कोर्ट ने कहा—आंतरिक चोट झेलने वाले पीड़ित भी विकलांगता कानून के दायरे में आएं।
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक मामलों में सजा को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र से कानून में संशोधन की मांग की। कोर्ट ने कहा—आंतरिक चोट झेलने वाले पीड़ित भी विकलांगता कानून के दायरे में आएं।
🔴 एसिड अटैक कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एसिड अटैक मामलों में मौजूदा सजा प्रावधानों को अपर्याप्त बताते हुए गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कानून में अधिक कठोर और प्रभावी सजा व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि अपराधियों पर वास्तविक निवारक प्रभाव पड़े।
⚖️ आंतरिक चोट वाले पीड़ित भी विकलांगता कानून के दायरे में
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि एसिड अटैक के वे पीड़ित, जिन्हें बाहरी विकृति (disfigurement) नहीं हुई है लेकिन आंतरिक चोटें हैं, उन्हें भी विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत संरक्षण मिलना चाहिए।
अदालत ने कहा कि वर्तमान कानून में यह एक गंभीर कमी है, क्योंकि इसमें केवल बाहरी रूप से विकृत पीड़ितों को ही शामिल किया गया है।
🧾 केंद्र सरकार को संशोधन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि अधिनियम की अनुसूची (Schedule) में संशोधन किया जाए, ताकि उन पीड़ितों को भी शामिल किया जा सके जिन पर एसिड जबरन डाला या पिलाया गया हो, भले ही उनके शरीर पर बाहरी निशान न हों।
अदालत ने टिप्पणी की, “यदि यह संशोधन अधिसूचित किया जाता है तो हम इसकी सराहना करेंगे।” मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की गई है।
📊 वर्तमान परिभाषा में खामियां उजागर
अदालत ने पाया कि मौजूदा कानून एसिड अटैक पीड़ितों को केवल उन मामलों तक सीमित करता है, जहां शरीर पर स्पष्ट विकृति हो। इससे ऐसे कई पीड़ित बाहर रह जाते हैं, जिन्हें गंभीर आंतरिक क्षति हुई होती है—जैसे निगलने के जरिए एसिड दिया जाना।
⚠️ एसिड की अवैध बिक्री पर भी सख्ती के संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की अवैध बिक्री पर भी कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि जो लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए एसिड बेचते हैं, उन्हें भी ऐसे अपराधों में जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन पर परोक्ष (vicarious) दायित्व तय होना चाहिए।
💰 हमलावरों की संपत्ति जब्त करने का सुझाव
पीठ ने यह भी कहा कि एसिड अटैक जैसे अपराधों में दोषियों की संपत्ति जब्त करने पर विचार होना चाहिए। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि पीड़ित की गरिमा प्रभावित होती है, तो आरोपी को आर्थिक रूप से भी कड़ा दंड क्यों न दिया जाए।
कोर्ट ने यहां तक सुझाव दिया कि हमलावर की संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदारी को भी जब्त किया जा सकता है।
📈 मामलों में “चिंताजनक वृद्धि” पर अदालत की चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने एसिड अटैक मामलों की संख्या और उनकी क्रूरता में बढ़ोतरी को “चिंताजनक” बताया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि रोकथाम के लिए मौजूदा तंत्र पर्याप्त नहीं है और अधिक मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता है।
🛡️ पीड़ितों की सुरक्षा के लिए याचिका पर सुनवाई
अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन पीड़ितों के लिए सुरक्षा और अधिकारों की मांग की गई थी, जिन्हें जबरन एसिड दिया गया या जिनके शरीर पर बाहरी चोट नहीं दिखती। इस मामले ने कानून की सीमाओं और सुधार की जरूरत को उजागर किया।
🌐 न्यायिक दृष्टिकोण में बदलाव के संकेत
यह मामला दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट एसिड अटैक जैसे अपराधों को लेकर अधिक संवेदनशील और सख्त रुख अपना रहा है। अदालत का यह दृष्टिकोण भविष्य में कानूनों के पुनर्गठन और पीड़ितों को व्यापक सुरक्षा देने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
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