E100 वाहनों को मंजूरी, लेकिन एथेनॉल कहां से आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल

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फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles) ऐसे वाहन होते हैं, जिन्हें पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किया जाता है

सुप्रीम कोर्ट ने E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता पर केंद्र सरकार से सवाल किया। सुनवाई में उत्पादन क्षमता, सप्लाई व्यवस्था, एथेनॉल आवंटन नीति और किसानों के हितों पर चर्चा हुई।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों यानी E100 वाहनों को नियामकीय मंजूरी दिए जाने के बाद ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। अदालत ने पूछा कि यदि ऐसे वाहनों को अनुमति दी जा रही है, तो उनकी जरूरत पूरी करने के लिए एथेनॉल की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ एथेनॉल आवंटन से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए E100 वाहनों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाया।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने की आवश्यकता होगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए स्थगित कर दी।

क्या है E100 ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?

E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग शुद्ध एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। इसका उपयोग उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें इस तरह के ईंधन के अनुकूल बनाया गया हो।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles) ऐसे वाहन होते हैं, जिन्हें पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किया जाता है। उदाहरण के लिए, E85 ईंधन में सामान्यतः 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी, जिसमें फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन को भी शामिल किया गया।

हालांकि, E100 के लिए नियामकीय मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर यह ईंधन तत्काल उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए पर्याप्त उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था की जरूरत होगी।

पेट्रोल में 20 प्रतिशत से आगे एथेनॉल मिश्रण पर फिलहाल तत्काल योजना नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है।

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भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने, आयात खर्च घटाने और घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

ऐसे में E100 वाहनों को मंजूरी देने और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा नीति के बीच तालमेल महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि भविष्य में E100 वाहनों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो उनकी जरूरत के मुताबिक उत्पादन और वितरण क्षमता विकसित करना भी जरूरी होगा।

किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि एथेनॉल नीति को केवल ईंधन की उपलब्धता और औद्योगिक जरूरतों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें पर्यावरण, व्यापक जनहित और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं पर भी विचार होना चाहिए।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अटॉर्नी जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह अपनी दलीलों में किसानों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे। सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि एथेनॉल को प्रोत्साहन देने से किसानों को लाभ मिल सकता है। एक अन्य वकील ने भी केंद्र की नीति में किसानों के हितों को ध्यान में रखे जाने की बात कही।

एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उपज का इस्तेमाल होने के कारण यह मुद्दा कृषि आय, औद्योगिक मांग और ईंधन नीति के बीच संबंधों से भी जुड़ा है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ कितना होगा, यह उत्पादन की लागत, कच्चे माल की कीमतों और एथेनॉल की मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

एथेनॉल आवंटन विवाद क्या है?

सुप्रीम कोर्ट एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 के लिए आवंटन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है। विवाद का एक हिस्सा कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश से संबंधित है, जिसमें एथेनॉल निर्माता की ओर से आवंटन बढ़ाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

मामले में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) से संबंधित आवंटन व्यवस्था भी शामिल है।

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बताया गया कि एक एथेनॉल निर्माता ने सप्लाई वर्ष 2025-26 के लिए अधिक आवंटन की मांग की थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने तेल विपणन कंपनियों को उस मांग पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने लंबे समय के समझौतों और लागू सरकारी नियमों के संदर्भ में उन कारखानों के हितों पर भी विचार किया था, जो तेल विपणन कंपनियों को एथेनॉल आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा। 30 जून को शीर्ष अदालत ने संबंधित आदेश के संदर्भ में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता तेल विपणन कंपनी का तर्क था कि हाईकोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर सकता है।

आगे की सुनवाई में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

आगामी सुनवाई में एथेनॉल आवंटन, उत्पादन क्षमता और राष्ट्रीय मिश्रण नीति के बीच संतुलन प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं। E100 वाहनों के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग की क्षमता और वितरण व्यवस्था का विस्तार भी महत्वपूर्ण होगा।

साथ ही, एथेनॉल उत्पादन से किसानों को होने वाले संभावित लाभ और इस नीति के व्यापक आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों पर भी विचार किया जा सकता है।

निष्कर्ष: E100 वाहनों को नियामकीय मंजूरी देना वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका व्यावहारिक लाभ उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के सवालों से स्पष्ट है कि वाहन प्रौद्योगिकी, ईंधन उपलब्धता, एथेनॉल आवंटन और किसानों के हितों के बीच तालमेल इस विवाद के प्रमुख पहलू हैं।

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