्वामी
  • गोपेश गोस्वामी
  • हिमांशु गोस्वामी
Must Read -  महिला की इच्छा सर्वोपरि, जबरन गर्भ जारी रखना असंवैधानिक-सुप्रीम कोर्ट

शामिल हैं।

पीठ ने कहा कि धार्मिक परंपराओं और दैनिक पूजा-पद्धति के संरक्षण को लेकर दिए गए सुझावों पर समिति गंभीरता से विचार करेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति की कोई भी कार्रवाई मंदिर के आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

भीड़ प्रबंधन और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि अदालत मंदिर क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को स्वीकार करती है, लेकिन साथ ही धार्मिक परंपराओं और आस्था की निरंतरता बनाए रखने पर भी जोर दे रही है।

यह मामला अब केवल प्रशासनिक नियंत्रण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तीर्थस्थलों के विकास, भीड़ प्रबंधन और धार्मिक स्वायत्तता के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न बन चुका है।

Tags:
#SupremeCourt #BankeBihariTemple #Vrindavan #UPGovernment #TempleManagement #ReligiousRights #CrowdManagement #LegalNews #सुप्रीमकोर्ट #बांकेबिहारीमंदिर #वृंदावन #यूपीसरकार #मंदिरप्रबंधन #धार्मिकअधिकार #कानूनीखबर

Leave a Comment