‘फर्जी एसएलपी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा “कानूनी पेशेवर” अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं

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कोई भी पेशेवर, कानूनी पेशेवर तो बिल्कुल नहीं, अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं है फर्जी’ एसएलपी मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी पेशेवर, कानूनी पेशेवर तो बिल्कुल नहीं, अपने आपराधिक कृत्यों के लिए अभियोजन से प्रतिरक्षित नहीं है। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश … Read more

अभियोजन पक्ष के बयान और परिस्थितियों की श्रृंखला में काफी खामियाँ और भेद हैं, हत्या के आरोपी को इसी कारण से सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

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सर्वोच्च न्यायालय ने एक हत्या के आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष के बयान में परिस्थितियों की श्रृंखला में महत्वपूर्ण खामियाँ और दरारें हैं। न्यायालय ने कहा कि सुरक्षित रूप से यह राय देने और पुष्टि करने के लिए कि अपीलकर्ता अपराधी है, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साक्ष्य … Read more

दुर्घटना में शामिल वाहन के चालक की ओर से की गई लापरवाही को यात्रियों पर आरोपित नहीं किया जा सकता – सर्वोच्च न्यायालय

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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि दुर्घटना में शामिल वाहन के चालक की ओर से की गई लापरवाही को यात्रियों पर आरोपित नहीं किया जा सकता, ताकि यात्रियों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को दिए जाने वाले मुआवजे को कम किया जा सके। न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के निष्कर्षों को पलट दिया, जिसने मोटर वाहन में … Read more

शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद HC के रजिस्ट्रार जनरल को प्रदेश के सभी बार एसोसिएशन द्वारा 2023-24 में वकीलों के अदालती कामकाज से दूर रहने के बारे में मांगा ब्यौरा

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में वकीलों द्वारा हड़ताल करने और अदालती कामकाज से दूर रहने के मुद्दे पर कड़ा रूख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रदेश के सभी बार एसोसिएशन द्वारा 2023-24 में अदालती कामकाज से दूर रहने के बारे में ब्यौरा मांगा है। न्यायालयों में मौजूदा … Read more

‘सत्य को असत्य से अलग करने का प्रयास अवश्य किया जाना चाहिए’ और जहां ऐसा पृथक्करण असंभव है, तो दोषसिद्धि नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी को बरी करते हुए कहा

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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ‘फाल्सस इन यूनो, फाल्सस इन ओमनीबस’ ‘Falsus in uno, falsus in omnibus’ की कहावत केवल सावधानी का नियम है और भारतीय संदर्भ में इसे कानून के शासन का दर्जा नहीं मिला है। लेकिन सत्य को असत्य से अलग करने का प्रयास अवश्य किया जाना चाहिए और जहां ऐसा पृथक्करण असंभव … Read more

वकीलों द्वारा याचिकाओं में बार-बार झूठे बयान देने पर नाराज सुप्रीम कोर्ट, कहा कि – हमारा भरोसा हिल रहा, रोज 80 केस लिस्ट होते हैं, हर पेज से गुजरना मुश्किल

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सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की समय-पूर्व रिहाई सुनिश्चित करने के लिए वकीलों द्वारा अदालत के समक्ष और याचिकाओं में भी बार-बार झूठे बयान देने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि जब इस तरह के मामले सामने आते हैं, तो हमारा विश्वास डगमगा जाता है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह … Read more

SC ने B.Tech छात्र हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने के केरल HC के आदेश को खारिज कर दिया क्योकि मृतक के परिवार की सुनवाई नहीं हुई

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सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में बी.टेक. छात्र श्यामल मंडल की हत्या के मामले में दोषी की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने मृतक के परिवार सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद सजा के … Read more

‘एन.आई. एक्ट’ की धारा 138 के तहत अपराध को एनआई एक्ट की धारा 147 के तहत केवल संबंधित शिकायतकर्ता की सहमति से ही समझौता किया जा सकता है – सर्वोच्च न्यायालय

Cheque पर केवल साइन कर देना एनआई एक्ट के तहत अपराध नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत अपराध को एनआई अधिनियम की धारा 147 के तहत केवल संबंधित शिकायतकर्ता की सहमति से ही समझौता किया जा सकता है। प्रस्तुत अपीलें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आपराधिक विविध मामला संख्या 970/2023 और आपराधिक विविध अपील संख्या 3701/2023 में पारित दिनांक … Read more

“इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही वापस ले लिया गया”: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे कर्मचारी को बहाल करते हुए उस अवधि के लिए 50 प्रतिशत वेतन देने का दिया आदेश

'कागज पर कागज'

सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय रेलवे के एक कर्मचारी को सेवा में बहाल करने का आदेश दिया, क्योंकि उसने पाया कि उसके त्यागपत्र को स्वीकार किए जाने से पहले ही वापस ले लिया गया था। संक्षिप्त तथ्य– अपीलकर्ता 1990 से प्रतिवादी की सेवा में है। 13 वर्ष की सेवा करने के पश्चात, उसने 05.12.2013 को अपना … Read more

‘अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति एक संवैधानिक अधिकार’, वादी ने किया दावा-‘जस्टिस ओका’ के खिलाफ मुकदमा चलाने हेतु राष्ट्रपति के समक्ष आवेदन किया दायर

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सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राजीव दहिया एक बार फिर चर्चा में हैं। वह 2017 में तब सुर्खियों में आए थे जब उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उन्होंने यह जुर्माना नहीं भरा तो अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का दोषी ठहराया है। सुराज इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष … Read more