हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। सर्कुलर के तहत जजों के लिए कार पूलिंग और कर्मचारियों के लिए सीमित वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू की गई है।
Himachal Pradesh High Court ने सरकारी खर्चों में कटौती, ईंधन बचत और प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी नए सर्कुलर में न्यायाधीशों और कर्मचारियों के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
सर्कुलर के अनुसार, अब हाईकोर्ट में जजों के लिए कार पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि रजिस्ट्री के कर्मचारियों को सीमित स्तर पर वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा भी दी जाएगी।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम
Himachal Pradesh High Court प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण और कार्य प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
यह आदेश भारत सरकार के Department of Personnel and Training (DoPT) और Supreme Court of India द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर लागू किया गया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी इस सर्कुलर को न्यायिक प्रशासन में लागत नियंत्रण की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
जजों के लिए कार पूलिंग व्यवस्था
नई गाइडलाइन के तहत अब आवश्यकता पड़ने पर एक ही वाहन में एक से अधिक न्यायाधीश यात्रा कर सकेंगे।
हाईकोर्ट प्रशासन का कहना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सर्कुलर में इसे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
कर्मचारियों को मिलेगी वर्क फ्रॉम होम सुविधा
नई व्यवस्था के अनुसार हाईकोर्ट रजिस्ट्री की प्रत्येक शाखा और सेक्शन में 50 प्रतिशत तक कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी जा सकती है।
हालांकि यह सुविधा स्वतः लागू नहीं होगी। इसके लिए संबंधित रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था के बावजूद कार्यालय के कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और पर्याप्त संख्या में कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहेंगे।
हर समय उपलब्ध रहना होगा
सर्कुलर में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाएगी, उन्हें फोन पर हर समय उपलब्ध रहना होगा।
जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मचारी को तुरंत कार्यालय उपस्थित होना पड़ेगा।
इसके अलावा प्रत्येक शाखा के संबंधित रजिस्ट्रार को हर सप्ताह रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया गया है ताकि कार्य व्यवस्था प्रभावित न हो।
जरूरत पड़ने पर समाप्त हो सकती है सुविधा
हाईकोर्ट प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी शाखा में कार्य की प्रकृति को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था प्रभावी नहीं पाई जाती, तो संबंधित रजिस्ट्रार इस सुविधा को सीमित या पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं।
इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि प्रशासनिक लचीलापन बनाए रखते हुए न्यायिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
न्यायिक संस्थानों में बदलती कार्य संस्कृति
कोविड-19 महामारी के बाद देशभर के न्यायिक और सरकारी संस्थानों में डिजिटल और हाइब्रिड कार्य संस्कृति को लेकर कई प्रयोग किए गए हैं।
Himachal Pradesh High Court का यह कदम न्यायिक संस्थानों में आधुनिक प्रशासनिक प्रबंधन और लागत नियंत्रण के संतुलित मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है, तो अन्य न्यायिक संस्थान भी इसी तरह की नीतियों पर विचार कर सकते हैं।
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