राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करने के मामले को गंभीर अवमानना माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करने के मामले को गंभीर अवमानना माना है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उसके ड्राइवर को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
Rajasthan High Court ने अदालत की कार्यवाही को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए इसे न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप और अदालत की अवमानना करार दिया है।
जस्टिस Anoop Kumar Dhand की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता और उसके ड्राइवर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ Contempt of Courts Act, 1971 के तहत अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
इसके साथ ही अदालत ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को ड्राइवर का मोबाइल फोन जब्त करने का निर्देश भी दिया।
क्या था मामला?
मामला Kamal Rathore v. State of Rajasthan से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एक व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था। जब उसे पकड़ा गया तो उसने रिकॉर्ड की गई कुछ सामग्री को डिलीट करने की भी कोशिश की।
अदालत द्वारा पूछताछ किए जाने पर उस व्यक्ति ने बताया कि वह याचिकाकर्ता का ड्राइवर है और अपने मालिक के मामले की कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहा था।
कोर्ट ने माना गंभीर हस्तक्षेप
हाईकोर्ट ने कहा कि बिना अनुमति न्यायालय की कार्यवाही रिकॉर्ड करना न्याय प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप है।
अदालत ने माना कि यह कृत्य न केवल अदालत की गरिमा को प्रभावित करता है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान भी उत्पन्न करता है।
कोर्ट ने कहा:
“कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करना अदालत की अवमानना है क्योंकि यह न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करता है और न्यायालय की गरिमा को कम करता है।”
वीडियो रिकॉर्डिंग नियमों का उल्लंघन
पीठ ने यह भी कहा कि Rajasthan High Court Rules for Video Conferencing for Courts, 2020 के नियम 3(vi) में स्पष्ट रूप से अदालत की कार्यवाही को किसी भी तरीके से रिकॉर्ड करने पर रोक लगाई गई है।
अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति का आचरण न्यायिक कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने जैसा है।
मोबाइल जब्त करने का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को निर्देश दिया कि वह ड्राइवर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करें और उसका मोबाइल फोन जब्त करें।
साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता और उसके ड्राइवर दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग पर सख्त संदेश
यह आदेश अदालतों में बढ़ते मोबाइल उपयोग और अनधिकृत रिकॉर्डिंग की घटनाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Rajasthan High Court ने साफ संकेत दिया है कि न्यायिक कार्यवाही की गोपनीयता और गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला अदालतों में डिजिटल अनुशासन बनाए रखने और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।
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