AAP की मान्यता रद्द करने और उसके शीर्ष नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग, HC में PILदाखिल

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जनहित याचिका Satish Kumar Aggarwal ने दाखिल की

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में आम आदमी पार्टी की मान्यता रद्द करने और अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नेताओं ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में न्यायिक कार्यवाही का बहिष्कार किया।

Delhi High Court में आम आदमी पार्टी की मान्यता रद्द करने और उसके शीर्ष नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है।

याचिका में Election Commission of India को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह Aam Aadmi Party (AAP) का पंजीकरण रद्द करे तथा Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और Durgesh Pathak को संसद और विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए।

किसने दायर की याचिका?

यह जनहित याचिका Satish Kumar Aggarwal ने दाखिल की है।

याचिका में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को पक्षकार बनाया गया है।

क्या है याचिका का आधार?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी कार्यवाही में AAP नेताओं ने जस्टिस Swarana Kanta Sharma की अदालत में उपस्थित होने से इनकार किया।

पिटीशन के अनुसार, यह आचरण संवैधानिक अदालत की गरिमा और अधिकार को कमजोर करता है तथा Representation of the People Act, 1951 की धारा 29A(5) के तहत संविधान के प्रति “सच्ची निष्ठा और आस्था” रखने की शर्त का उल्लंघन है।

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मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला

याचिका में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स का उल्लेख किया गया है। दावा किया गया कि 27 अप्रैल 2026 को Arvind Kejriwal ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वह दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़ी कार्यवाही में न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के माध्यम से जस्टिस शर्मा की अदालत में पेश होंगे।

याचिका में यह भी कहा गया कि बाद में Manish Sisodia और Durgesh Pathak ने भी अदालत को इसी प्रकार की जानकारी दी।

‘न्यायिक कार्यवाही का बहिष्कार खतरनाक उदाहरण’

पिटीशन में कहा गया है कि यदि किसी पक्षकार को अदालत के आदेश से असहमति हो, तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं, जैसे उच्च अदालत में अपील।

हालांकि, केवल असंतोष के आधार पर न्यायिक कार्यवाही का बहिष्कार नहीं किया जा सकता।

याचिका में कहा गया कि ऐसा आचरण एक “खतरनाक उदाहरण” स्थापित कर सकता है और इससे न्यायपालिका में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।

‘कोर्ट में पेश होना वैकल्पिक नहीं’

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि न्यायिक कार्यवाही में भाग लेना किसी भी नागरिक या राजनीतिक दल के लिए वैकल्पिक नहीं माना जा सकता, जब तक कि सक्षम अदालत कानून के अनुसार छूट न दे।

पिटीशन में कहा गया कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है और राजनीतिक दलों को भी उसी मानक का पालन करना चाहिए।

क्या मांगी गई है राहत?

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि—

  • Election Commission of India को AAP का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश दिया जाए।
  • Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और Durgesh Pathak को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए।
  • अदालत न्यायिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे।
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कानूनी और राजनीतिक महत्व

यह याचिका ऐसे समय में दाखिल हुई है जब दिल्ली आबकारी नीति मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

मामले का संबंध न्यायपालिका के प्रति राजनीतिक दलों की जवाबदेही, संवैधानिक निष्ठा और चुनावी कानूनों की व्याख्या से जुड़ा होने के कारण इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट इस PIL पर सुनवाई के लिए क्या रुख अपनाता है और क्या चुनाव आयोग से इस संबंध में जवाब मांगा जाता है।

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