आरोपी ने बाद में दूसरी महिला से शादी कर ली
झारखंड हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर लगभग छह वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म के मुकदमे को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप दर्शाते हैं कि विवाह का वादा शुरुआत से ही झूठा था।
झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देने से किया इनकार
झारखंड हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को समाप्त करने से इनकार कर दिया, जिस पर एक महिला से शादी का झूठा वादा कर लगभग छह वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है।
न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर महिला के साथ संबंध बनाए और बाद में किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया।
महिला थाना में भी शादी का वादा किया था
अदालत ने अपने 29 जून के आदेश में कहा कि अभियोजन के अनुसार आरोपी ने लंबे समय तक विवाह का आश्वासन देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि महिला थाना में हुई बैठक के दौरान भी आरोपी ने महिला के साथ अपने संबंध को स्वीकार किया था और उससे विवाह करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद उसने बाद में किसी अन्य महिला से शादी कर ली।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि विवाह का वादा शुरू से ही वास्तविक नहीं था।
रांची ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती
हाईकोर्ट आरोपी द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision Petition) पर सुनवाई कर रहा था।
आरोपी ने रांची की ट्रायल कोर्ट के अक्टूबर 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपों से मुक्त (Discharge) किए जाने की उसकी मांग खारिज कर दी गई थी।
क्या हैं महिला के आरोप?
शिकायतकर्ता एक अविवाहित आदिवासी महिला है। उसके अनुसार वर्ष 2014 में दोनों की मुलाकात उस समय हुई थी, जब वे एक अपार्टमेंट में मजदूर के रूप में कार्य कर रहे थे।
महिला का आरोप है कि दोनों के बीच मित्रता और प्रेम संबंध विकसित हुए, जिसके बाद आरोपी ने उससे विवाह करने का वादा किया और कहा कि वह उसके बिना नहीं रह सकता।
इसी भरोसे पर आरोपी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जो अगस्त 2020 तक जारी रहे।
दूसरी महिला से कर ली शादी
महिला का आरोप है कि आरोपी ने अपने गांव जाने की बात कहकर कुछ दिनों में लौटने का आश्वासन दिया, लेकिन वापस आने के बजाय उसने किसी दूसरी महिला से विवाह कर लिया।
इसके बाद महिला ने 17 मार्च 2020 को रांची महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई।
महिला थाना में समझौते के बाद भी नहीं निभाया वादा
महिला के अनुसार शिकायत के बाद आरोपी महिला थाना में उपस्थित हुआ और उसने महिला के साथ संबंध स्वीकार करते हुए विवाह करने की सहमति भी दी।
इसी आश्वासन के आधार पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और शिकायत वापस ले ली गई।
हालांकि, महिला का आरोप है कि समझौते के बाद आरोपी फिर वहां से चला गया, विवाह नहीं किया और उससे बातचीत भी बंद कर दी।
गर्भपात कराने का भी आरोप
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि साथ रहने के दौरान वह गर्भवती हो गई थी।
उसके अनुसार आरोपी ने उसकी इच्छा और सहमति के बिना दवा देकर गर्भपात करा दिया।
बाद में महिला की शिकायत पर सक्षम अदालत ने दिसंबर 2022 में दुष्कर्म, गर्भपात कराने तथा मारपीट सहित अन्य आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का यह तर्क कि वह विवाह करना चाहता था, लेकिन उसके परिवार ने विरोध किया, एक बचाव (Defence) का विषय है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने या डिस्चार्ज आवेदन पर विचार करते समय बचाव पक्ष के साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जाता।
इन तथ्यों की जांच ट्रायल के दौरान साक्ष्य रिकॉर्ड होने के बाद ही की जा सकती है।
आरोपी ने क्या दलील दी?
आरोपी की ओर से अधिवक्ता सुमीत गडोदिया ने तर्क दिया कि दोनों के बीच केवल मित्रता और अच्छे संबंध थे।
उन्होंने कहा कि शादी के बहाने शारीरिक संबंध बनाने का आरोप पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है।
बचाव पक्ष का कहना था कि महिला आरोपी पर विवाह के लिए दबाव बना रही थी, जिसे उसने कभी स्वीकार नहीं किया।
यह भी कहा गया कि अप्रैल 2024 में आरोपी के किसी अन्य महिला से विवाह करने के बाद नाराज होकर शिकायतकर्ता ने झूठा मामला दर्ज कराया।
राज्य सरकार ने क्या कहा?
राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक श्वेता सिंह ने दलील दी कि आरोपी आरोप तय होने के चरण में ही अपना बचाव सिद्ध करने का प्रयास कर रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यह मामला शुरू से ही विवाह के झूठे वादे का है और आरोपी का उद्देश्य महिला से विवाह करना नहीं, बल्कि केवल उसका यौन शोषण करना था।
अभियोजन ने यह भी कहा कि महिला थाना में विवाह का आश्वासन देने के बावजूद आरोपी का भाग जाना और बाद में दूसरी महिला से विवाह कर लेना उसकी कथित धोखाधड़ीपूर्ण मंशा को और मजबूत करता है।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय
हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की पुनरीक्षण याचिका में कोई मेरिट नहीं है।
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और कहा कि मामले की सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी।
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