एयरलाइंस की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, बुजुर्ग दंपती को ₹2.22 लाख मुआवजा

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आयोग ने यह भी कहा कि एयरलाइन ने “अपने अहंकार” में अदालत के समक्ष उपस्थित होकर आरोपों का खंडन करना भी उचित नहीं समझा, जिसके कारण उसके खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्यवाही की गई।

गुरुग्राम उपभोक्ता आयोग ने उड़ान रद्द होने, बोर्डिंग से इनकार और पर्याप्त सहायता न देने पर अमेरिकन एयरलाइंस को 84 और 78 वर्षीय बुजुर्ग दंपती को ₹2.22 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।

फ्लाइट रद्द होने और खराब सेवा पर अमेरिकन एयरलाइंस को झटका

गुरुग्राम उपभोक्ता आयोग ने अमेरिकन एयरलाइंस को सेवा में गंभीर कमी का दोषी ठहराते हुए 84 वर्षीय हरभजन सिंह बैंस और उनकी 78 वर्षीय पत्नी आशा रैनी को ₹2.22 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। दंपती की दिल्ली-न्यूयॉर्क-शिकागो यात्रा के दौरान उड़ान रद्द होने, बोर्डिंग से इनकार और पर्याप्त सहायता न मिलने के कारण उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ा।

10 घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार, छूट गया पारिवारिक समारोह

उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजीव जुंडाल तथा सदस्य ज्योति सिवाच और खुशविंदर कौर की पीठ ने 3 जून को पारित आदेश में कहा कि न्यूयॉर्क से शिकागो जाने वाली उड़ान रद्द होने के कारण दोनों वरिष्ठ नागरिकों को 10 घंटे से अधिक समय तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा।

आयोग ने कहा कि इस देरी की वजह से दंपती शिकागो में आयोजित पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो सके, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा, तनाव और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा।

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बोर्डिंग से इनकार और ट्रांसफर में भी नहीं मिली मदद

दंपती ने आरोप लगाया कि 27 जुलाई 2025 को शिकागो से फिलाडेल्फिया होते हुए एम्स्टर्डम जाने वाली उड़ान में उन्हें गलत तरीके से वीजा संबंधी आपत्तियां उठाकर बोर्डिंग से रोक दिया गया। मेडिकल समस्याओं के बावजूद उन्हें करीब ढाई घंटे तक काउंटर पर खड़ा रहना पड़ा, जिसके कारण उनकी फ्लाइट भी छूट गई।

इसके अलावा, फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट पर एक उड़ान से दूसरी उड़ान तक पहुंचने के लिए उन्हें उचित कार्ट या सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उन्हें अत्यधिक शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

एयरलाइन के रवैये पर आयोग की सख्त टिप्पणी

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने मानसिक और शारीरिक पीड़ा के समर्थन में टिकट, बोर्डिंग पास और शपथपत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, जिन्हें उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

आयोग ने यह भी कहा कि एयरलाइन ने “अपने अहंकार” में अदालत के समक्ष उपस्थित होकर आरोपों का खंडन करना भी उचित नहीं समझा, जिसके कारण उसके खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्यवाही की गई।

आयोग ने कहा कि दोनों शिकायतकर्ताओं की उम्र 84 और 78 वर्ष है और उन्हें यात्रा के दौरान गंभीर मानसिक उत्पीड़न, पीड़ा और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। इसलिए अमेरिकन एयरलाइंस सेवा में गंभीर कमी की दोषी है।

दिल्ली से शिकागो की यात्रा बनी परेशानी का कारण

हरभजन सिंह बैंस और आशा रैनी ने दिल्ली से न्यूयॉर्क और वहां से शिकागो तक की यात्रा के लिए अमेरिकन एयरलाइंस की टिकट बुक की थी। लेकिन यात्रा के दौरान लगातार देरी, उड़ान रद्द होने, बोर्डिंग से इनकार और उचित सहायता के अभाव के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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उन्होंने मानसिक तनाव, दर्द और शारीरिक कष्ट के लिए मुआवजे की मांग करते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को मजबूत करता है फैसला

यह फैसला स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस भी वरिष्ठ नागरिक यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकतीं। आर्थिक नुकसान के प्रत्यक्ष प्रमाण न होने के बावजूद आयोग ने मानसिक और शारीरिक पीड़ा को मान्यता देते हुए मुआवजा प्रदान किया।

यह निर्णय वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और एयरलाइंस की जवाबदेही को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

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