SC ने कहा कि “गार्डन” स्पष्ट रूप से “Amenity” की श्रेणी में आता है
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित भूमि सौंपने और अपने खर्च पर गार्डन विकसित करने वाले भू-स्वामी को अतिरिक्त Amenity TDR/FSI का वैधानिक अधिकार मिलता है। यह अधिकार किसी LOI, undertaking या maintenance agreement से खत्म नहीं किया जा सकता।
अतिरिक्त Amenity TDR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 (MRTP Act) की धारा 126(1)(b) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई भू-स्वामी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित भूमि सरकार या नगर निगम को सौंपता है और उस पर अपने खर्च से सार्वजनिक सुविधा (Amenity) विकसित करता है, तो उसे अतिरिक्त Amenity TDR (Transferable Development Rights) या FSI (Floor Space Index) पाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होता है।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसा अधिकार किसी Letter of Intent (LOI), undertaking या maintenance agreement जैसी कार्यकारी शर्तों के जरिए छीना नहीं जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि TDR/FSI के रूप में मिलने वाला मुआवजा संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत संपत्ति के अधिकार से जुड़ा है और इसे केवल देरी (delay) या laches के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।
क्या था मामला?
महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने 1994 में मुंबई के चेंबूर स्थित Village Anik, Bhakti Park क्षेत्र की लगभग 98,369 वर्गमीटर भूमि को “गार्डन” विकसित करने के लिए आरक्षित किया था।
आरक्षण की शर्त थी कि भूमि मालिक स्वयं गार्डन विकसित करेंगे और बाद में उसे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को सौंप देंगे।
भू-स्वामियों ने 2001 में धारा 126(1)(b) MRTP Act तथा DCR 1991 के तहत TDR की मांग की। इसके बाद निगम ने LOI जारी किया, जिसमें यह शर्त रखी गई कि भू-स्वामी अपने खर्च पर गार्डन विकसित और 20 वर्षों तक उसका रखरखाव करेंगे तथा इसके बदले “Amenity TDR” का दावा नहीं करेंगे।
भूमि मालिकों ने गार्डन विकसित किया और भूमि निगम को सौंप दी। उन्हें भूमि के बदले प्राथमिक TDR तो मिल गया, लेकिन गार्डन विकसित करने के बदले अतिरिक्त Amenity TDR नहीं दिया गया।
17 साल बाद उठी अतिरिक्त TDR की मांग
2016 में लोकायुक्त के समक्ष शिकायतों के बाद BMC ने गार्डन का कब्जा अपने पास ले लिया। इसके बाद 2019 में भू-स्वामियों ने अतिरिक्त Amenity TDR की मांग की।
BMC ने यह कहते हुए मांग ठुकरा दी कि:
- दावा 17 साल की देरी से किया गया;
- DCPR 2034 में ऐसी TDR का प्रावधान नहीं है;
- LOI, undertaking और maintenance agreement में TDR न मांगने की शर्त थी।
इसके खिलाफ भू-स्वामियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला दिया। BMC ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
1. अतिरिक्त Amenity TDR वैधानिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 126(1)(b) MRTP Act के तहत मुआवजा दो हिस्सों में मिलता है:
- भूमि सौंपने के बदले TDR/FSI
- उस भूमि पर सार्वजनिक सुविधा विकसित करने के बदले अतिरिक्त TDR/FSI
अदालत ने कहा कि “गार्डन” स्पष्ट रूप से “Amenity” की श्रेणी में आता है। इसलिए भू-स्वामी अतिरिक्त Amenity TDR पाने के हकदार हैं।
“कार्यकारी शर्तें वैधानिक अधिकार खत्म नहीं कर सकतीं”
पीठ ने कहा कि जब किसी कानून के तहत मुआवजे का अधिकार निर्धारित है, तो कोई नगर निगम या कार्यकारी प्राधिकरण LOI या undertaking के जरिए उसे खत्म नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा:
“Section 126(1)(b) MRTP Act, Article 300-A का विस्तार है। एक बार जब कानून के तहत उचित मुआवजा तय हो गया, तो कार्यकारी शर्तों के जरिए उससे वंचित नहीं किया जा सकता।”
“देरी से दावा करने पर भी अधिकार खत्म नहीं होगा”
सुप्रीम कोर्ट ने BMC की “17 साल की देरी” वाली दलील भी खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि TDR/FSI के रूप में मुआवजा देना राज्य की निरंतर संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए केवल देरी या laches के आधार पर इस अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि जब कानून के तहत मुआवजा देय है, तो उसका दायित्व किसी औपचारिक आवेदन या समयसीमा पर निर्भर नहीं करता।
“Waiver” की दलील भी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि भू-स्वामियों ने जानबूझकर अपना अधिकार नहीं छोड़ा था।
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि आरक्षित होने के बाद प्राधिकरण और भू-स्वामी के बीच “bargaining power” बराबर नहीं रहती। ऐसे में TDR छोड़ने की शर्त वास्तव में बाध्यकारी थी, स्वैच्छिक नहीं।
पीठ ने टिप्पणी की:
“जो काम सीधे नहीं किया जा सकता, वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता।”
DCR 1991 के तहत बने अधिकार खत्म नहीं किए जा सकते
अदालत ने कहा कि भू-स्वामियों के अधिकार DCR 1991 के तहत उस समय ही “crystallise” हो गए थे, जब भूमि सौंपी गई और गार्डन विकसित किया गया।
इसलिए बाद में लागू हुए DCPR 2034 के आधार पर उन अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने BMC की अपील खारिज करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि भू-स्वामी अतिरिक्त Amenity TDR पाने के हकदार हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा देना संवैधानिक दायित्व है और इसे कार्यकारी समझौतों या तकनीकी आपत्तियों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।
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