वकील ने OLA CABS पर रु 62/- ज़्यादा लेने के लिए किया मुकदमा, केस जीत मिले रु 15,000/-, जानिए विस्तार से-

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OLA CAB ओला कैब की पेमेंट चार्जिंग नीतियों को लेकर केस करने वाले एक वकील को रु 15,000/- का मुआवजा मिला है.

ज्ञात हो की मुंबई न्यायालय के एक वकील श्रेयंस ममानिया ने पिछले साल 19 जून को अपने परिवार के साथ कांदिवली से कालाचौकी की सवारी की थी. जब उन्होंने यात्रा की बुकिंग की, तो ऐप ने किराया रु 372/- दिखाया. हालांकि, जब ममानिया और उनका परिवार अपने गंतव्य पर पहुंचे, तो कैब चालक ने उन्हें बताया कि उन्हें किराया रु 434/- चुकाना होगा.

कैब का किराया डेस्टिनेशन पर पहुंचने के बाद अचानक से रुपये 62/- बढ़ गया-

मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक वकील श्रेयस ममानिया ने बताया कि “किराया 62 रुपये बढ़ गया. मैंने ड्राइवर से पूछा कि यह कैसे हुआ, और उसने कहा ‘ऐसी चीजें होती हैं, आप इसे बड़ा मुद्दा क्यों बना रहे हैं.’ इससे मुझे गुस्सा आया. मैंने कस्टमर केयर पर कॉल की, लेकिन बमुश्किल कोई प्रतिक्रिया हुई. ड्राइवर ने मुझसे विनती की कि अगर मैं उसे पूरी राशि का भुगतान नहीं करता, तो उससे चार्ज लिया जाएगा. “

अधिवक्ता श्रेयस ममानिया ने जानकारी दी की, “मैंने 434 रुपये का भुगतान किया और बाद में ओला कस्टमर केयर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. अन्तोगत्वा, मैंने उपभोक्ता फोरम से संपर्क करने का फैसला किया. मेरे परिवार के सदस्यों ने मुझे कहा कि मैं सिर्फ 62 रुपये के लिए उपभोक्ता फोरम में शिकायत क्यों दर्ज कर रहा हूं, उन्होंने कहा कि कि यह कोई बड़ी बात नहीं थी. “

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श्रेयस ममानिया को मिला रूपये 15 हजार का मुआवजा-

श्रेयस ममानिया ने बताया की उसने किसी की नहीं सुनी और उन्होंने ने 17 अगस्त को शिकायत दर्ज करने का फैसला किया. फोरम ने 2 सितंबर को इसे स्वीकार कर लिया. 16 दिसंबर को कार्यवाही हुई. ममानिया ने मुआवजे के तौर पर चार लाख रुपये की मांग की थी हालांकि, फोरम ने कहा कि यह अनुपात से बाहर था. हालांकि फोरम ने सहमति व्यक्त की कि ममानिया को मुआवजा मिलना चाहिए और ओला कैब्स को आदेश के 30 दिनों के भीतर मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये और शिकायत की लागत के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया.

ओला को अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करने की जरूरत है – अधिवक्ता

शिकायत करने वाले वकील श्रेयस ममानिया ने कहा कि कई लोग कहेंगे कि यह सिर्फ 62 रुपये था. लेकिन मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि ओला इसे समझे और अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव करे. अगर रोजाना उसके 100 ग्राहकों के साथ भी ऐसा होता है, तो ओला को इससे 5,000 रुपये मिलते हैं, संभव है कि यह संख्या अधिक हो. हमें इसके खिलाफ लड़ना चाहिए.”