कथित रूप से 440 करोड़ रुपये जमा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के कथित ₹440 करोड़ वाले बैंक खातों के फ्रीज मामले में HDFC बैंक को पार्टी के कुल जमा और वित्तीय लेनदेन का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने खातों को जल्दबाजी में फ्रीज किए जाने पर भी सवाल उठाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने HDFC बैंक को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को HDFC बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को निर्देश दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों में जमा कुल राशि तथा उन खातों में हुए वित्तीय लेनदेन का विस्तृत हलफनामा (Affidavit) 8 जुलाई तक अदालत में दाखिल करे।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बैंक शाखा प्रबंधक को यह निर्देश टीएमसी के बैंक खाते फ्रीज किए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
आंतरिक विवाद के बीच फ्रीज हुए थे टीएमसी के खाते
टीएमसी में चल रहे आंतरिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका में कहा गया कि पार्टी के तीन बैंक खाते, जिनमें कथित रूप से 440 करोड़ रुपये जमा थे, फ्रीज कर दिए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
इससे पहले टीएमसी नेता अरूप विश्वास ने बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि संगठन के भीतर गंभीर विवाद चल रहा है। इसके अगले ही दिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
हाईकोर्ट ने जल्दबाजी में कार्रवाई पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शिकायत 18 जून को दर्ज हुई थी और उसमें कोई विशिष्ट आरोप नहीं लगाए गए थे।
पीठ ने कहा कि उसी दिन एफआईआर भी दर्ज हुई और अगले ही दिन बैंक ने खाते फ्रीज कर दिए। अदालत ने पूछा कि इतनी जल्दबाजी में यह कार्रवाई कैसे हुई और जांच एजेंसी के पास उस समय ऐसा कौन-सा ठोस आधार था, जिसके आधार पर खाते फ्रीज किए गए।
याचिकाकर्ता की दलील: केवल संदेह के आधार पर खाते फ्रीज
ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर एफआईआर दर्ज की और पहले तीन खातों को फ्रीज किया गया। बाद में पांच अन्य खातों पर भी रोक लगा दी गई।
उन्होंने कहा कि केवल एक शिकायत के आधार पर पार्टी के सभी वित्तीय लेनदेन रोक देना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट: जांच पूरी होने से पहले आरोपों की सच्चाई नहीं परख सकते
अदालत ने कहा कि जब पुलिस मामले की जांच कर रही है, तब इस स्तर पर आरोपों की सत्यता की विस्तृत जांच करना उचित नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि अदालत का वर्तमान उद्देश्य केवल यह तय करना है कि जांच के दौरान खातों पर डेबिट फ्रीज (Debit Freeze) जारी रखना कितना आवश्यक है।
अदालत ने जांच एजेंसी से भी पूछा अहम सवाल
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि आरोप सही हों और खातों में अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) जमा हो, तो जांच एजेंसी के पास क्या विकल्प रहेगा।
अदालत ने यह भी पूछा कि यदि केवल खाते को जब्त (Seize) किया जाए लेकिन उसे फ्रीज न किया जाए, तो उसका क्या प्रभाव होगा।
विशेष अधिकारियों की नियुक्ति पर भी विचार
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रारंभिक रूप से सुझाव दिया कि कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को विशेष अधिकारी (Special Officers) नियुक्त किया जा सकता है, जो खाते के संचालन की निगरानी करें, यदि ममता बनर्जी गुट को खाते संचालित करने की अनुमति दी जाती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मांगा समय
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कुछ दिनों के लिए आदेश टालने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि यह मामला खातों की कुर्की (Attachment) का नहीं बल्कि जब्ती (Seizure) का है। जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे यह दिखाया जा सकेगा कि धन का कथित रूप से दुरुपयोग या हेरफेर (Siphoning) किया जा रहा था।
उन्होंने अदालत से कहा कि जांच रिपोर्ट दाखिल करने तक किसी भी गुट को खाते संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
अभिषेक मनु सिंघवी की दलील
टीएमसी के ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी चुनाव हार चुकी है और उसके कई सदस्य भी अलग हो गए हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र में किसी राजनीतिक दल को केवल पुलिस कार्रवाई के माध्यम से उसके वित्तीय संसाधनों से वंचित नहीं किया जा सकता। दोनों गुट अपने अधिकारों को लेकर अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं, लेकिन राज्य तंत्र का उपयोग कर किसी राजनीतिक दल को निष्क्रिय (Paralyse) नहीं किया जा सकता।
दूसरे पक्ष की दलील
वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज कौल ने कहा कि टीएमसी का वैध प्रतिनिधित्व कौन करता है, इसका निर्णय भारत निर्वाचन आयोग करेगा।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी गुट द्वारा धन निकालने की कोशिश की जा रही है, तो जांच एजेंसी को इसकी जांच करने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को टीएमसी का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त है।
मामले में आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने HDFC बैंक को 8 जुलाई तक टीएमसी के खातों से संबंधित विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि जांच के दौरान खातों को संचालित करने की अनुमति दी जाए या डेबिट फ्रीज जारी रखा जाए।
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