इलाहाबाद हाईकोर्ट: IPC की धारा 420 और 406 में एकसाथ नहीं चल सकती आपराधिक कार्यवाही, गाजीपुर केस में समन आदेश रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक न्यास भंग) के तहत एकसाथ आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती। कोर्ट ने गाजीपुर के आतिफ रजा उर्फ शरजील रजा समेत तीन आरोपियों के खिलाफ जारी समन आदेश को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—सिविल विवाद को आपराधिक रंग न दें; मजबूत संदेह के बिना ट्रायल नहीं, आरोपी बरी

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विवाद से जुड़े एक केस में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि सिविल विवादों को आपराधिक मुकदमों में बदलना न्यायपालिका पर बोझ डालता है। पुलिस और ट्रायल कोर्ट को चार्जशीट दाखिल करने व चार्ज तय करने में अधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने पाया कि FIR में … Read more

गंभीर अपराधों में पीड़ित की व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मौजूदगी सुनिश्चित करना ही चाहिए ताकि तथ्य का पता चल सके – सुप्रीम कोर्ट

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गंभीर अपराधों और खास तौर पर महिलाओं के खिलाफ मामलों में पीड़िता की व्यक्तिगत रूप Personal Appearance से या वीडियो कॉन्फ्रेंस Video Conferencing के जरिए मौजूदगी सुनिश्चित करना हमेशा उचित होता ताकि पता चल सके कि समझौता वास्तविक है या नहीं: सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court ने कहा कि भले ही पीड़िता द्वारा समझौते … Read more

‘फर्जी एसएलपी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा “कानूनी पेशेवर” अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं

1151877 Supreme Court

कोई भी पेशेवर, कानूनी पेशेवर तो बिल्कुल नहीं, अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं है फर्जी’ एसएलपी मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी पेशेवर, कानूनी पेशेवर तो बिल्कुल नहीं, अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं है। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश … Read more

आपराधिक कार्यवाही केवल इसलिए रद्द नहीं की जा सकती क्योंकि आरोप सिविल विवाद का भी खुलासा करते हैं: इलाहाबाद HC

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ खंड पीठ ने माना कि केवल इसलिए कि आरोप एक नागरिक विवाद का भी खुलासा करते हैं, यह आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आधार नहीं होगा जब आरोप स्पष्ट रूप से संज्ञेय अपराध का कारण बनते हैं। लखनऊ पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 504 और 506 … Read more

‘दस्तावेज़ से छेड़छाड़’ के मामले में अनुशासनिक प्राधिकरण ने यदि साबित कर दिया तो आपराधिक मुक़दमे में किसी न्यायिक समीक्षा की ज़रूरत नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

न्यायिक समीक्षा के दायरे में कानून के स्थापित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पूरे साक्ष्य की फिर से जांच की, जैसे कि एक आपराधिक मुकदमे में दोषसिद्धि की अगले उच्च न्यायालय द्वारा फिर से जांच की जा रही हो। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति … Read more

‘ड्राफ्ट रूल्स ऑफ क्रिमिनल प्रैक्टिस, 2020’ के नियमों को अपनाए बिना, भौतिक वस्तुओं को एक अभियुक्त को प्रस्तुत किया जाना चाहिए: SC

सुप्रीम कोर्ट ने 2:1 के अनुपात में बहुमत से यह माना है कि ‘ड्राफ्ट रूल्स ऑफ क्रिमिनल प्रैक्टिस, 2020’ (जो अन्यथा अनिवार्य है) को अपनाए बिना भी सभी बयानों, दस्तावेजों और भौतिक वस्तुओं को एक अभियुक्त को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। हालाँकि पीठ का सर्वसम्मत मत था कि अपील ऐसे समय में की गई थी, … Read more

HC ने कहा हम सभी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों का जश्न मना रहे हैं, लेकिन हम उनके सम्मान के लिए कतई चिंतित नहीं-

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एक हत्यारा अपने शिकार से भौतिक शरीर को नष्ट कर देता है, परंतु एक बलात्कारी असहाय महिला की आत्मा को नीचा दिखाता है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बलात्कार के बढ़ते अपराधियों को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा वैसे तो हम सभी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों का जश्न मना रहे हैं, लेकिन … Read more

एकमात्र गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, डबल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा-

सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने कहा की दोहरे हत्याकांड के मामले में एकमात्र गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है । न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने माना है कि एकमात्र गवाह के बयान पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, आरोपी को अपराध … Read more

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा ब्रूटल रेप & मर्डर केस में सजा को बदलने पर कड़ा एतराज जताया-

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दिल्ली उच्च न्यायालय Delhi High Court ने सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court द्वारा निर्धारित कानून की एक स्थिति को दोहराया और कहा कि ट्रायल कोर्ट Trail Court खुद ‌दिए गए आजीवन कारावास के दंड को शेष प्राकृतिक जीवन के ‌लिए तय करने के लिए अहर्ता नहीं रखते है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की … Read more