हाई कोर्ट ने चेक बाउंसिंग मामले में अवैध रूप से हथकड़ी लगाने के लिए विधि छात्र को ₹2 लाख का मुआवजा देने का दिया निर्देश-

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आरोपी विधि छात्र ने पुलिस की इस हरकत के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था-

कर्नाटक हाई कोर्ट धारवाड़ पीठ Karnataka High Court Dharwad Bench ने पुलिस द्वारा एक आरोपी विधि छात्र Accused Law Student को हथकड़ी लगाने और कथित तौर से सार्वजनिक रूप से उसकी परेड कराने के मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी व्यक्ति को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए किसी आरोपी व्यक्ति को आमतौर पर हथकड़ी Handcuff नहीं लगाई जा सकती।

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कैमरे में उस विशेष समय पर होने वाली बातचीत को रिकॉर्ड करने के लिए माइक्रोफोन से लैस होना चाहिए और गिरफ्तारी की प्रक्रिया की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग Video Recording दोनों को कम से कम एक वर्ष अवधि at least One year time span के लिए बनाए रखा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने बेलगावी जिले के चिक्कोडी के 30 वर्षीय सुप्रीत इश्वत दिवाते द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार करते हुए निर्देश जारी किया, जिसमें उन्हें सार्वजनिक स्थान पर अवैध रूप से हथकड़ी illegal handcuffing लगाने के लिए मुआवजे की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने यह साबित करने के लिए अपने एक दोस्त द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग करके रिकॉर्ड किया गया वीडियो पेश किया था कि उसे हथकड़ी लगाई गई थी।

2019 में चिक्कोडी तालुक में एक ट्रायल कोर्ट Trail Court द्वारा जारी एक गैर-जमानती वारंट के आधार पर उसे गिरफ्तार करते हुए अधिकार क्षेत्र की पुलिस ने उसे हथकड़ी लगा दी थी, जो उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 NI Act के तहत दर्ज चेक अनादर के मामले में पेश नहीं हुआ था।

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कोर्ट ने हथकड़ी लगाने सम्बन्धी शीर्ष अदालत के दिशा निर्देश बताये-

कर्नाटक हाई कोर्ट धारवाड़ पीठ Karnataka High Court Dharwad Bench के न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त व्यक्तियों, विचाराधीन कैदियों और दोषियों को कब हथकड़ी लगाई जा सकती है, इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने अपने दिए निर्णय में स्पष्ट कहा की, “केवल बेहद आवश्यक परिस्थितियों में ही किसी आरोपी को हथकड़ी पहनाई जा सकती है। जब इस तरह की हथकड़ी लगाई जाती है, तो गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को हथकड़ी लगाने के कारणों को दर्ज करना होता है, जिसे न्यायालय की जांच को बनाए रखना होगा।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले किसी विचाराधीन कैदी को हथकड़ी लगाने के लिए पुलिस को निचली अदालत की अनुमति लेनी होगी।

न्यायालय ने कहा, “अगर इस तरह की अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया जाता है और विचाराधीन कैदियों को हथकड़ी लगाई जाती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।”

याची को 2 लाख रूपये मुआवजे का भुगतान करें-

याचिकाकर्ता सुप्रीत ईश्वर दिवाते ने पुलिस की इस हरकत के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने उस कृत्य का वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किया जिसे पुलिस ने खुद रिकॉर्ड किया था।

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जबकि यह देखते हुए कि उसे हथकड़ी लगाने का कोई उचित कारण नहीं था जैसा कि कानून या शीर्ष अदालत द्वारा जारी दिशा निर्देशों में प्रदान किया गया है।

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कोर्ट ने कहा की इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के भीतर राज्य को याचिकाकर्ता को मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये की राशि देने का निर्देश देता हूं। राज्य दोषी अधिकारियों से इस राशि की वसूली करने के लिए स्वतंत्र है।

केस टाइटल – सुप्रित ईश्वर डिवेट बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य
केस नंबर – 2019 की रिट याचिका संख्या 115362
कोरम – न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज