धारा 498A का दुरुपयोग नहीं होगा बर्दाश्त: सुप्रीम कोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति पर दर्ज FIR रद्द की

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सुप्रीम कोर्ट ने धारा 498A IPC और दहेज निषेध अधिनियम के तहत दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन के सामान्य उतार-चढ़ाव को ‘क्रूरता’ नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने झूठे और अस्पष्ट आरोपों पर आपराधिक मुकदमे से राहत दी। धारा 498A का दुरुपयोग नहीं होगा बर्दाश्त: सुप्रीम कोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर … Read more

दिल्ली हाईकोर्ट: दहेज मामलों में पति के दूर के रिश्तेदारों को फंसाना कानून का दुरुपयोग — कोर्ट ने एफआईआर रद्द की

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🧾दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामलों में आईपीसी की धारा 498A के दुरुपयोग पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि बिना सबूत दूर के रिश्तेदारों को फंसाना कानून की मंशा के विपरीत है। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने दो महिलाओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की। 📰दिल्ली हाईकोर्ट: दहेज मामलों में पति के दूर … Read more

“दहेज मृत्यु मामलों में ‘मृत्यु से ठीक पहले’ की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला”

"दहेज मृत्यु मामलों में 'मृत्यु से ठीक पहले' की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला"

दहेज मृत्यु मामलों में ‘मृत्यु से ठीक पहले’ की आवश्यकता की पुनःपुष्टि यह टिप्पणी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय करण सिंह बनाम हरियाणा राज्य गृह विभाग (2025 INSC 133) के प्रभावों का विश्लेषण करती है। अपीलकर्ता करण सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-बी और 498-A के तहत सत्र न्यायालय द्वारा दोषी … Read more

LIVE IN RELATIONSHIP के मामले में किसी महिला के खिलाफ पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता का दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होता-HC

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लिव-इन रिलेशन LIVE IN RELATIONSHIP को लेकर उच्च न्यायलय ने एक अहम बयान दिया है। केरल उच्च न्यायलय KERALA HIGH COURT ने एक हालिया फैसले में कहा कि लिव इन रिलेशन LIVE IN RELATIONSHIP के मामले में किसी महिला के खिलाफ पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता का दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होता। हाईकोर्ट ने … Read more

“शादी पूरी ना होना और शारीरिक अंतरंगता से इनकार करना मानसिक क्रूरता के बराबर, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक लेने का वैध आधार : HC

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला द्वारा अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना “मानसिक क्रूरता” है और यह उसके लिए (पति) हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत तलाक लेने का वैध आधार है। न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति विनय सराफ की … Read more

SC का कहना है कि HC को दहेज उत्पीड़न मामले में लगाए गए झूठे आरोपों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दायर FIR को रद्द कर देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि उच्च न्यायालय को अपीलकर्ताओं-अभियुक्तों के खिलाफ दायर एफआईआर को रद्द कर देना चाहिए था, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों से उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता था और इसके अलावा, शिकायतकर्ता के बयान में कई विरोधाभास थे। मामला इस प्रकार से है- (1) वर्तमान … Read more

महिला तलाक के बाद भी केवल तलाक से पहले की घटनाओं के लिए धारा 498A IPC के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है : गुजरात उच्च न्यायालय

गुजरात उच्च न्यायालय ने तलाक के लगभग 20 महीने बाद एक महिला द्वारा अपने पूर्व पति के साथ-साथ उसके परिवार के खिलाफ क्रूरता का आरोप लगाते हुए दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि एक महिला को तलाक के बाद भी भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत क्रूरता … Read more

वैवाहिक विवादों में पति के रिश्तेदारों को फंसाकर IPC की धारा 498-A का दुरुपयोग, HC ने रद्द की पूरी आपराधिक कार्यवाही

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सशरीर रात 9:00 बजे उपस्थित होने का आदेश

झारखंड उच्च न्यायालय ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 (‘सीआरपीसी’) की धारा 482 के तहत धारा 498-ए के एक मामले में शिकायतकर्ता के भाई-भाभी और भाभी के खिलाफ दायर पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए दायर एक याचिका में दंड संहिता, 1860 (‘आईपीसी’) के, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संजय कुमार द्विवेदी, जे की अदालत में … Read more

कर्नाटक HC ने कहा है कि दूसरी पत्नी की पति और उसके ससुराल वालों के खिलाफ दायर IPC की धारा 498-A के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं

कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 498ए से जुड़ी एक केस में दोषसिद्धि को रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि दूसरी पत्नी ने शिकायत की थी, इसलिए आईपीसी की धारा 498ए के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ दायर शिकायत पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। कर्नाटक उच्च न्यायलय ने आईपीसी की धारा 498ए (विवाहित महिला … Read more

DOWRY DEATH : शादी के 7 साल के भीतर ससुराल में पत्नी की अप्राकृतिक मौत पति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि केवल यह तथ्य कि एक पत्नी की शादी के सात साल के भीतर अपने ससुराल में अप्राकृतिक परिस्थितियों में मृत्यु हो गई, अपने आप में पति को दहेज हत्या के लिए दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने … Read more