उच्च न्यायलय ने AIIMS को दिया आदेश! अवैध रूप से हटाए गए कर्मी को 30 अक्टूबर तक दें रु. 50 लाख-

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दिल्ली उच्च न्यायलय हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक याचिका की सुनवाई के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली को उसके पुराने कर्मचारियों को 50 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि जिसे नौकरी से अवैध रूप से निकाल दिया गया था. वहीं, अब से एम्स द्वारा 1980 के दशक में ड्राइवर के पद पर नियुक्त किए गए राज सिंह को पेंशन के तौर पर हर महीने 19,900 रुपए भी मिलेंगे.

जानकारी हो की याचिकाकर्ता के मुताबिक उन्हें अवैध रूप से नौकरी से निकाले जाने के बाद वे लेबर कोर्ट गए थे. जहां लेबर कोर्ट ने साल 1998 में नौकरी से हटाने को अवैध बता दिया था. इस दौरान उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि लेबर कोर्ट के आदेश को कई फोरमों में चुनौती दी गई और आखिर में एम्स द्वारा दायर विशेष अवकाश याचिका (Special Leave Petition) को बीते 3 जून 2016 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने खारिज कर दिया था. इसके चलते याचिकाकर्ता राज सिंह ने एडवोकेट बीटी कौल के माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को कानूनी नोटिस भेजकर आदेश का अनुपालन करने और रुपए का भुगतान करने की मांग की थी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया. इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था.

उच्च न्यायलय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को 50 लाख की राशि देने के दिए निर्देश

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्च की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए AIIMS को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 4 दिसंबर 1998 से रिटायरमेंट होने की तारीख 31 अक्तूबर 2016 तक के वेतन, छुट्टियों और ग्रेच्युटी के रूप में 50,49,079 रुपए का भुगतान किया जाए. इसके साथ ही जस्टिस ने कहा कि 19,900 रुपए महीना पेंशन के रूप में हर महीना भुगतान किया जाए. वहीं, AIIMS ने रुपए का मूल्यांकन कर कोर्ट को जानकारी दी थी. फिलहाल काउटिंग के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.

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हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर तक भुगतान के दिए निर्देश

ज्ञात हो की AIIMS अधिकारियों की ओर से एडवोकेट सोनाली मल्होत्रा ने कोर्ट को बताया कि वादी को कर्मचारी स्वास्थ्य स्कीम का जीवनभर लाभ उठाने के लिए अभी 30,000 रुपए का भुगतान भी करना है. इस पर कोर्ट ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता याचिका पर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है, इसे देखते हुए ये 30,000 रुपए भी उनकी तरफ से AIIMS को ही जमा करने होंगे.

कोर्ट ने कहा कि पूरी राशि का भुगतान 30 अक्तूबर तक जारी हो जाए और इसकी पुष्टि करते हुए एक एफिडेबिट 15 नवंबर तक जमा किया जाए. इस मामले में कोर्ट ने वादी के एडवोकेट को निर्देश दिए कि वे वादी के बैंक खातों की जानकारी AIIMS के एडवोकेट को साझा कर दें.