परिस्थितिजन्य साक्ष्य वाले मामलों में उद्देश्यता महत्वपूर्ण: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति को किया बरी

सुप्रीम कोर्ट

  सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को बरी करते हुए दोहराया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामलों में अभियोजन पक्ष के लिए उद्देश्य (मोटिव) का निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अदालत आरोपी द्वारा दायर की गई आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी थी, … Read more

“प्रतिशोध के साथ-साथ सुधारात्मक भाग भी देखना होगा”: सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2013 में 4.5 साल की बच्ची से बलात्कार के आरोपी व्यक्ति की उम्रकैद की सजा कम करते हुए कहा

किसी आपराधिक मामले से निपटते समय, प्रतिशोध के साथ-साथ सुधारात्मक भाग को भी देखना पड़ता है। सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च 2013 में 4.5 वर्षीय बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा कम कर दी है। न्यायालय ने अपीलकर्ता को दी गई आजीवन कारावास की सजा को संशोधित कर 13 … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा किशोरियों को ‘अपनी यौन इच्छाओं को नियंत्रित करने’ की सलाह देने की ‌निंदा की

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सुप्रीम कोर्ट की ओर इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए “इन रे: राइट टू प्राइवेसी ऑफ एडोलसेंट” टाइटल से एक स्वत: संज्ञान मामला शुरू किया, कहा कि जजों से उपदेश देने की अपेक्षा नहीं की जाती सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों के यौन व्यवहार के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को अस्वीकार … Read more