इलाहाबाद हाईकोर्ट की ऐतिहासिक उपलब्धि: एक लाख फैसलों का हिंदी अनुवाद वेबसाइट पर उपलब्ध, जनता मुफ्त में पढ़ सकेगी निर्णय

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सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का भी अनुवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 तक अपने एक लाख फैसलों का हिंदी में अनुवाद कर वेबसाइट पर मुफ्त उपलब्ध करा दिया। सुवास प्रकोष्ठ ने सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का भी अनुवाद किया है।

प्रयागराज: न्याय को जनभाषा में पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक फैसलों को आम जनता तक उनकी भाषा में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 5 अक्टूबर 2026 तक हाईकोर्ट के एक लाख फैसलों का हिंदी में अनुवाद कर उन्हें आधिकारिक वेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध करा दिया गया है।

इस उपलब्धि के अवसर पर ‘द वर्नाक्युलर वायस ऑफ जस्टिस’ नामक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने एक लाखवें फैसले को स्वयं वेबसाइट पर अपलोड किया।

यह उपलब्धि हाईकोर्ट की AI Assisted Legal Translation Advisory, e-HCR और ILR कमेटियों के तत्वावधान में संचालित सुवास (SUVAS) प्रकोष्ठ ने हासिल की है।

मुख्य न्यायमूर्ति समेत कई न्यायाधीश रहे मौजूद

एक लाख फैसलों के हिंदी अनुवाद की उपलब्धि के अवसर पर न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा, कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजीत कुमार, न्यायमूर्ति समीर जैन और न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान भी उपस्थित रहे।

न्यायमूर्ति समीर जैन और न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने भी प्रतीकात्मक रूप से अपने निर्णय वेबसाइट पर अपलोड किए। न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने इस उपलब्धि पर सुवास प्रकोष्ठ की टीम को बधाई दी।

मुख्य न्यायमूर्ति और अन्य न्यायाधीशों ने फैसलों के हिंदी अनुवाद को न्याय तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

2023 में हुई थी सुवास प्रकोष्ठ की स्थापना

न्यायिक फैसलों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की पहल तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ के प्रयासों के बाद आगे बढ़ी।

  • 23 जनवरी 2023: सभी हाईकोर्ट में अनुवाद समितियां गठित करने के लिए पत्र लिखा गया।
  • 16 अगस्त 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुवास प्रकोष्ठ की स्थापना हुई।
  • 23 अगस्त 2023: हाईकोर्ट के पहले फैसले का हिंदी अनुवाद वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
  • 12 दिसंबर 2025: हिंदी अनुवादों की संख्या 50 हजार तक पहुंची।
  • 5 अक्टूबर 2026: एक लाख फैसलों के हिंदी अनुवाद का लक्ष्य हासिल हुआ।
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इस तरह सुवास प्रकोष्ठ ने लगभग तीन वर्षों में हिंदी अनुवादों की संख्या को एक लाख तक पहुंचाया।

किन फैसलों का हिंदी अनुवाद किया जा रहा है?

हाईकोर्ट का सुवास प्रकोष्ठ निर्धारित श्रेणियों के न्यायिक निर्णयों और आदेशों का हिंदी अनुवाद कर रहा है। इनमें शामिल हैं:

  • सभी AFR (Approved for Reporting) निर्णय।
  • तीन पृष्ठ से अधिक के अंतिम Non-AFR आदेश।
  • उत्तर प्रदेश से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले।
  • बॉम्बे और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले।

इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों को ऐसी भाषा में उपलब्ध कराना है, जिसे आम नागरिक, विद्यार्थी, वकील और शोधकर्ता आसानी से पढ़ और समझ सकें।

सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का भी अनुवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सुवास प्रकोष्ठ ने अब तक सुप्रीम कोर्ट के 9,161 फैसलों का हिंदी अनुवाद कर शीर्ष अदालत को भेजा है।

यह कार्य हाईकोर्ट के अनुवाद कार्यक्रम के दायरे को और व्यापक बनाता है। इससे सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों को भी हिंदी में उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति मिली है।

दो ई-पत्रिकाएं भी प्रकाशित कर रहा है हाईकोर्ट

फैसलों के अनुवाद के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट दो ई-पत्रिकाएं भी प्रकाशित कर रहा है।

1. न्यायभा—न्याय की किरण

संविधान दिवस, 26 नवंबर 2024 को शुरू की गई इस ई-पत्रिका के अब तक सात अंक प्रकाशित हो चुके हैं।

2. ऐतिहासिक निर्णय ई-पुस्तिका

फरवरी 2024 में शुरू हुई इस ई-पुस्तिका के अब तक छह अंक प्रकाशित किए जा चुके हैं।

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इन प्रकाशनों में देश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मुकदमों और न्यायिक फैसलों के हिंदी अनुवाद शामिल हैं।

चौरी-चौरा से केशव सिंह केस तक, ऐतिहासिक फैसले हिंदी में

हाईकोर्ट की ई-पुस्तिकाओं में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मामलों के हिंदी अनुवाद उपलब्ध हैं। इनमें चौरी-चौरा केस, केशव सिंह केस और राजनारायण बनाम इंदिरा गांधी जैसे चर्चित मामले शामिल हैं।

इन फैसलों का हिंदी में उपलब्ध होना न्यायिक इतिहास, संवैधानिक विकास और महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने में सहायक है।

आम जनता के लिए क्या है इसका महत्व?

अदालतों के अधिकांश निर्णय अंग्रेजी में उपलब्ध होने के कारण हिंदी भाषी नागरिकों के लिए कानूनी दस्तावेजों को समझना कई बार कठिन हो सकता है। ऐसे में फैसलों के हिंदी अनुवाद से नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया, कानूनी अधिकारों और अदालतों की व्याख्याओं को समझने में मदद मिल सकती है।

एक लाख फैसलों का निःशुल्क हिंदी अनुवाद न्यायिक जानकारी को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पहल का महत्वपूर्ण पड़ाव है। फैसले और ई-पत्रिकाएं हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

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